दिल्ली लाल क़िला ब्लास्ट: अब तक 9 लोगों की मौत, लोगों के शरीर के टुकड़े दूर जाकर गिरे

On: November 11, 2025 8:47 AM
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ब्लास्ट

10 नवंबर 2025 को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास एक विस्फोटक घटना हुई जिसमें कम से कम 9 लोगों की मौत हुई और 24 लोग घायल हुए। यह धमाका एक Hyundai i20 कार में शाम 6:52 बजे लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के पास हुआ। प्रारंभिक जांच में इस घटना को जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) से जुड़ा आतंकवादी हमला माना जा रहा है, जिसका एक पुलवामा से संबंध सामने आया है। यह घटना 14 सालों में दिल्ली में सबसे बड़ा धमाका है।​


लाल किले के पास हुआ 2025 का ब्लास्ट: कैसे हुआ?

घटना का विवरण

सोमवार शाम 6:52 बजे दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास एक जोरदार विस्फोट हुआ जिसने पूरे इलाके को हिला दिया। मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के ठीक सामने खड़ी एक Hyundai i20 कार में यह भीषण धमाका हुआ। धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास खड़ी 6-8 अन्य गाड़ियां भी आग में घिर गईं। आग की लपटें आसमान को छूने लगीं और धुएं से पूरा इलाका भर गया। दुकानों के शीशे टूट गए, स्ट्रीट लाइटें गिर गईं और गली-मोहल्ले के चारों ओर अफरा-तफरी मच गई।​

धमाकें में हताहतों का विवरण

विस्फोट में तुरंत 9 लोगों की मौत की पुष्टि हुई जबकि 24 लोग बुरी तरह घायल हुए। घायलों को तुरंत लोकनायक जयप्रकाश (LNJP) अस्पताल में भेजा गया जहां उनका इलाज चल रहा है। घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीदों ने बताया कि धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि लोग हवा में उछल गए। एक गवाह ने कहा कि उन्होंने सड़क पर शरीर के अंग बिखरे हुए देखे।​

सुरक्षा प्रतिक्रिया

दमकल की करीब 15-20 गाड़ियां घटनास्थल पर पहुंचीं और आग बुझाने का काम किया। राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और फॉरेंसिक विभाग की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल सक्रिय हो गई और पूरे इलाके को कॉर्डन ऑफ कर दिया गया। गृह मंत्री अमित शाह व्यक्तिगत रूप से अस्पताल पहुंचे और जांच की निगरानी की।​


ब्लास्ट क्यों हुआ: जांच और संबंध

जैश-ए-मोहम्मद का संबंध

विस्फोट के समय दिल्ली में पहले से ही एक बड़ी आतंकवादी साजिश का पर्दाफाश हो चुका था। सोमवार की सुबह ही फरीदाबाद में पुलिस को 2,900 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री मिली थी जिसमें 360 किग्रा अमोनियम नाइट्रेट और 2,500 किग्रा बम बनाने का रसायन शामिल था। इस साजिश के तहत जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और अंसार गजवत-उल-हिंद (AGUH) नामक आतंकवादी संगठन दिल्ली में सीरीज ब्लास्ट की योजना बना रहे थे।​

आतंकवादी नेटवर्क का खुलासा

अल-फलाह विश्वविद्यालय से संबंधित डॉक्टर सहित कई शिक्षित व्यावसायिक इस आतंकवादी मॉड्यूल में शामिल थे। डॉक्टर मुजम्मिल शकील (Muzammil Shakeel) जो एक डॉक्टर और शिक्षक थे, उन्हें फरीदाबाद के किराए के मकान से गिरफ्तार किया गया जहां विस्फोटक सामग्री रखी थी। डॉक्टर अदील अहमद रदर को भी सहारनपुर से गिरफ्तार किया गया। इस “व्हाइट-कॉलर आतंकवादी नेटवर्क” में पुलवामा का एक डॉक्टर उमर मोहम्मद भी शामिल था जो संदेह के घेरे में है।​

पुलवामा कनेक्शन

विस्फोट में इस्तेमाल की गई Hyundai i20 कार का ट्रेसिंग फरीदाबाद में मोहम्मद सलमान तक पहुंचा जिन्होंने इसे ढेढ़ साल पहले पुलवामा के तारिक नामक व्यक्ति को बेच दिया था। पुलिस की जांच में पता चला कि कार को कई बार खरीदा और बेचा गया। यह पहली बार है कि कश्मीर-आधारित आतंकवादी नेटवर्क लाल किले के पास ऐसे बड़े पैमाने पर हमला करने का प्रयास कर रहा है।​

जांच का मौजूदा स्थिति

NSG, NIA, दिल्ली पुलिस और फॉरेंसिक टीमें सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रहीं और संदिग्ध की पहचान के लिए काम कर रहीं। जांच एजेंसियां पकड़े गए आतंकवादियों से पूछताछ भी कर रहीं कि क्या उनके समूह ने यह हमला किया। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सभी कोणों से जांच की जा रही है।​


दिल्ली में धमाकों का संपूर्ण इतिहास

1985: ट्रांजिस्टर बम धमाके

दिल्ली में आतंकवादी हमलों का इतिहास 1985 में खालिस्तानी अलगववादियों द्वारा समन्वित ट्रांजिस्टर बम धमाकों से शुरू हुआ। आतंकवादियों ने ट्रांजिस्टर रेडियो में बम छिपाकर सार्वजनिक स्थानों, बस स्टैंड और भीड़ वाली जगहों पर छोड़ दिए। इस समन्वित हमले में दिल्ली में अकेले 49 लोग मारे गए और 127 से अधिक घायल हुए।​

Complete Chronology of Major Bomb Blasts in Delhi (1985-2025)

1996: लाजपत नगर विस्फोट

21 मई 1996 को लाजपत नगर सेंट्रल मार्केट में शाम के समय एक भीषण बम विस्फोट हुआ। यह शनिवार की शाम था और बाजार खरीददारों से भरा हुआ था। इस हमले में 13 लोगों की मौत हुई और 39 लोग घायल हुए। जम्मू-कश्मीर इस्लामिक फ्रंट (JKIF) ने इसकी जिम्मेदारी ली। यह वह समय था जब कश्मीर से आतंकवाद की लपटें राजधानी में पहुंच चुकी थीं।​

1997: सिलसिलेवार बम विस्फोट

1997 में दिल्ली को एक के बाद एक बम विस्फोटों से दहला दिया गया। 1 अक्टूबर 1997 को सदर बाजार के पास दो बम विस्फोट हुए जिनमें करीब 30 लोग घायल हुए। महज 9 दिन बाद 10 अक्टूबर को शांतिवन, कौड़िया पुल और किंग्सवे कैंप में तीन विस्फोट हुए जिनमें 1 व्यक्ति की मौत और 16 लोग घायल हुए।​

18 अक्टूबर 1997 को रानी बाग मार्केट में जुड़वां विस्फोट हुए जिनमें 1 की मृत्यु और 23 लोग घायल हुए। 26 अक्टूबर 1997 को करोल बाग मार्केट में दो विस्फोट हुए जिनमें 1 व्यक्ति की जान गई और 34 लोग घायल हुए।​

30 नवंबर 1997 को लाल किले के पास चांदनी चौक में दो शक्तिशाली विस्फोट हुए जिनमें 3 लोगों की मौत और 73 लोग घायल हुए। साल के अंत में 30 दिसंबर 1997 को पंजाबी बाग के पास एक बस में विस्फोट हुआ जिसमें 4 लोग मारे गए और 30 घायल हुए।​

2000 का दशक: लाल किले और अन्य स्थलों पर हमले

27 फरवरी 2000 को पहाड़गंज में विस्फोट हुआ जिसमें 8 लोग घायल हुए। 16 मार्च 2000 को सदर बाजार में धमाका हुआजिसमें 7 लोग घायल हुए।​

18 जून 2000 को लाल किले के पास दो शक्तिशाली विस्फोट हुए जिनमें 2 लोगों की मौत हुई, जिनमें एक 8 साल की बालिका भी शामिल थी, और कई घायल हुए।​

22 दिसंबर 2000 को लाल किले पर लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के 2 आतंकवादियों ने सशस्त्र हमला किया। आतंकवादियों ने 7वीं राजपूताना राइफल्स के दो सैनिक और एक नागरिक सुरक्षाकर्मी को गोली से मार दिया। आतंकवादी अशफाक अरीफ को मौत की सजा दी गई।​

2001: संसद पर हमला

13 दिसंबर 2001 को लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने भारतीय संसद पर सशस्त्र हमला किया। दिल्ली पुलिस के 6 जवान, संसद सुरक्षा सेवा के 2 कर्मचारी और 1 माली शहीद हुए। इस 9 लोगों की मौत की घटना के कारण भारत-पाकिस्तान में तनाव की स्थिति बन गई।​

2005: दिवाली से पहले भीषण धमाके

29 अक्टूबर 2005 को दिवाली से ठीक दो दिन पहले दिल्ली में सबसे भयावह सीरीज ब्लास्ट हुआ। सरोजिनी नगर, पहाड़गंज और गोविंदपुरी में तीन विस्फोट एक ही समय में हुए। सरोजिनी नगर का विस्फोट सबसे भयानक था जहां अकेले 43 लोगों की मृत्यु हुई। कुल मिलाकर इन तीनों विस्फोटों में 62 लोग मारे गए और 210 से अधिक घायल हुए। लश्कर-ए-तैयबा ने “इस्लामिक इंक़लाब महाज” नाम से इसकी जिम्मेदारी ली।​​

पहले 22 मई 2005 को लिबर्टी और सत्यम सिनेमा हॉल में दो विस्फोट हुए जिनमें 1 की मौत और 60 लोग घायल हुए।​

2006: जामा मस्जिद विस्फोट

14 अप्रैल 2006 को ऐतिहासिक जामा मस्जिद के आंगन में दो विस्फोट हुए। पहला विस्फोट शाम 5:26 बजे वज़ूखाना के पास हुआ और दूसरा 7 मिनट बाद कुछ मीटर दूर हुआ। कम से कम 13-14 लोग घायल हुए। यह जुम्मे का दिन था और मस्जिद में करीब 1,000 लोग मौजूद थे।​​

2008: भीषण सीरीज ब्लास्ट

13 सितंबर 2008 को दिल्ली में एक और विनाशकारी सीरीज ब्लास्ट हुआ। करोल बाग (गफ्फार मार्केट), कनॉट प्लेस और ग्रेटर कैलाश-I में पांच विस्फोट 31 मिनट के भीतर हुए। कुल 26-30 लोगों की मौत हुई और 90-135 लोग घायल हुए। इंडियन मुजाहिदीन (IM) ने इसकी जिम्मेदारी ली। साथ ही इंडिया गेट, रीगल सिनेमा और पार्लियामेंट स्ट्रीट पर 4 जिंदा बम भी मिले जिन्हें निष्क्रिय कर दिया गया।​​

27 सितंबर 2008 को मेहरौली के फ्लावर मार्केट (सराय) में एक टिफिन में रखा बम फटा जिसमें 3 लोगों की मौत हुई और 23 घायल हुए।​

2010: जामा मस्जिद के पास कार विस्फोट

19 सितंबर 2010 को जामा मस्जिद के पास एक कार में विस्फोट हुआ लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ।​

2011: दिल्ली हाई कोर्ट विस्फोट

25 मई 2011 को दिल्ली हाई कोर्ट की पार्किंग में विस्फोट हुआ लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ और केवल एक कार को नुकसान पहुंचा।​

7 सितंबर 2011 को दिल्ली हाई-कोर्ट के बाहर एक विस्फोटक ब्रीफकेस में रखा बम फटा। यह 14 साल में दिल्ली का सबसे बड़ा हमला था इससे पहले। 11 लोगों की मौत हुई और 64-76 लोग घायल हुए। इंडियन मुजाहिदीन इसका जिम्मेदार था।​


दिल्ली के ब्लास्ट के पीछे आतंकवादी संगठन

लश्कर-ए-तैयबा (LeT)

पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा दिल्ली में सबसे सक्रिय आतंकवादी संगठन रहा है। 1997 के बाद से 2005 तक लश्कर-ए-तैयबा ने कई बड़े हमले किए। 2000 का लाल किला हमला, 2000 का लाल किला बम विस्फोट और 2005 के सरोजिनी नगर बम विस्फोट इसी संगठन के जिम्मेदारी में आते हैं।​

जैश-ए-मोहम्मद (JeM)

जैश-ए-मोहम्मद (Army of Mohammed) पाकिस्तान का एक अन्य प्रमुख आतंकवादी संगठन है जिसकी स्थापना 2000 में मसूद अज़हर द्वारा की गई थी। यह संगठन कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाना और विदेशी सेनाओं को अफगानिस्तान से बाहर निकालना चाहता है। 2001 का संसद पर हमला इसका एक प्रमुख हमला था। वर्तमान 2025 के लाल किले के ब्लास्ट के पीछे भी JeM का संदेह है।​

इंडियन मुजाहिदीन (IM)

इंडियन मुजाहिदीन (Indian Mujahideen) को छात्र इस्लामिक आंदोलन (SIMI) का अंग माना जाता है। 2008 के सरोजिनी नगर और 2011 के हाई-कोर्ट विस्फोटों के लिए यह संगठन जिम्मेदार था।​


संपूर्ण आंकड़े: दिल्ली में आतंकवाद का नुकसान

रक्षा अध्ययन संस्थान (IDSA) की रिपोर्ट बताती है कि 1997 से लेकर अब तक दिल्ली में कुल 26 बड़े धमाके हो चुके हैं। इन सभी हमलों में 92 से अधिक लोग मारे गए और 600 से ज्यादा घायल हुए। नवीनतम 2025 का विस्फोट (9 मृत्यु) इस कुल संख्या को और बढ़ाता है।​


दिल्ली में 1985 से लेकर 2025 तक के चार दशकों के दौरान आतंकवादी हमले एक निरंतर समस्या रही हैं। लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 का यह ब्लास्ट न केवल 14 सालों में सबसे बड़ी घटना है, बल्कि यह भारत की सुरक्षा प्रणाली के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है। जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तान-आधारित आतंकवादी संगठन अब शिक्षित पेशेवारों को आतंकवादी नेटवर्क में शामिल कर रहे हैं, जिससे खतरा और अधिक बढ़ गया है।​

दिल्ली पुलिस, NSA, NIA और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को इस नई “व्हाइट-कॉलर आतंकवाद” की चुनौती से निपटने के लिए अधिक सतर्क और आधुनिक तरीके अपनाने होंगे। साथ ही, सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा कड़ी की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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