पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा सालों तक थानों में खड़े जब्त वाहनों पर बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय दिया है। कोर्ट ने कहा है कि आधुनिक तकनीक के दौर में वाहनों को लंबे समय तक थानों में खड़ा रखना अव्यवहारिक और अनुपयोगी है। पहचान और साक्ष्य के लिए उच्च गुणवत्ता वाले फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग पर्याप्त मानी जाएगी।
डिजिटल सबूत ही काफी—वाहन लंबे समय तक रखने की जरूरत नहीं
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि डिजिटल सबूत को अनिश्चितकाल तक सुरक्षित रखा जा सकता है, इसलिए वाहन को जब्त रखकर खराब होने देने का कोई तर्कसंगत आधार नहीं है। इससे पुलिस स्टेशन में पड़ने वाली भीड़ और वाहनों की खराब हालत से भी राहत मिलेगी।
किन वाहनों पर लागू होगा आदेश?
अदालत ने अपने निर्देश में कहा कि यह आदेश पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के सभी न्यायिक अधिकारियों को भेजा जाए।
यह निर्णय उन वाहनों पर लागू होगा, जिन्हें—
किसी विशेष कानून के तहत जब्त रखना जरूरी नहीं है
या कोर्ट के किसी आदेश के कारण आवश्यक रूप से रोका न गया हो
हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिला अदालतें वाहन रिलीज याचिकाओं को बिना ठोस कारण के खारिज न करें।
निचली अदालत का आदेश हाईकोर्ट ने किया रद्द
यह फैसला उस मामले में आया है जिसमें निचली अदालत ने हमले से जुड़े एक वाहन की रिहाई पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट ने इस फैसले को रद्द करते हुए कहा—
आरोपियों की गिरफ्तारी न होना,
वाहन रोकने का आधार नहीं है।
कोर्ट ने उदाहरण देते हुए कहा, “यदि कोई घटना मेट्रो, विमान या ट्रेन में हो जाए, तो क्या इन वाहनों को भी सालों तक जब्त रखा जाएगा?”
लंबे समय तक थानों में खड़े रहने से वाहन हो जाते हैं बेकार
हाईकोर्ट ने चेताया कि वर्षों तक थाने में पड़े वाहन—
मौसम के प्रभाव से खराब हो जाते हैं,
जंग खा जाते हैं,
कीमत में भारी गिरावट आ जाती है।
इससे सरकारी संसाधनों पर बोझ बढ़ता है और पहचान की प्रक्रिया भी मुश्किल हो जाती है। इसलिए, भविष्य में थानों में वाहनों को रखने की आवश्यकता को न्यूनतम किया जाए।











