हरियाणा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के लाखों लोगों के लिए एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी फैसला लिया है। राज्य सरकार ने गाँवों के आबादी देह क्षेत्रों (Abadi Deh Areas) में रह रहे लोगों को उनकी भूमि का वैधानिक स्वामित्व (Legal Ownership) दिलाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। अब ड्रोन सर्वेक्षण और प्रॉपर्टी कार्ड के आधार पर लोगों को उनकी जमीन का आधिकारिक मालिकाना हक प्रदान किया जाएगा।
क्या है नया अध्यादेश?
राज्य के विधि एवं विधायी विभाग ने ‘हरियाणा आबादी देह (स्वामित्व अधिकारों का निहितिकरण, अभिलेखन एवं समाधान) अध्यादेश’ जारी कर इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। यह प्रस्ताव 3 नवंबर को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मंजूर किया गया था, जिसे राज्यपाल की स्वीकृति भी मिल गई है।
ग्रामीणों को क्या मिलेगा फायदा?
इस अध्यादेश के लागू होने के बाद ग्रामीणों को निम्नलिखित प्रमुख लाभ मिलेंगे:
पहली बार कानूनी प्रमाण: ग्रामीणों को पहली बार अपनी संपत्ति का कानूनी प्रमाण पत्र (प्रॉपर्टी कार्ड) मिलेगा।
आसानी से बैंक ऋण: जमीन के वैध मालिकाना हक के आधार पर उन्हें बैंकों से ऋण लेना आसान हो जाएगा।
सरकारी योजनाओं का लाभ: विभिन्न सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ लेने में अब कोई दिक्कत नहीं होगी।
भूमि विवादों का समाधान: वर्षों से चले आ रहे कई भूमि विवादों के स्वतः समाधान की संभावना बनेगी।
संपत्ति का मूल्य बढ़ेगा: वैधानिक दस्तावेज मिलने से संपत्ति का बाजार मूल्य बढ़ेगा।
ड्रोन सर्वे की क्या भूमिका होगी?
इस पूरी प्रक्रिया की रीढ़ ड्रोन सर्वेक्षण होगा। ड्रोन के माध्यम से प्रत्येक भूमि की सीमाओं, क्षेत्रफल और वहाँ बनी संरचनाओं का अत्यधिक सटीक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। यह रिकॉर्ड सरकारी अभिलेखों में एक प्रमाणिक दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी।
क्यों जरूरी था यह कदम?
अब तक, गाँवों के आबादी देह क्षेत्रों की भूमि अक्सर राजस्व रिकॉर्ड में किसी एक व्यक्ति के नाम दर्ज नहीं होती थी। इस कारण ग्रामीणों को अपनी ही जमीन के लिए सरकारी प्रमाण-पत्र बनवाने, बैंक से लोन लेने या अन्य सुविधाएं हासिल करने में कानूनी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। इस अध्यादेश का उद्देश्य सीधे तौर पर इन्हीं समस्याओं का स्थायी समाधान प्रदान करना है।
यह कदम हरियाणा सरकार की ग्रामीण विकास और ‘सबका साथ, सबका विकास’ की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और राज्य में भूमि सुधारों की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।













