हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश को भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। सरकार द्वारा जिला कष्ट निवारण समितियों (ग्रीवेंस कमेटी) से मंगवाई गई पहली फीडबैक रिपोर्ट में तीन प्रमुख विभागों – पुलिस, राजस्व और बिजली – का प्रदर्शन बेहद खराब पाया गया है। सूत्रों के मुताबिक, सीएम सैनी ने इन विभागों के लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और उनकी संपत्ति की जांच के आदेश दिए हैं।
किन विभागों की रिपोर्ट सबसे खराब?
सरकार के गोपनीय सूत्रों के अनुसार, फीडबैक रिपोर्ट में निम्नलिखित तीन विभाग सबसे निचले पायदान पर रहे:
गृह विभाग (पुलिस): सीएम नायब सैनी के प्रत्यक्ष नियंत्रण वाले इस विभाग के बारे में जनता की शिकायतों का निपटारा करने में गंभीर लापरवाही के आरोप सामने आए हैं।
राजस्व विभाग: उपमुख्यमंत्री विपुल गोयल के अधीन इस विभाग के कर्मचारियों पर फाइलों को बेवजह लटकाए रखने के गंभीर आरोप हैं।
बिजली विभाग: कैबिनेट मंत्री अनिल विज के इस विभाग के बारे में “मोटी शुल्क” (रिश्वत) वसूलने के सबसे ज्यादा आरोप लगे हैं।
क्या हैं रिपोर्ट में मुख्य आरोप?
जांच में सामने आया है कि इन विभागों के कई अधिकारी और कर्मचारी:
जनता की समस्याओं को निपटाने के लिए बिल्कुल भी गंभीर नहीं हैं।
फाइलों को बेवजह लटकाकर रखते हैं और काम में जानबूझकर देरी करते हैं।
काम करवाने के नाम पर मोटी रिश्वत (जेब खर्ची) वसूलते हैं। अगर रिश्वत नहीं दी जाती, तो फाइल को बंद कर दिया जाता है।
सरकार की अगली कार्रवाई क्या होगी?
इन गंभीर आरोपों के मद्देनजर, मुख्यमंत्री नायब सैनी ने सीएमओ के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं:
ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों के बारे में और विस्तृत फीडबैक एकत्रित किया जाए।
उनकी संपत्ति की जांच करवाई जाए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनकी आय और संपत्ति में असंतुलन तो नहीं है।
फिलहाल इन अधिकारियों के नाम गोपनीय रखे गए हैं, लेकिन जल्द ही उनके खिलाब बड़ी कार्रवाई की योजना बनाई जा रही है।
यह कदम हरियाणा सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।









