सिरसा में प्राकृतिक खेती पर जिला कार्यशाला: किसान ने मांग की, “खाद पर मिलने वाली सब्सिडी सीधे हमें दो”

On: December 13, 2025 9:23 AM
Follow Us:
सिरसा

सिरसा में शुक्रवार को कृषि विभाग द्वारा आयोजित प्राकृतिक खेती पर एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला के दौरान एक किसान ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया। जमाल गांव निवासी किसान रविंद्र ने मांग की कि रासायनिक खाद पर दी जाने वाली सब्सिडी सीधे प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों के खाते में डाली जानी चाहिए, ताकि इस पद्धति को वास्तविक बढ़ावा मिल सके।

विवाद का केंद्र: खाद सब्सिडी बनाम प्राकृतिक खेती प्रोत्साहन

कार्यक्रम के दौरान जब कृषि विभाग के डॉ. सुभाष चंद्र प्राकृतिक खेती के लाभ बता रहे थे, तब किसान रविंद्र ने खड़े होकर कहा, “सरकार नहीं चाहती कि किसान प्राकृतिक खेती करे। सरकार यूरिया और डीएपी पर एक बैग पर 1500 रुपए सब्सिडी देती है।”उन्होंने तर्क दिया कि ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल के जरिए सालाना 6 क्विंटल यूरिया (लगभग 10,000 रुपए की सब्सिडी) का ऑनलाइन पंजीकरण करवाया जाता है। उनका सुझाव था कि यह सब्सिडी राशि सीधे उन किसानों के खाते में जाए जो प्राकृतिक खेती करते हैं, जिससे अधिक से अधिक किसान इस ओर आकर्षित होंगे।

अधिकारियों का जवाब: सरकारी योजनाओं का हवाला

इस पर डॉ. सुभाष ने जवाब दिया कि सरकार पहले से ही प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को 4,000 रुपए की प्रोत्साहन राशि, मुफ्त प्रशिक्षण, निशुल्क प्रमाणीकरण और ब्रांडिंग के लिए 20,000 रुपएकी सहायता दी जाती है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे “जहरमुक्त खेती” को बढ़ावा दें और पर्यावरण को साफ रखने में योगदान दें।

एडीसी वीरेंद्र सहरावत ने किसान से अनुरोध किया कि वे अपनी बात को “सुझाव के तौर” पर रखें।

प्रदर्शनी में दिखे प्राकृतिक उत्पाद

कार्यशाला में प्राकृतिक खेती से जुड़े विभिन्न जैविक उर्वरकों और उत्पादों की एक प्रदर्शनी भी लगाई गई थी। एक कंपनी के प्रतिनिधि मेघराज पंवार ने बताया कि प्राकृतिक उत्पादों से न सिर्फ भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है, बल्कि फसल में आने वाले तनाव और वृद्धि की समस्याओं का भी समाधान किया जा सकता है।

यह घटना प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ी चुनौती को उजागर करती है। किसान का तर्क है कि जब तक रासायनिक खाद पर दी जाने वाली भारी सब्सिडी (जो परोक्ष रूप से उसके इस्तेमाल को सस्ता बनाती है) का लाभ प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को प्रत्यक्ष रूप से नहीं मिलेगा, तब तक बड़े पैमाने पर बदलाव मुश्किल है। कार्यशाला में किसानों को सम्मानित किया गया और उनके लिए ड्रा भी निकाले गए, लेकिन किसान रविंद्र द्वारा उठाया गया यह आर्थिक पक्ष सरकार के लिए एक गंभीर विचारणीय मुद्दा है।

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Follow Now

और पढ़ें

हरियाणा

हरियाणा का ये जिला बनेगा फार्मा हब, सस्ती दवाओं के उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा, केंद्रीय बजट में बड़ा ऐलान

HBSE New Rule

HBSE New Rule: हरियाणा में 10वीं–12वीं के छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी, मिलेगा अंक सुधार का दूसरा मौका

School Holiday: फरवरी में हरियाणा के सरकारी स्कूलों में रहेंगी इतनी छुट्टियां, टाइमिंग और परीक्षाओं का पूरा अपडेट

हरियाणा ब्यूरोक्रेसी में बड़ा फेरबदल, 4 IAS अधिकारियों का ट्रांसफर

हरियाणा ब्यूरोक्रेसी में बड़ा फेरबदल, 4 IAS अधिकारियों का ट्रांसफर; 20 HCS अफसरों को मिला सुपर टाइम स्केल

Fourlane Highway: हरियाणा में ये आधा दर्जन से ज्यादा हाईवे होंगे फोरलेन, ज़मीनों रेट छुएंगे आसमान, इस वजह से अटके

Fourlane Highway: हरियाणा में ये आधा दर्जन से ज्यादा हाईवे होंगे फोरलेन, ज़मीनों रेट छुएंगे आसमान, इस वजह से अटके

हरियाणा में खाद्य आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर सस्पेंड

हरियाणा में ग्रीवेंस कमेटी बैठक के दौरान मंत्री राजेश नागर का बड़ा एक्शन, खाद्य आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर सस्पेंड