हरियाणा के करनाल जिले में नीलोखेड़ी के अरजाहेड़ी गांव की सरकारी जमीन हड़पने के बहुचर्चित घोटाले में अदालत ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट खुशबू गोयल की अदालत ने तहसीलदार समेत 13 दोषियों को 5 से 7 साल की साधारण कैद और प्रत्येक पर 40 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह मामला फर्जी दस्तावेज बनाने, राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी और आपराधिक साजिश से जुड़ा था।
अदालत की सख्त टिप्पणी: “घोटाले विकास में बाधा, भरोसा तोड़ते हैं”
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि भूमि घोटाले न केवल विकास में बाधा डालते हैं, बल्कि आम जनता और निवेशकों का भरोसा भी तोड़ते हैं। ऐसे अपराध सामाजिक अस्थिरता को जन्म देते हैं, इसलिए इन पर कठोर दंड ही प्रभावी रोक लगा सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि सरकारी जमीन की रक्षा करना न्यायपालिका की जिम्मेदारी है और फर्जीवाड़े के जरिए जमीन हड़पना सामाजिक-आर्थिक ढांचे पर हमला है।
12 साल चला मुकदमा, दया की गुहार नहीं सुनी
करीब 12 साल तक चले इस मुकदमे में दोषियों ने उम्र, बीमारी और पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला देकर सजा में रियायत की गुहार लगाई। लेकिन अदालत ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए दया दिखाना गलत संदेश देगा।
क्या था पूरा मामला?
जांच के अनुसार, सरकारी जमीन को निजी बताकर उस पर अवैध कब्जा कराने के लिए फर्जी आवंटन पत्र और खरीद-बिक्री के दस्तावेज तैयार किए गए और राजस्व रिकॉर्ड में जानबूझकर गलत बदलाव किए गए। इसमें पंचायत स्तर से लेकर राजस्व विभाग और दस्तावेज लेखकों तक की मिलीभगत सामने आई थी, जिसे अदालत ने सुनियोजित आपराधिक साजिश करार दिया।
सजा: सभी 13 दोषियों को विभिन्न धाराओं में 5 से 7 वर्ष की साधारण कैद। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
जुर्माना: प्रत्येक दोषी पर 40,000 रुपये (कुल 5,20,000 रुपये)।
अतिरिक्त सजा: जुर्माना न भरने पर अतिरिक्त कैद।
एक आरोपी अभी भी फरार
मामले में कुल 16 आरोपी थे। इनमें से दो की मृत्यु हो चुकी है, एक (पृक्षित) फरार है और 13 को सजा सुनाई गई है। फरार आरोपी के लिए अदालत ने निर्देश दिया कि उसकी गिरफ्तारी तक केस फाइल सुरक्षित रखी जाए।
यह फैसला हरियाणा में सरकारी संपत्ति की रक्षा और भ्रष्टाचार के खिलाफ न्यायपालिका की सख्त रुख का एक स्पष्ट संकेत है। इससे भविष्य में ऐसे घोटालों में शामिल लोगों के लिए एक चेतावनी भी जाती है। अब यह देखना होगा कि दोषी उच्च न्यायालय में अपील करते हैं या नहीं।











