Bintu Pabra Biography: बिंटू पाबड़ा कौन है? जानिए हरियाणा के युवा संगीत सितारे की प्रेरणादायक यात्रा

On: December 31, 2025 4:41 PM
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Bintu Pabra Biography

Bitu Pabra Biography: बिंटू पाबड़ा हरियाणा के सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली हरियाणवी गायक, संगीतकार और गीतकार हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर एक गरीब परिवार से निकलकर हरियाणवी संगीत उद्योग में शीर्ष स्थान बना लिया है। उनका गीत “दब्या नी करदे” सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और 150 मिलियन से अधिक व्यूज के साथ एक महाकाव्य हिट बन गया। उनकी यात्रा संघर्ष, प्रतिभा और निरंतर प्रयास का एक जीवंत उदाहरण है।

जन्म और प्रारंभिक जीवन

जन्मतिथि और परिवार

बिंटू पाबड़ा का जन्म 10 अगस्त 2001 को हरियाणा के हिसार जिले के पाबड़ा गांव में एक बहुत ही गरीब परिवार में हुआ था। वे एक मजदूर परिवार से संबंधित हैं जहां परिवार का पेट भरना ही एक बहुत बड़ी चुनौती होती थी। उनके परिवार में आठ भाई-बहन हैं और बिंटू सबसे बड़े हैं। उनके पिता किसान और मजदूर का काम करते थे, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कठिन थी कि सभी बच्चों को ठीक से पढ़ाई और पोषण देना संभव नहीं था।

परिवार की आर्थिक परिस्थितियों के कारण बचपन से ही बिंटू को अपने परिवार के लिए कुछ करने की जिम्मेदारी का एहसास था। गरीबी की मार झेलते हुए भी उन्होंने अपने सपनों को जीवित रखा और संगीत के माध्यम से अपनी पहचान बनाने का निर्णय लिया।

शिक्षा और संगीत का शौक

बिंटू पाबड़ा ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई अपने गांव के सरकारी स्कूल में की थी। उन्होंने 12वीं पास की और उसके बाद पढ़ाई छोड़ दी क्योंकि उन्हें पढ़ाई में विशेष रुचि नहीं थी। हालांकि, शिक्षा में उनकी रुचि न होने के बावजूद, संगीत और गीत लेखन उनके जुनून का केंद्र थे। बचपन से ही उन्हें गाने और लिखने का शौक था।

दसवीं-बारहवीं में ही बिंटू को संगीत लाइन में करियर बनाने का सपना देखने लगा। हालांकि, एक गरीब परिवार से आने के कारण उनके पास औपचारिक संगीत प्रशिक्षण के लिए पैसे नहीं थे। फिर भी, उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए अपने आस-पास के संगीत प्रेमियों से सीखा और स्वयं को तैयार किया।

संगीत करियर की शुरुआत

केपी कुंडू के साथ सहयोग

बिंटू पाबड़ा के संगीत करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उन्हें केपी कुंडू से मिलने का अवसर मिला। केपी कुंडू हरियाणा के एक प्रसिद्ध गीतकार और संगीतकार हैं। दोनों की मुलाकात बिंटू के गांव के पास से हुई और उनके विचार एक दूसरे से तुरंत मेल खा गए। केपी कुंडू पहले से ही एक स्थापित गीतकार थे, लेकिन बिंटू की प्रतिभा को देखकर वे प्रभावित हुए।

इसके बाद, दोनों ने साथ काम करना शुरू किया। यह सहयोग बिंटू के लिए एक वरदान साबित हुआ। शुरुआत में, बिंटू केपी कुंडू के लिए गीत लिखा करते थे और साथ ही गीत गाया करते थे। उन्होंने विभिन्न हरियाणवी कलाकारों के लिए भी गीत लिखे, जैसे राजू पंजाबी, मासूम शर्मा, और बीजणा। हालांकि, उन्हें तुरंत सफलता नहीं मिली और उनके कई गीत ज्यादा लोकप्रिय नहीं हुए।

पहले गीत और शुरुआती संघर्ष

बिंटू और केपी कुंडू का पहला गीत जो उन्होंने एक साथ रिलीज़ किया वह था “गंडासे और तीर”। यह गीत ज्यादा चलन नहीं हुआ, लेकिन इसने उन दोनों को एक टीम के रूप में काम करने का विश्वास दिलाया। फिर उन्होंने और भी गीत लिखे, जैसे “दोगली”, “मालटा”, “दादा साहब”, और “हरियाणवी” जैसे गीत अलग-अलग कलाकारों के लिए बनाए।

इन शुरुआती गीतों के बावजूद, बिंटू को विशेष पहचान नहीं मिल रही थी। लेकिन वह हार न मानते हुए अपनी प्रतिभा को निखारते रहे। उन्होंने समझ लिया कि केवल अच्छा गीत लिखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही कहानी, सही संदेश और सही प्रस्तुति जरूरी है।

महान सफलता: “दब्या नी करदे”

सुपरहिट गीत का जन्म

बिंटू पाबड़ा की असली सफलता तब आई जब उन्होंने केपी कुंडू के साथ “दब्या नी करदे” नामक गीत बनाया। यह गीत 22 मार्च 2021 को रिलीज़ किया गया था। “दब्या नी करदे” एक सामाजिक गीत है जो युवाओं को समाज में हो रहे विभिन्न नकारात्मक प्रभावों के बारे में जागरूक करता है।

गीत में “नडी कुंडू” (जिन्हें एनडी कुंडू भी कहा जाता है) को भी गायक के रूप में शामिल किया गया था। यह गीत एक वास्तविक कहानी पर आधारित था जो आम जनता से जुड़ी थी। गीत के लिरिक्स में आर्थिक समस्याओं, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, और सामाजिक विषमताओं का वर्णन किया गया था।

वायरल होना और रातोंरात सफलता

“दब्या नी करदे” रातोंरात वायरल हो गया। जब गीत रिलीज़ किया गया, तो किसी को यह उम्मीद नहीं थी कि यह इतना बड़ा हिट बन जाएगा। लेकिन हरियाणा में इस गीत को इतना भारी समर्थन मिला कि यह समूची हरियाणवी संगीत उद्योग में एक संवेदनशील गीत के रूप में प्रसिद्ध हो गया।

आज तक, “दब्या नी करदे” के आधिकारिक 150 मिलियन (15 करोड़) व्यूज यूट्यूब पर हैं। यदि YouTube, Instagram, और अन्य सभी प्लेटफॉर्म्स को मिला दिया जाए, तो इस गीत के बिलियन व्यूज हो सकते हैं। बिंटू स्वयं मानते हैं कि यह गीत उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ था।

यह गीत संगीत, गीत लेखन, सिनेमैटोग्राफी, निर्देशन – सभी कुछ में उत्कृष्ट था। फिल्म के निर्देशक एमपी सेगा ने बेहतरीन काम किया और बांबू बीट्स ने संगीत दिया। पूरी टीम की मेहनत इस गीत की सफलता में दिखाई देती है।

अन्य प्रसिद्ध गीत

“रूट्स” – दूसरी बड़ी हिट

“दब्या नी करदे” की सफलता के बाद, बिंटू पाबड़ा और केपी कुंडू ने अपने दूसरे बड़े गीत “रूट्स” को रिलीज़ किया। यह गीत 2022 में आया था और यह भी बहुत लोकप्रिय साबित हुआ।

“रूट्स” गीत का विषय गांव की जड़ों से जुड़ाव और गांव की संस्कृति को लेकर है। गीत में बिंटू ने अपनी हरियाणवी संस्कृति, गांव की परंपराओं, और गांव से शहर जाने वाले युवाओं की भावनाओं को दर्शाया है। इस गीत का वीडियो प्रसिद्ध वीडियोग्राफर “तेजी संधू” ने बनाया था, जिन्होंने विजुअली यह गीत को एक अलग ही आयाम दे दिया।

“रूट्स” गीत को भी हरियाणा में विशेष लोकप्रियता मिली और लोग इसे बहुत पसंद करते हैं। यह गीत आज भी सोशल मीडिया पर ट्रेंडिंग रहता है और लोग इसे अपनी स्थिति के साथ जोड़कर देखते हैं।

अन्य महत्वपूर्ण गीत

बिंटू पाबड़ा ने अपने करियर में कई अन्य लोकप्रिय गीत भी बनाए हैं:

Desi Haan Ji – यह गीत 2021 में रिलीज़ हुआ था और हरियाणवी संगीत में एक नया ट्रेंड शुरू किया।

“शहर की गली” (Shehar Ki Gali) – यह गीत शहर जाने वाले गांव के युवाओं की कहानी बताता है।

“300” – यह गीत 2022 में केपी कुंडू के साथ रिलीज़ किया गया था और एक सामाजिक संदेश वाला गीत है।

“सलाम” – यह भी बिंटू का एक प्रसिद्ध गीत है जो हरियाणवी संस्कृति को दर्शाता है।

“यारी” – प्रेम और दोस्ती पर आधारित यह गीत भी काफी लोकप्रिय हुआ।

“गांव आले” – यह गीत जेरी के साथ कोलेबोरेशन में बना था।

“चीजें जो हम करते हैं” (Things We Do) – यह 2024 में रिलीज़ हुआ था और युवाओं की भावनाओं को दर्शाता है।

“गंवार कोनी रे” (Gawar Konya Re) – यह 2025 में रिलीज़ हुआ सबसे नया गीत है।

“नियर बाई मी” (Near By Me) – यह 2024 में रिलीज़ किया गया गीत है।

गीत लेखन की विशेषता

सामाजिक संदेश और वास्तविकता

बिंटू पाबड़ा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे केवल मनोरंजन के लिए गीत नहीं बनाते, बल्कि अपने गीतों में सामाजिक संदेश देते हैं। उनके गीत आर्थिक विषमता, बेरोजगारी, गांव-शहर का अंतराल, युवाओं की समस्याओं, और सांस्कृतिक परिवर्तन जैसे गंभीर विषयों को छूते हैं।

बिंटू स्वयं एक साक्षात्कार में कहते हैं कि वह जो गीत लिखते हैं, वह वास्तविकता पर आधारित होते हैं। उन्होंने कहा कि गीतकार को उन्हीं विषयों पर लिखना चाहिए जो लोगों के जीवन में वास्तविक समस्याएं हैं। उनके गीतों में आप देख सकते हैं कि कैसे एक युवा हरियाणवी अपनी दुविधाओं, अपनी भावनाओं, और अपने सपनों को व्यक्त कर रहा है।

Bitu Pabra Biography फ़ोटो- बिंटू पाबड़ा फेसबुक
फ़ोटो- बिंटू पाबड़ा फेसबुक

केपी कुंडू के साथ रचनात्मक भागीदारी

बिंटू पाबड़ा और केपी कुंडू की जोड़ी हरियाणवी संगीत उद्योग में एक महत्वपूर्ण नाम बन गई है। दोनों ने मिलकर एक अद्वितीय शैलीविकसित की है जो न केवल मनोरंजन करती है, बल्कि समाज को जागरूक भी करती है। केपी कुंडू के गीतकारिता कौशल और बिंटू की गायकी की प्रतिभा का यह संयोजन बेमिसाल है।

लाइव परफॉर्मेंस और स्टेज उपस्थिति

बिंटू पाबड़ा ने केवल स्टूडियो में ही नहीं, बल्कि लाइव स्टेज पर भी अपनी प्रतिभा दिखाई है। विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, पंचायत त्योहारों, और हरियाणवी सांस्कृतिक समारोहों में उन्होंने अपनी प्रस्तुति दी है। लाइव परफॉर्मेंस में भी बिंटू अपने दर्शकों से गहरा संबंध बनाते हैं।

व्यक्तिगत जीवन और जीवन शैली

हरियाणा से जुड़ाव और सरल जीवन

बिंटू पाबड़ा अपने गांव और हरियाणा से बहुत गहरे से जुड़े हुए हैं। वह अपने गांव को भूलना नहीं चाहते और हमेशा अपनी जड़ों की ओर देखते हैं। उन्होंने अपने शरीर पर हरियाणा का नक्शा टैटू करवाया है, जो उनके हरियाणा प्रेम को दर्शाता है।

बिंटू एक सरल जीवन शैली के प्रचारक हैं। वह बहुत भव्य जीवन नहीं जीते, बल्कि अपने परिवार और अपनी संस्कृति के साथ ही रहते हैं। उन्होंने कहा है कि सफलता के बाद भी वह गांव की साधारण भावनाएं और संस्कृति को नहीं भूले हैं।

संगीत को लेकर आवेग

बिंटू पाबड़ा के लिए संगीत केवल पेशा नहीं है, बल्कि उनका जुनून और प्रेम है। वह अपने संगीत के माध्यम से हरियाणा और हरियाणवी समाज की आवाज बनना चाहते हैं। उन्होंने कहा है कि वह केवल उन्हीं गीतों को गाते हैं जो उनके दिल को छूते हैं और जिनमें कोई सार्थक संदेश है।

हरियाणवी संगीत उद्योग में योगदान

बिंटू पाबड़ा ने हरियाणवी संगीत उद्योग को एक नई दिशा दी है। उनसे पहले, हरियाणवी गीतों में अक्सर केवल मस्ती, नृत्य, या प्रेम जैसे विषय होते थे। लेकिन बिंटू ने सामाजिक जागरूकता और गंभीर विषयों को हरियाणवी संगीत में लाया।

उन्हें पिछले वर्षों में विभिन्न पॉडकास्ट और साक्षात्कार में आमंत्रित किया गया है जहां उन्होंने हरियाणवी संगीत उद्योग के पर्दे के पीछे की सच्चाई शेयर की है। उन्होंने बताया है कि कैसे कुछ कलाकार नकली व्यूज खरीदते हैं, कैसे मॉडल्स गायकों से ज्यादा प्रसिद्ध हो जाती हैं, और कैसे गन कल्चर हरियाणवी संगीत में चित्रित होता है।

Bitu Pabra Biography फ़ोटो- बिंटू पाबड़ा फेसबुक
Bitu Pabra Biography फ़ोटो- बिंटू पाबड़ा फेसबुक

चुनौतियां और विवाद

100 मिलियन व्यूज वाले गीत को हटाया जाना

बिंटू पाबड़ा के करियर में एक बड़ी निराश बात यह हुई कि उन्हें एक 100 मिलियन व्यूज वाला गीत हटाना पड़ा। यह गीत जो बहुत बड़ी सफलता पा रहा था, लेकिन किसी कारण से इसे हटाया गया। बिंटू के अनुसार, यह हटाया जाना उनके लिए एक बहुत बड़ा झटका था क्योंकि वह गीत उनकी मेहनत और प्रतिभा का प्रतिनिधित्व करता था।

गीत लेखन को लेकर विवाद

बिंटू ने कई बार कहा है कि हरियाणवी संगीत उद्योग में गीतकारों को पर्याप्त सम्मान नहीं मिलता। वह कहते हैं कि एक गीत को 100 मिलियन व्यूज मिल सकते हैं, लेकिन गायक या मॉडल को तो नाम मिलता है, जबकि गीतकार की भूमिका अक्सर नजरअंदाज कर दी जाती है।

उन्होंने यह भी कहा है कि कुछ कलाकार अन्य गीतकारों के लिखे हुए गीतों को अपने नाम से प्रकाशित करते हैं, जो संगीत उद्योग में एक गंभीर समस्या है।

भविष्य की योजनाएं

बिंटू पाबड़ा अपना अपना संगीत लेबल शुरू करना चाहते हैं ताकि वह अपने संगीत पर पूर्ण नियंत्रण रख सकें और अन्य नए कलाकारों को भी एक मंच दे सकें। उन्होंने कहा है कि आने वाले समय में वह हिंदी गीत भी लिखना और गाना चाहते हैं, लेकिन वह हमेशा हरियाणवी उद्योग के प्रति वफादार रहेंगे।

वह फिल्मों में अभिनय करने की भी सोच रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्होंने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है।

बिंटू पाबड़ा की कहानी संघर्ष, प्रतिभा, और निरंतर प्रयास का एक जीवंत उदाहरण है। एक गरीब परिवार से निकलकर, केवल 23 साल की उम्र में (2025 तक), वह हरियाणवी संगीत उद्योग के सबसे महत्वपूर्ण नाम बन चुके हैं। उनके गीत “दब्या नी करदे” ने 150 मिलियन से अधिक व्यूज प्राप्त किए हैं और लाखों लोगों के दिल को छुआ है।

बिंटू केवल एक गायक नहीं हैं, बल्कि एक सामाजिक कार्यकर्ता और संदेश देने वाले हैं जो अपने संगीत के माध्यम से समाज को बेहतर बनाना चाहते हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि गरीबी और विषम परिस्थितियां किसी को सफल होने से नहीं रोक सकतीं। उनकी यात्रा हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो अपने सपने को पूरा करना चाहता है।

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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