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Arzoo NEET Success Story: इलाज के अभाव में दादाजी को खोया, पिता सड़क किनारे सब्जी बेचते रहे, लेकिन हरियाणा की बेटी आरजू ने हार नहीं मानी. जानिए कैसे तंगहाली के बीच आरजू ने नीट यूजी क्रैक किया और अब डॉक्टर बनने का सपना पूरा करेंगी.
Arzoo NEET Success Story: आरजू सब्जी के ठेले पर पिता की मदद करती थीं
नई दिल्ली (Arzoo NEET Success Story). इरादे फौलादी हों और सीने में कुछ कर गुजरने की आग जल रही हो तो गरीबी और तंगहाली भी आपके कदम नहीं रोक सकती. हरियाणा की रहने वाली बेटी आरजू ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है. बेहद साधारण और गरीब परिवार से आने वाली आरजू ने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शामिल नीट को क्रैक कर अपनी मेहनत का लोहा मनवाया है. उनके पिता सड़क किनारे ठेले पर सब्जी बेचकर परिवार का गुजारा चलाते हैं.
दादाजी को खोने के गम ने दी डॉक्टर बनने की प्रेरणा
आरजू के जीवन में डॉक्टर बनने की चिंगारी बचपन में ही सुलग गई थी. जब वे छोटी थीं, तब उनके दादाजी की तबीयत काफी खराब हो गई थी. परिवार के पास इतने पैसे नहीं थे कि वे उनका किसी अच्छे अस्पताल में इलाज करवा सकें. समय पर सही डॉक्टरी मदद न मिलने से उनके दादाजी का निधन हो गया. इस हादसे ने आरजू के कोमल मन पर गहरा असर डाला और उन्होंने उसी पल डॉक्टर बनने का पक्का संकल्प ले लिया.
अनुशासन, मॉक टेस्ट और घंटों की एकाग्रता का फॉर्मूला
आरजू ने अनुशासन और एकाग्रता पर बहुत भरोसा किया. वह रोजाना 6 से 8 घंटे पढ़ाई करती थीं और हर विषय के लिए उन्होंने समय तय कर रखा था. जो विषय कमजोर थे, उन पर विशेष ध्यान देने के साथ-साथ वे लगातार रिवीजन भी करती रहीं. उन्होंने ज्यादा से ज्यादा मॉक टेस्ट और पिछले सालों के प्रश्नपत्र सॉल्व किए. इससे उन्हें न सिर्फ सवालों को हल करने की सटीकता मिली, बल्कि सीमित समय में बेहतर प्रदर्शन करने का सटीक फॉर्मूला भी समझ में आ गया. सोशल मीडिया से दूरी बनाकर सिर्फ पढ़ाई पर फोकस करने के कारण ही उन्होंने NEET UG 2026 में ऑल इंडिया रैंक 6227 हासिल की.
सब्जी की रेहड़ी संभालते हुए की पढ़ाई
आर्थिक तंगहाली और पारिवारिक जिम्मेदारियां भी आरजू के मजबूत इरादों को डगा नहीं सकीं. नीट की तैयारी के दौरान वे अपने पिता की मदद के लिए खुद भी सब्जी की रेहड़ी पर बैठकर सब्जी बेचती थीं. इतनी कठिन परिस्थितियों के बाद भी उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया. अब उनका सपना किसी अच्छे मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेकर डॉक्टर बनने का है, जिससे वे जरूरतमंद लोगों की निस्वार्थ सेवा कर सकें. नीट की तैयारी कर रहे युवाओं को संदेश देते हुए वे कहती हैं कि सफलता के लिए सिर्फ लंबे घंटों तक पढ़ना जरूरी नहीं है, बल्कि एकाग्रता, लगातार प्रैक्टिस और खुद पर भरोसा होना ज्यादा जरूरी है.
आरजू की कहानी साबित करती है कि अगर आपके पास बड़ा सपना और उसे पूरा करने का सच्चा जुनून है तो दुनिया की कोई भी तंगहाली मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती.
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Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is kno…
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