मेरठ से पहले अंबाला में गूंजी थी आजादी की आवाज! 800 करोड़ के स्मारक में दिखेगी 1857 की अनसुनी कहानी

On: October 31, 2026 10:09 AM
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अंबाला: देश की आजादी के इतिहास में 1857 की क्रांति का विशेष महत्व है. आमतौर पर इसकी शुरुआत मेरठ से मानी जाती है, लेकिन हरियाणा के अंबाला छावनी से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज एक अलग कहानी बयां करते हैं. इतिहासकारों के अनुसार, 10 मई 1857 को मेरठ में विद्रोह शुरू होने से करीब नौ घंटे पहले ही अंबाला छावनी में अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष शुरू हो गया था. इसी इतिहास और देशभर के क्रांतिकारियों के बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए अंबाला छावनी में करीब 800 करोड़ रुपये की लागत से शहीद स्मारक तैयार किया गया है. यह उद्घाटन के लिए तैयार है और जल्द ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इसका उद्घाटन करेंगे. इसके बाद इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा.

अंबाला में 800 करोड़ से बना शहीद स्मारक, 23 गैलरियों में दिखेगी क्रांति की कहानी

इस स्मारक में कुल 23 गैलरियां बनाई गई हैं, जिनमें अंबाला और हरियाणा के अलावा मेरठ, दिल्ली, पंजाब, गुजरात, झांसी सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में हुए संघर्ष को दिखाया जाएगा. अब तक 700 से अधिक वीरों की पहचान कर उनके नाम, पिता के नाम और गांवों की जानकारी जुटाई गई है. इन वीरों के नाम स्मारक में स्वर्ण अक्षरों में अंकित किए गए हैं.

1857 की क्रांति केवल सैनिक विद्रोह नहीं, बड़ा जन आंदोलन था

लोकल 18 से बातचीत में अंबाला के पीजी कॉलेज में इतिहासकार अतुल यादव ने बताया कि 1857 की क्रांति को केवल सैनिक विद्रोह के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि यह एक बड़ा जन आंदोलन था. उस समय हरियाणा में समाज के सभी वर्गों के लोग अंग्रेजी शासन के खिलाफ खड़े थे. किसानों, सैनिकों, महिलाओं और आम लोगों ने भी इसमें योगदान दिया था. उन्होंने बताया कि कैबिनेट मंत्री अनिल विज के प्रयासों से बना यह स्मारक नई पीढ़ी को पूरे देश का इतिहास समझने का अवसर देगा.

मेरठ से नौ घंटे पहले अंबाला छावनी में शुरू हुआ था संघर्ष

अतुल यादव के अनुसार, स्मारक का प्रमुख ऐतिहासिक आधार कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. के.सी. यादव का शोध है. उनके शोध के मुताबिक, 10 मई 1857 को अंबाला छावनी की 5वीं और 60वीं नेटिव इन्फैंट्री के सैनिक मेरठ से करीब नौ घंटे पहले सुबह हथियार लेकर बैरकों से बाहर आ गए थे.

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय अभिलेखागार के एक दस्तावेज में सितंबर 1857 की घटना का भी उल्लेख मिलता है. इसके अनुसार, सैनिकों को परेड ग्राउंड में बुलाया गया था. इसी दौरान कथित तौर पर एक सैनिक ने ‘फ्लाई’ यानी भागने का नारा लगाया, जिसके बाद यूरोपीय सैनिकों ने गोलीबारी कर दी. इस घटना में 10 मिनट के भीतर 135 सैनिक मारे गए, 33 बंदी बना लिए गए और करीब 40 सैनिक भागने में सफल रहे. इतिहासकार के अनुसार, यह स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण और उपेक्षित अध्याय है.

लंदन और लाहौर से मंगवाए गए ऐतिहासिक दस्तावेज

स्मारक के लिए राष्ट्रीय अभिलेखागार और पुरातत्व संबंधी संस्थानों के अलावा लंदन की लाइब्रेरी तथा लाहौर से भी ऐतिहासिक दस्तावेज मंगवाए गए हैं. शोध के आधार पर 700 से अधिक वीरों के नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखे गए हैं. भविष्य में प्रमाणिक जानकारी मिलने पर अन्य शहीदों के नाम भी जोड़े जाएंगे.

360 डिग्री प्रोजेक्शन और लेजर शो से दिखेगा आजादी का इतिहास

मिली जानकारी के अनुसार, स्मारक में 360 डिग्री प्रोजेक्शन के जरिए आगंतुकों को 1857 के दौर का अनुभव कराने का प्रयास किया गया है. यहां साउंड और लेजर शो के माध्यम से क्रांति की घटनाएं दिखाई जाएंगी. शहीदों को डिजिटल श्रद्धांजलि देने के लिए विशेष गैलरी भी बनाई गई है, जहां हाथ रखकर श्रद्धांजलि दी जा सकेगी और उसका रिकॉर्ड भी रखा जाएगा.

63 मीटर ऊंचे कमल पर बनेगा स्काई कैफे, ओपन थिएटर भी तैयार

परिसर में कमल के फूल के आकार की 63 मीटर ऊंची संरचना बनाई गई है. इसमें दो हाई-स्पीड लिफ्ट हैं और शीर्ष पर स्काई कैफे विकसित किया जा रहा है. इसके अलावा 2,500 दर्शकों की क्षमता वाला ओपन एयर थिएटर, 300 लोगों का ऑडिटोरियम और हेलीपैड भी बनाया गया है. बिजली के लिए अलग सब-स्टेशन और जनरेटर की व्यवस्था है.

6 घंटे में देख पाएंगे पूरा स्मारक, ऑनलाइन बुक होंगे टिकट

जानकारी के अनुसार, स्मारक को देखने में करीब छह घंटे लग सकते हैं. आगंतुकों के लिए 40-40 लोगों के समूह में भ्रमण की व्यवस्था होगी. टिकट मोबाइल ऐप और वेबसाइट से बुक किए जा सकेंगे. परिसर में स्मृति-चिह्न और प्रतिकृतियां बेचने के लिए आठ दुकानें भी बनाई गई हैं. इस तरह अंबाला का यह स्मारक 1857 की क्रांति में देशभर के वीरों के योगदान और उनके बलिदान की कहानी नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा.

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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