हरियाणा में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने के लिए शुरू किया गया इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप (IMT) प्रोजेक्ट फिलहाल जमीन की उपलब्धता के संकट में फंसता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अगुवाई वाली सरकार द्वारा प्रस्तावित 10 IMT में से अब तक सिर्फ अंबाला जिले में ही जमीन मिलने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंची है, जबकि बाकी 9 जिलों में किसानों द्वारा महंगी दरों की मांग सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।
अंबाला कैंट और नारायणगढ़ क्षेत्र में किसानों और सरकार के बीच जमीन के मूल्य को लेकर कई दौर की बातचीत के बाद अब सहमति बनने के संकेत मिल रहे हैं। राज्य सरकार की ई-भूमि प्रणाली और जिला स्तर पर हुई बैठकों के बाद व्यावहारिक दर पर सहमति लगभग तय मानी जा रही है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो जल्द ही जमीन की रजिस्ट्री शुरू हो सकती है, जिससे हरियाणा की औद्योगिक नीति को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
राज्य सरकार अंबाला में दो IMT विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। इनमें अंबाला सिटी क्षेत्र में खैरा, नग्गल और नडियाली के पास करीब 2000 एकड़ जमीन पर पहली टाउनशिप बनाई जाएगी, जबकि नारायणगढ़ क्षेत्र में चेची माजरा, डेरा, हमीदपुर और टोका गांवों में लगभग 3000 एकड़ जमीन की जरूरत है। यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे औद्योगिक निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
हालांकि यमुनानगर, रेवाड़ी, फरीदाबाद-पलवल, जींद और हिसार जैसे जिलों में परियोजना अभी भी जमीन के ऊंचे दामों के कारण अटकी हुई है। कई किसानों ने कलेक्टर रेट से 6 से 8 गुना तक कीमत की मांग की है, जिससे सरकार के लिए बाजार आधारित खरीद मॉडल के तहत जमीन लेना मुश्किल हो गया है। सरकार ने साफ किया है कि वह भूमि अधिग्रहण का रास्ता नहीं अपनाएगी और केवल स्वैच्छिक खरीद के आधार पर ही जमीन ली जाएगी।
जींद जिले में प्रस्तावित 12 हजार एकड़ में बनने वाली IMT प्रदेश की सबसे बड़ी औद्योगिक टाउनशिप होगी, जो दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे और 152-D एक्सप्रेसवे के आसपास विकसित की जानी है। इसी तरह रेवाड़ी में 5000 एकड़, जबकि फरीदाबाद-पलवल में करीब 13 हजार एकड़ जमीन पर दो बड़ी औद्योगिक टाउनशिप विकसित करने की योजना है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य हरियाणा को राष्ट्रीय और वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बनाना है।
सरकार ने परियोजना को गति देने के लिए न्यूनतम भूमि सीमा 1500 एकड़ से घटाकर 1200 एकड़ करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) को भी अधिक लचीला बनाने का फैसला लिया गया है, ताकि कम जमीन पर भी अधिक औद्योगिक विकास संभव हो सके। इस मॉडल से मानेसर और खरखौदा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों की तरह निवेशकों को आकर्षित करने की रणनीति तैयार की गई है।
इस बीच IMT के लिए बनाई गई भूमि खरीद नीति 2025 को Punjab and Haryana High Court में चुनौती मिलने से सरकार को कानूनी झटका भी लगा है। जींद के अलेवा गांव के किसान द्वारा दायर याचिका में नीति को किसानों के हितों के खिलाफ बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, जिससे परियोजना के भविष्य पर कानूनी अनिश्चितता भी बढ़ गई है।
औद्योगिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंबाला में जमीन की रजिस्ट्री सफलतापूर्वक शुरू हो जाती है, तो यह पूरे IMT प्रोजेक्ट के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और हरियाणा देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों की सूची में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा।











