गुरुग्राम : करीब 15 साल पहले अपने सपनों का घर खरीदने वाले 600 से ज्यादा परिवारों के लिए आखिरकार राहत की खबर आई है. गुरुग्राम के सेक्टर-91 स्थित अंसल फर्नहिल (Ansal Fernhill) प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक करने वाले खरीदारों ने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा कोर्ट-कचहरी और इंतजार में गुजार दिया. किसी ने बच्चों से कहा था कि जल्द अपने घर में रहेंगे, तो किसी ने अपनी पूरी जमा-पूंजी इस उम्मीद में लगा दी थी कि कुछ सालों में अपना आशियाना मिल जाएगा. मगर, यह सपना अधूरा रह गया.
अब नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने 300 करोड़ रुपये की रेजोल्यूशन योजना को मंजूरी देकर इन परिवारों में नई उम्मीद जगा दी है. आदेश के बाद अगले सप्ताह से परियोजना का निर्माण दोबारा शुरू होने जा रहा है.
2011 में किया था फ्लैट बुक
आईटी प्रोफेशनल नरेंद्र यादव भी इन्हीं पीड़ित लोगों में शामिल हैं. उन्होंने बताया कि साल 2011 में एक फ्लैट बुक किया था और सोचा था कि छह-सात साल में परिवार अपने घर में होगा. मगर, इंतजार करते-करते 15 साल बीत गए. उनकी आधी नौकरी का समय इसी संघर्ष में निकल गया. जब फ्लैट बुक किया था, तब वह 30-35 साल के थे. बच्चों से किराए का घर अपग्रेड करने की बात टालते रहे क्योंकि उन्हें भरोसा था कि जल्द अपना घर मिलेगा, लेकिन इसके बजाय परिवार को मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी.
अब नजर आई उम्मीद की किरण
हालांकि, अब नरेंद्र जैसे घर खरीदारों के लिए उम्मीद की किरण नजर आ रही है. लगभग 600 खरीदारों के लिए बड़ी राहत की बात है कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने लंबे समय से अटके ‘अंसल फर्नहिल’ प्रोजेक्ट के लिए 300 करोड़ रुपये के समाधान प्लान (रिजॉल्यूशन प्लान) को मंजूरी दे दी है और अगले हफ्ते से काम फिर से शुरू होने वाला है. एनसीएलटी ने आदेश में सह-डेवलपर सम्यक प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड (SPPL) की ओर से लगातार दायर की जा रही याचिकाओं और प्रक्रिया को रोकने की कोशिशों पर सख्त टिप्पणी की. ट्रिब्यूनल ने इन कानूनी चुनौतियों को vexatious (अनावश्यक और परेशान करने वाली) करार देते हुए कहा कि इनका मकसद केवल रेजोल्यूशन प्रक्रिया को बाधित करना था. कोर्ट ने ‘क्रिश इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड’ (KIPL) की ओर से पेश की गई रेजोल्यूशन योजना को अंतिम मंजूरी दे दी और सम्यक की सभी आपत्तियों को खारिज कर दिया.
अब ऐसे मिलेगा घर
NCLT के आदेश के मुताबिक परियोजना को नए कॉर्पोरेट ढांचे में लाकर ‘क्रिश इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड’ (KIPL) पूरा करेगी. सबसे पहले लगभग 95 प्रतिशत तैयार दो टावरों के फ्लैट खरीदारों को सौंपे जाएंगे. इसके बाद अलग-अलग चरणों में बाकी टावरों और विला का निर्माण तय समयसीमा में पूरा किया जाएगा. जिन खरीदारों ने पहले रिफंड के लिए केस जीते थे, उन्हें भी अब पैसा लेने या फ्लैट रखने दोनों में से कोई एक विकल्प चुनने की आजादी होगी.
15 साल का संघर्ष, अब मिली राहत
यह फैसला उन सैकड़ों परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जिन्होंने वर्ष 2011 से 2013 के बीच अपनी जीवनभर की कमाई इस परियोजना में लगा दी थी. लेकिन कथित वित्तीय अनियमितताओं, कॉर्पोरेट विवादों और प्रमोटरों के बीच संघर्ष के कारण परियोजना वर्षों तक अधूरी पड़ी रही. फर्नहिल होमबायर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष और खरीदार महेश जैन ने इसे ऐतिहासिक जीत बताया. उन्होंने कहा कि इसी सप्ताह पुलिस उनके साथ परियोजना स्थल पर गई थी और सम्यक के सुरक्षा कर्मियों को साइट खाली करने का नोटिस दिया गया. उम्मीद है कि 3 अगस्त को साइट का कब्जा सौंप दिया जाएगा. महेश जैन के मुताबिक, हमने 2011 में फ्लैट इस भरोसे पर खरीदा था कि 2018 तक घर मिल जाएगा, लेकिन इसके लिए हमें 15 साल तक संघर्ष करना पड़ा.
712 फ्लैट, 28 विला और 9 दुकानें
करीब 14.412 एकड़ में फैले इस प्रोजेक्ट को शुरुआत में अंशल प्रॉपर्टि्ज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (APIL) ने विकसित किया था. इसमें 14 टावरों में 712 फ्लैट, 28 विला और 9 दुकानें बनाई जानी थीं. खरीदारों ने बिल्डर, अंसल और जमीन मालिक सम्यक के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते के तहत 274 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया था. परियोजना को वर्ष 2018 तक पूरा किया जाना था, लेकिन निर्माण बीच में ही रुक गया. राहत की बात यह है कि परियोजना के दो टावर लगभग 95 प्रतिशत तैयार हैं और सबसे पहले इन्हीं फ्लैटों का कब्जा खरीदारों को दिया जाएगा.
किसे कब मिलेगा फ्लैट?
कोर्ट के आदेश के मुताबिक, अब फर्नहिल प्रोजेक्ट को एक नई कॉर्पोरेट इकाई में ट्रांसफर किया जाएगा, जिसका पूरा संचालन क्रिश इंफ्रास्ट्रक्चर करेगी. साथ ही, Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) की धारा 14 के तहत लागू मोरेटोरियम भी तुरंत समाप्त कर दिया गया है, जिससे निर्माण कार्य में कोई कानूनी बाधा नहीं रहेगी.
- फेज-1
टावर A, B, C, D, N, P और दुकानों का निर्माण.
RERA से कार्यान्वयन की तारीख के 10 महीने के भीतर कब्जा दिया जाएगा.
यह समयसीमा पहले प्रस्तावित 12 महीनों से 2 महीने कम है. - फेज-2
टावर E, F, L और M.
24 महीने के भीतर फ्लैट सौंपे जाएंगे.
टावर E और F की डिलीवरी पहले तय समय से 6 महीने पहले होगी. - फेज-3
टावर G, H, J, K और सभी विला.
34 महीने के भीतर कब्जा मिलेगा.
जरूरत पड़ने पर 6 महीने की अतिरिक्त छूट दी जा सकती है.
यह समयसीमा मूल प्रस्ताव से 8 महीने कम कर दी गई है.
रिफंड लेने वालों को भी मिला विकल्प
ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन खरीदारों ने उपभोक्ता आयोग या हरियाणा रेरा से रिफंड का आदेश हासिल कर लिया था, उन्हें अब केवल नकद भुगतान लेने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा. बल्कि ऐसे खरीदारों के पास दो विकल्प होंगे. मूल राशि और ब्याज के साथ रिफंड लें या अन्य खरीदारों की तरह अपना फ्लैट लें. इसके अलावा कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि खरीदारों पर 4 करोड़ रुपये से अधिक का दिवाला प्रक्रिया खर्च नहीं डाला जा सकता.












