हरियाणा के पानीपत की विभिन्न अदालतों ने न्यायिक आदेशों की अवहेलना और ड्यूटी में गंभीर लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। अदालतों ने स्पष्ट कर दिया है कि न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने या कोर्ट के आदेशों को हल्के में लेने की कोई भी कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी कड़ी में तीन थाना प्रभारियों समेत कुल सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ अलग-अलग मामलों में केस दर्ज किए गए हैं, जबकि तीन पुलिसकर्मियों को अदालत सजा भी सुना चुकी है।
अदालतों ने इन मामलों में स्वतः संज्ञान लेते हुए पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। न्यायालयों का कहना है कि पुलिसकर्मी कानून के रक्षक होते हैं और उनसे न्यायिक आदेशों का पालन सबसे पहले अपेक्षित होता है। गवाह के रूप में अदालत में उपस्थित न होना या रिपोर्ट समय पर दाखिल न करना सीधे तौर पर न्याय में देरी का कारण बनता है।
पानीपत की अदालतों में सामने आए मामलों में सेक्टर-29 थाना प्रभारी अनिल, किला थाना के SHO श्रीनिवास और तहसील कैंप थाना के पूर्व SHO राजीव कुमार के खिलाफ न्यायालय ने कड़ी टिप्पणियां की हैं। अदालत ने जहां कुछ मामलों में एसपी पानीपत से रिपोर्ट तलब की है, वहीं कुछ मामलों में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत आरोप तय कर दिए गए हैं। इन मामलों की आगामी सुनवाई फरवरी 2026 में निर्धारित की गई है।
इसके अलावा समन और वारंट की तामील में लापरवाही बरतने पर हेड कांस्टेबल राजबीर सिंह, अदालत में गवाही के लिए उपस्थित न होने पर कांस्टेबल अजय और न्यायिक आदेशों की अनदेखी के आरोप में कांस्टेबल सिया राम के खिलाफ भी अदालत ने संज्ञान लिया है। कुछ मामलों में आरोपियों को बेल बॉन्ड और बैंक एफडीआर जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि कुछ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
न्यायिक आदेशों की अवहेलना के मामलों में पानीपत कोर्ट पहले ही तीन पुलिसकर्मियों को सजा सुना चुकी है। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की प्री-लोक अदालत में एक उप-निरीक्षक और दो महिला कांस्टेबलों को दोषी ठहराया गया। अदालत ने पाया कि समन की तामील होने के बावजूद ये पुलिसकर्मी गवाही देने के लिए उपस्थित नहीं हुए थे। तीनों ने अदालत के समक्ष अपना अपराध स्वीकार किया, जिसके बाद न्यायालय ने उन्हें दोषी करार देते हुए कड़ी चेतावनी के साथ पहली बार अपराध मानकर नरमी बरती।
अदालत ने अपने आदेशों में दो टूक कहा है कि पुलिस एक अनुशासित बल है और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है। कोर्ट के अनुसार, यदि पुलिस ही आदेशों की अवहेलना करेगी तो आम नागरिकों से कानून पालन की अपेक्षा कैसे की जा सकती है। पानीपत कोर्ट की यह कार्रवाई पुलिस विभाग के लिए एक सख्त संदेश के रूप में देखी जा रही है।












