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Faridabad ki local news : फरीदाबाद के डीग गांव में मौसम की मार ने घीया की खेती करने वाले किसान की उम्मीदों पर पानी फेर दिया. पहले भीषण गर्मी और फिर लगातार बारिश से फसल पीली पड़ने लगी. खेत तक बिजली न होने से डीजल इंजन से सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे लागत भी बढ़ गई है. लोकल 18 से डीग गांव के किसान लाल सिंह बताते हैं कि उम्मीद थी कि मंडी में अच्छे दाम मिलेंगे और लाखों रुपये का मुनाफा होगा, लेकिन मौसम ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया. फसल धीरे-धीरे खराब होने की कगार पर पहुंच गई है और अब तुड़ाई भी ठीक से नहीं हो पा रही है. लाल सिंह के मुताबिक, मैं मेहनत करने से पीछे नहीं हटता, लेकिन जब मौसम ही पीछे पड़ जाए तो कोई क्या ही कर सकता है.
फरीदाबाद. हरियाणा के फरीदाबाद में खेती करना किसानों के लिए पहले ही आसान नहीं था. ऊपर से महंगा डीजल उनकी कमर तोड़ रहा है. खेतों तक बिजली की सुविधा नहीं होने के कारण कई किसानों को आज भी डीजल इंजन से सिंचाई करनी पड़ती है. हर सात दिन में पानी देना और 100 रुपये लीटर के हिसाब से डीजल खरीदना खेती की लागत बढ़ा देता है, लेकिन इस बार किसानों की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं. पहले भीषण गर्मी और अब लगातार हो रही बारिश ने सब्जियों की फसल पर ऐसा असर डाला कि मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है. लोकल 18 से डीग गांव के किसान लाल सिंह बताते हैं कि इस साल पहली बार एक एकड़ में भूषण किस्म की लंबी घीया की खेती की थी. उम्मीद थी कि मंडी में अच्छे दाम मिलेंगे और लाखों रुपये का मुनाफा होगा, लेकिन मौसम ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. लगातार बदलते मौसम की वजह से घीया की बेल और पत्ते पीले पड़ने लगे हैं. फसल धीरे-धीरे खराब होने की कगार पर पहुंच गई है और अब तुड़ाई भी ठीक से नहीं हो पा रही है.
कोई खास राहत नहीं
लाल सिंह बताते हैं कि पहले तेज गर्मी ने फसल को नुकसान पहुंचाया. उसके बाद जुलाई की शुरुआत में हुई लगातार बारिश ने हालत और बिगाड़ दी. घीया की फसल सितंबर-अक्टूबर तक चलती है, लेकिन इस बार पौधों की हालत देखकर चिंता हो रही है. कृषि विशेषज्ञों से भी सलाह ली, लेकिन अब तक कोई खास राहत नहीं मिली है. इस समय मंडी में घीया का भाव करीब 30 रुपये प्रति किलो तक चल रहा है. अगर फसल अच्छी रहती तो अच्छा मुनाफा मिल सकता था, लेकिन अब फसल खराब होने के कारण वे बाजार तक ज्यादा घीया नहीं भेज पा रहे हैं. पिछले साल घीया की खेती नहीं की थी, जबकि इस बार अच्छे दाम की उम्मीद में इसकी बुवाई की थी.
लागत ज्यादा नहीं, लेकिन…
लाल सिंह बताते हैं कि घीया ऐसी फसल है जिसमें लागत ज्यादा नहीं आती. एक एकड़ में करीब 15 हजार रुपये का खर्च आता है और सिर्फ आधा किलो बीज की जरूरत पड़ती है. अगर मौसम साथ दे तो यही फसल किसान को अच्छा मुनाफा दिला सकती है. लेकिन इस बार मौसम ने सारी गणित बिगाड़ दी. सबसे बड़ी परेशानी सिंचाई की है. खेत तक बिजली की लाइन नहीं पहुंची है इसलिए डीजल इंजन से पानी देना पड़ता है. डीजल करीब 100 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है, जिससे सिंचाई का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है. हर सात दिन में खेत में पानी देना जरूरी होता है और इसमें काफी डीजल खर्च हो जाता है. खेत के पीछे नहर जरूर है, लेकिन सब्जियों की खेती में नहर का पानी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, क्योंकि उससे फसल को नुकसान होने का खतरा रहता है.
लाल सिंह के मुताबिक, मैं खेती में मेहनत करने से पीछे नहीं हटता, लेकिन जब मौसम बार-बार साथ छोड़ दे तो मेहनत का फल मिलना मुश्किल हो जाता है. अगर आने वाले दिनों में मौसम सामान्य रहा तो जो फसल बची है, उससे कुछ नुकसान की भरपाई हो सकती है.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…
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