हरियाणा में किसानों की होने वाली है मौज, मिलेगा सिंचाई के लिए भरपूर पानी, शुरु हो रहा बड़ा प्रोजेक्ट

On: November 7, 2025 11:53 AM
Follow Us:
हरियाणा

हरियाणा सरकार ने राज्य को जल संकट से मुक्त करने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार करीब 5,700 करोड़ रुपये की लागत से ‘वॉटर सिक्योर हरियाणा’ नामक एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम शुरू करने जा रही है। इस परियोजना के लिए लगभग 4,000 करोड़ रुपये (500 मिलियन डॉलर) की आर्थिक सहायता विश्व बैंक (World Bank) से मिलेगी। यह कार्यक्रम प्रोग्राम फॉर रिजल्ट्स (PforR) फ्रेमवर्क के तहत वित्त पोषित होगा और इसकी अवधि छह वर्ष होगी — 2026 से 2032 तक।

राज्य सरकार का कहना है कि यह कार्यक्रम एक डेटा-आधारित और प्रदर्शन उन्मुख (performance-oriented) जल प्रबंधन प्रणाली तैयार करेगा, जो हरियाणा को देश का पहला जल सुरक्षित प्रदेश (Water Secure State) बनाने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगा।


वर्ल्ड बैंक अधिकारियों के साथ अहम बैठक

गुरुवार को राज्य के वित्त आयुक्त अनुराग रस्तोगी ने वर्ल्ड बैंक के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस दौरान उन्होंने कहा कि “यह पहल हरियाणा की जल नीति में एक परिवर्तनकारी कदम साबित होगी। हमारा लक्ष्य 2032 तक हरियाणा को पूरी तरह जल-सुरक्षित प्रदेश बनाना है।”

बैठक में विश्व बैंक की टीम ने भी इस परियोजना को एक “ऐतिहासिक और बहु-क्षेत्रीय सुधारात्मक पहल” बताया। मुख्य सचिव ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में सहभागी सिंचाई प्रबंधन (Participatory Irrigation Management) को विशेष रूप से शामिल किया जाएगा, ताकि किसानों की भागीदारी से स्थायी परिणाम हासिल किए जा सकें।


18 जिलों में लागू होगा पहला चरण

‘वॉटर सिक्योर हरियाणा’ कार्यक्रम का पहला चरण 18 जिलों के 14 रणनीतिक सिंचाई क्लस्टरों में लागू किया जाएगा, जो 3.63 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को कवर करेगा। इसके बाद शेष जिलों को नाबार्ड, राज्य बजट या अन्य एजेंसियों के माध्यम से जोड़ा जाएगा।

भले ही प्रारंभिक भौतिक कार्य सीमित क्लस्टरों तक रहेगा, लेकिन योजना से होने वाले संस्थागत और नीतिगत सुधार पूरे राज्य के 22 जिलों तक पहुंचेंगे।


सीवेज ट्रीटमेंट और आधुनिक तकनीक से होगा जल पुनर्भरण

यह कार्यक्रम सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से प्राप्त जल के पुन: उपयोग पर भी केंद्रित होगा। जींद, कैथल और गुरुग्राम में स्थित एसटीपी से पुनर्नवीनीकृत जल द्वारा 11,500 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई की जाएगी।

प्रोजेक्ट के तहत 1,798 किलोमीटर नहरों का आधुनिकीकरण, रियल टाइम डेटा एक्विजिशन सिस्टम (RTDAS) और सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन (SCADA) जैसी उन्नत प्रणालियाँ लागू की जाएंगी। दक्षिण हरियाणा के विभिन्न जिलों में 80 जल संरचनाओं का पुनर्जीवन कर भूजल पुनर्भरण को भी सशक्त बनाया जाएगा।


DSR तकनीक और बायो-ड्रेनेज से मिलेगा स्थायी समाधान

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग फसल विविधीकरण और डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) जैसी तकनीकों को बढ़ावा देगा, जिससे जल उपयोग दक्षता और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होगा।

राज्य के दो लाख एकड़ जलभराव प्रभावित क्षेत्रों में वर्टिकल और सब-सर्फेस ड्रेनेज सिस्टम विकसित किए जाएंगे। वहीं, वन विभाग इन क्षेत्रों में बायो-ड्रेनेज सिस्टम लागू करेगा, जिससे पर्यावरणीय दृष्टि से भी जल सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।

विश्व बैंक प्रतिनिधिमंडल ने इस दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा कि “हरियाणा का यह प्रोजेक्ट भारत में जल संसाधन प्रबंधन का सबसे व्यापक मॉडल साबित होगा।”


वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Follow Now