Last Updated:
Ornamental Farming : धान-गेहूं की पारंपरिक खेती छोड़ फरीदाबाद के जतिन सैनी के परिवार ने 2002 में सजावटी पौधे उगाने शुरू किए. आज 8.5 एकड़ में 38 किस्म के पौधे उगाकर गाजीपुर मंडी तक सप्लाई कर रहे हैं. शादी-त्योहारों में बढ़ती मांग के चलते हर महीने लाखों रुपये की कमाई हो रही है. फतेहपुर बिल्लौच गांव के इन किसानों की यह खेती ध्यान खींच रही है. लोकल 18 से जतिन सैनी बताते हैं कि हमारे खेत में करीब 38 तरह के सजावटी पौधे हैं. इनमें डंडेला, स्पेरा, मोरिया, गोल्डन और कई दूसरी किस्में शामिल हैं. गोल्डन पौधे की कीमत करीब 200 रुपये तक पहुंच जाती है. कई बार पहले से ही ऑर्डर मिल जाते हैं. इसी कारण बिक्री में ज्यादा परेशानी नहीं होती है.
फरीदाबाद के फतेहपुर बिल्लौच गांव में रहने वाले जतिन सैनी का परिवार पिछले कई सालों से सजावटी पौधों की खेती कर रहा है. पहले परिवार धान और गेहूं की खेती करता था, लेकिन उसमें ज्यादा कमाई नहीं हो पाती थी. इसके बाद जतिन के पिताजी ने नया रास्ता चुना और Ornamental यानी सजावटी पौधों की खेती शुरू की. आज यही खेती परिवार की सबसे बड़ी पहचान बन चुकी है और इसी से अच्छी आमदनी हो रही है. परिवार के सभी लोग इस काम में हाथ बंटाते हैं.
लोकल 18 से जतिन सैनी बताते हैं कि मेरे पिताजी ने साल 2002 में सजावटी पौधों की खेती शुरू की थी. शुरुआत में लोगों को इस खेती के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन धीरे-धीरे मेहनत रंग लाई. आज करीब साढ़े आठ एकड़ जमीन में अलग-अलग तरह के पौधे लगाए गए हैं. मैं भी खेती में पिताजी का साथ देता हूं. अब यही काम पूरे परिवार की रोजी-रोटी का सहारा है और इससे पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा मुनाफा मिल रहा है.
जतिन सैनी बताते हैं कि हमारे खेत में करीब 38 तरह के सजावटी पौधे हैं. इनमें डंडेला, स्पेरा, मोरिया, गोल्डन और कई दूसरी किस्में शामिल हैं. हर पौधे का अपना अलग रेट होता है. गोल्डन पौधे की कीमत करीब 200 रुपये तक पहुंच जाती है. डंडेला की बिक्री बंडल के हिसाब से होती है. एक बंडल में 25 स्टिक होती हैं और इसका रेट करीब 15 रुपये रहता है. मांग के हिसाब से कीमत में बदलाव भी होता रहता है.
Add News18 as
Preferred Source on Google
जतिन सैनी बताते हैं कि इन सजावटी पौधों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल शादी, बड़ी पार्टियों, होटल और दूसरे कार्यक्रमों की सजावट में होता है. शादी का सीजन शुरू होते ही मांग काफी बढ़ जाती है. त्योहारों के समय भी अच्छी बिक्री होती है. इसी वजह से साल के कई महीनों में अच्छी कमाई हो जाती है. सजावट का काम करने वाले लोग बड़ी संख्या में इन पौधों की खरीदारी करने आते हैं.
जतिन सैनी बताते हैं कि खेत से तैयार होने के बाद सभी पौधों को दिल्ली की गाजीपुर मंडी में ले जाकर बेचा जाता है. वहां से व्यापारी इन्हें खरीदकर अलग-अलग शहरों और बड़े आयोजनों तक पहुंचाते हैं. अच्छी क्वालिटी होने की वजह से ग्राहकों की मांग लगातार बनी रहती है. कई बार पहले से ही ऑर्डर मिल जाते हैं. इसी कारण बिक्री में ज्यादा परेशानी नहीं होती और मेहनत का अच्छा फायदा मिल जाता है.
जतिन सैनी बताते हैं कि सजावटी पौधों की खेती से आज परिवार को महीने में लाखों रुपये तक का मुनाफा हो जाता है. पहले धान और गेहूं से इतनी आमदनी नहीं होती थी. अब एक ही जमीन से पहले के मुकाबले कहीं बेहतर कमाई हो रही है. खेती में खर्च भी सोच-समझकर किया जाता है. अच्छी देखभाल और सही समय पर बिक्री होने की वजह से मुनाफा लगातार बना रहता है और परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हुआ है.
जतिन बताते हैं कि अगर किसान समय के हिसाब से नई खेती अपनाएं तो अच्छी कमाई कर सकते हैं. पारंपरिक खेती के साथ-साथ सजावटी पौधों की खेती भी बेहतर विकल्प बन सकती है. मेहनत, सही जानकारी और बाजार की मांग को समझकर काम किया जाए तो अच्छे नतीजे मिलते हैं. आज उनके परिवार की सफलता देखकर आसपास के कई किसान भी इस खेती के बारे में जानकारी लेने के लिए खेत पर पहुंच रहे हैं.









