करनाल जिले में सामने आए करोड़ों रुपये के धान घोटाले ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के निदेशालय ने इस मामले में जिले के पांच इंस्पेक्टरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन की अवधि के दौरान इन सभी अधिकारियों को अलग-अलग जिलों के डीएफएससी कार्यालयों में अटैच कर दिया गया है।
किन इंस्पेक्टरों को हुआ निलंबित और कहां किए गए अटैच?
निदेशालय के आदेश के अनुसार, निलंबित किए गए इंस्पेक्टर और उनके नए अटैचमेंट इस प्रकार हैं:
इंस्पेक्टर समीर वशिष्ठ (करनाल) को झज्जर जिले में अटैच किया गया है।
इंस्पेक्टर लोकेश (निसिंग) को पलवल जिले में अटैच किया गया है।
इंस्पेक्टर संदीप शर्मा (जुंडला) को फरीदाबाद जिले में अटैच किया गया है।
इंस्पेक्टर यशवीर सिंह (घरौंडा) को अंबाला जिले में अटैच किया गया है।
सब-इंस्पेक्टर रामफल (तरावड़ी) को अंबाला जिले में अटैच किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
यह कार्रवाई 29 अक्टूबर को हुई एक बड़ी भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) के बाद की गई है। इस सत्यापन के दौरान विभाग को करनाल जिले की विभिन्न राइस मिलों में पांच करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का धान कम मिला था। यह धान राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत जमा किया गया था।
इस बड़ी कमी और संभावित धान घोटाले की शिकायत पर पहले ही तरावड़ी और सदर थाने में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। जांच में इन पांचों इंस्पेक्टरों की संलिप्तता का आरोप है, जिसके चलते उन्हें निलंबित करके दूसरे जिलों में भेजा गया है ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।
यह कार्रवाई हरियाणा सरकार द्वारा खाद्य विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक सख्त कदम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि इस घोटाले की और गहराई से जांच की जाएगी और यदि दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।











