पूरे देश में कांग्रेस जहां भाजपा पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन कर रही है, वहीं हरियाणा कांग्रेस इसी मुद्दे पर आपसी फोटो राजनीति में उलझकर रह गई है। सिरसा में आज होने वाले बड़े ‘वोट चोर-गद्दी छोड़’ प्रदर्शन से ठीक पहले एक नया विवाद तब खड़ा हो गया, जब सिरसा से सांसद और कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव कुमारी सैलजा के पोस्टर से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके बेटे सांसद दीपेंद्र हुड्डा की तस्वीरें गायब पाई गईं।
यह घटना तब और भी अहम हो जाती है, जबकि हिसार में हुए पिछले प्रदर्शन में स्थानीय कांग्रेस विधायकों ने सैलजा की फोटो को पोस्टर पर जगह नहीं दी थी, जिसके बाद सैलजा समर्थकों ने पार्टी उच्चाधिकारियों से शिकायत की थी।
सिरसा में हुड्डा विरोधी रणनीति?
सिरसा में आज के प्रदर्शन की तैयारियों के बीच सैलजा के पोस्टर से हुड्डा परिवार की फोटो हटाए जाने को एक सोची-समझी राजनीतिक चाल के तौर पर देखा जा रहा है। इस कदम से साफ जाहिर है कि पार्टी के भीतर हुड्डा समर्थकों और सैलजा-राव नरेंद्र सिंह की टीम के बीच की खाई और गहरी हो रही है। इसका सीधा असर आज के प्रदर्शन पर पड़ सकता है, क्योंकि सिरसा जिले के तीनों कांग्रेस विधायकों में से दो ऐलनाबाद के भरत सिंह बेनीवाल और कालांवाली की शीशपाल केहरवाला हुड्डा समर्थक माने जाते हैं। ऐसे में वे और उनके कार्यकर्ता प्रदर्शन से दूरी बना सकते हैं।

हिसार का मामला उल्टा पड़ा
यह विवाद तब और पेचीदा हो गया है, जबकि महज तीन दिन पहले हिसार में हुए प्रदर्शन में स्थानीय तीनों कांग्रेस विधायकों—आदमपुर के चंद्रप्रकाश, नारनौंद के जस्सी पेटवाड़ और उकलाना के नरेश सेलवाल—ने अपने पोस्टर में सैलजा की फोटो नहीं लगाई थी। इसकी शिकायत होने पर पार्टी की अनुशासन समिति के अध्यक्ष धर्मपाल मलिक ने विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी।

अनुशासन समिति की बैठक आज, क्या होगा फैसला?
हरियाणा कांग्रेस में चल रहे इस ‘फोटो युद्ध’ पर आज अंबाला में अनुशासन समिति की बैठक में मंथन होगा। समिति के अध्यक्ष धर्मपाल मलिक ने कहा है कि दोनों मामलों (हिसार और सिरसा) को देखा जाएगा और पार्टी में एकजुटता का संदेश जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी हाईकमान ने पोस्टरों के लिए एक प्रोटोकॉल जारी किया है, जिसमें 11 नेताओं—सोनिया गांधी, खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, वेणुगोपाल, हरिप्रसाद, राव नरेंद्र, भूपेंद्र हुड्डा, सैलजा, सुरजेवाला और दीपेंद्र हुड्डा—की फोटो लगाना अनिवार्य है।
हालांकि, एक बड़ा सवाल यह है कि अनुशासन समिति के पास सांसद सैलजा जैसे राष्ट्रीय पदाधिकारियों के खिलाफ सीधी कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है। ऐसे में, सिरसा मामले की रिपोर्ट पार्टी हाईकमान को भेजनी पड़ सकती है।
यह घटना हरियाणा कांग्रेस में चल रहे गुटीय संघर्ष और सत्ता की लड़ाई को बेनकाब करती है। एक तरफ जहां पार्टी सरकार के खिलाफ ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठा रही है, वहीं भीतर ही ‘फोटो चोरी’ का यह विवाद उसकी एकजुटता पर सवाल खड़े कर रहा है। यह टकराव पार्टी की जनता के बीच विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकता है और भाजपा को राजनीतिक फायदा दे सकता है।











