चंडीगढ़: हरियाणा स्वास्थ्य विभाग ने लिंगानुपात में सुधार न कर पाने के आरोप में मंगलवार को दो चिकित्सा अधिकारियों को निलंबित कर दिया। अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) सुधीर राजपाल ने सिरसा जिले के पीएचसी जोतांवाली की मेडिकल अफसर डॉ. अनीषाऔर सोनीपत के हलालपुर के एसएमओ को उनकी लापरवाही के कारण तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश जारी किए।
6 जिलों के DC-SP से की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने लिंगानुपात में विशेष रूप से खराब प्रदर्शन कर रहे 6 जिलों – सिरसा, सोनीपत, यमुनानगर, चरखी दादरी, मेवात और झज्जर के डीसी और एसपी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत की। उन्होंने इन अधिकारियों को सिविल सर्जनों के साथ मिलकर लिंगानुपात बढ़ाने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए।
लिंगानुपात 920 तक ले जाने का लक्ष्य
श्री राजपाल ने सभी जिला अधिकारियों को वर्ष 2025 के अंत तक लिंगानुपात 920 तक पहुंचाने का स्पष्ट लक्ष्य दिया। उन्होंने डीसी को अवैध गर्भपात के मामलों की रिवर्स-ट्रैकिंग करवाने और पूरे मामले की निगरानी करने के भी निर्देश दिए।
BAMS-BHMS क्लीनिकों पर कड़ी नजर
सिविल सर्जनों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हर जिले में BAMS, BHMS डॉक्टरों द्वारा संचालित सभी क्लीनिक, नर्सिंग होम और अस्पतालों की एक व्यापक सूची तैयार करें। इस सूची में यह स्पष्ट होना चाहिए कि इनमें से कितने केंद्रों में पंजीकृत स्त्री रोग विशेषज्ञउपलब्ध हैं और कितने कानूनी गर्भपात केंद्र (MTP केंद्र) के रूप में पंजीकृत हैं।
एक स्त्री रोग विशेषज्ञ अधिकतम दो केंद्रों पर ही कर सकेगा गर्भपात
एक महत्वपूर्ण निर्णय में, अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि एक स्त्री रोग विशेषज्ञ को अधिकतम दो केंद्रों पर ही कानूनी गर्भपात करने की अनुमति दी जाएगी। इस प्रस्ताव को कानूनी रूप से तैयार कर सरकार के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जाएगा। यह कदम अवैध और लिंग-चयनात्मक गर्भपात पर अंकुश लगाने के लिए उठाया जा रहा है।











