भारतीय मुक्केबाजी को एक नया गौरव मिला है, जहाँ बॉक्सर स्वीटी बूरा ने दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड बॉक्सिंग कप 2025 के फाइनल में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। लेकिन इस जीत से भी बड़ा उनका वह भावनात्मक पल था, जब उन्होंने यह मेडल बेजुबान जानवरों, जुल्म सहने वाली महिलाओं और अपनी मां के नाम समर्पित किया।
फेसबुक पर लिखी दिल छू लेने वाली पोस्ट
मेडल जीतने के बाद स्वीटी बूरा ने फेसबुक पर एक ऐसी पोस्ट साझा की, जिसने लाखों लोगों का दिल छू लिया। उन्होंने लिखा, “मेरा ये मेडल जानवरों और जुबान होते हुए भी जुल्मों के आगे बेजुबान हो जाने वाली महिलाओं के और मेरी मां के नाम।” इस पोस्ट को लेकर उन्हें एक तरफ जहाँ जबरदस्त सराहना मिली, वहीं कुछ लोगों ने ट्रोल भी किया।

दैनिक भास्कर से खास बातचीत: ‘महिलाओं को आवाज उठानी चाहिए’
दैनिक भास्कर ऐप से बातचीत में स्वीटी ने अपनी इस पोस्ट के पीछे का उद्देश्य साझा किया। उन्होंने कहा, “मैं इस पोस्ट के जरिए पॉजिटिविटी फैलाना चाहती हूं। महिलाओं को मजबूत बनाना चाहती हूं और उन्हें कहना चाहती हूं कि जीवन में आगे बढ़ो। आज भी हमारे समाज में महिलाओं को दबाया जाता है। सब कुछ सही होते हुए भी उन्हें बहुत कुछ सुनना पड़ता है।”
जानवरों के प्रति संवेदनशीलता: स्वीटी ने कहा कि लोग आजकल बहुत मतलबी हो गए हैं और जानवरों पर अत्याचार करते हैं। उन्होंने याद किया कि एक समय था जब जानवरों ने ही उन्हें सहारा दिया था।
महिलाओं के लिए संदेश: उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं को अत्याचार सहने के बजाय उसके खिलाफ खड़े होकर आवाज उठानी चाहिए।
मां को श्रेय: उन्होंने कहा कि यह मेडल उनकी मां की वजह से है, जिन्होंने उन्हें जन्म दिया और एक नया जीवन दिया।
विवादों से लेकर कमबैक तक का सफर
स्वीटी बूरा का यह सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने कबड्डी के नेशनल प्लेयर रहे दीपक हुड्डा से विवाह के बाद घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराई थी। इस विवाद के बाद उन्होंने बॉक्सिंग रिंग में वापसी का ऐलान किया और अब यह ब्रॉन्ज मेडल उनके दृढ़ संकल्प और शानदार कमबैक की कहानी कहता है। उन्होंने 75 किग्रा (मिडिलवेट) वर्ग में यह सफलता हासिल की है।
स्वीटी बूरा की यह जीत और उनका यह संदेश न सिर्फ खेल जगत, बल्कि समाज के लिए भी एक मिसाल बन गया है कि कैसे हर चुनौती का सामना करते हुए अपने लक्ष्य को पाया जा सकता है।











