हरियाणा में पुलिस अधिकारियों की पदोन्नति से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब राज्य में दस साल का नियमित कार्यकाल पूरा कर चुके पुलिस उप अधीक्षक (DSP) केवल तभी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) के रूप में पदांकित किए जा सकेंगे, जब संबंधित पद रिक्त होगा।
इस संबंध में सुधीर राजपाल, गृह सचिव हरियाणा, की ओर से हरियाणा पुलिस सेवा नियमावली-2002 के नियम 7 में संशोधन की अधिसूचना जारी कर दी गई है। नए संशोधन के तहत अब स्वतः पदनाम परिवर्तन की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है और इसे रिक्त पद से जोड़ दिया गया है।
पहले क्या था नियम?
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट और प्रशासनिक मामलों के जानकार हेमंत कुमार के अनुसार, 20 फरवरी 2019 को हरियाणा पुलिस सेवा नियमावली-2002 के नियम 7 में एक नोट जोड़ा गया था। उस प्रावधान के तहत दस वर्ष की नियमित सेवा पूरी करने वाले प्रत्येक DSP को उसके मौजूदा वेतनमान में ही अपर/अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के रूप में पदांकित किया जा सकता था।
हालांकि यह स्पष्ट था कि यह वास्तविक पदोन्नति (Promotion) नहीं मानी जाती थी, बल्कि केवल पदनाम (Designation) में परिवर्तन होता था। संबंधित अधिकारी का वेतनमान DSP रैंक के अनुसार ही रहता था।
अब क्या बदला?
ताजा संशोधन के बाद यह स्पष्ट कर दिया गया है कि DSP से ASP के रूप में पदांकित किए जाने के लिए संबंधित रैंक का रिक्त पद उपलब्ध होना अनिवार्य होगा। यानी अब केवल सेवा अवधि पूरी कर लेने मात्र से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक का पदनाम नहीं मिलेगा।
इस बदलाव से पुलिस सेवा संरचना में पदों की संख्या और प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पदनाम और वास्तविक रिक्तियों के बीच सामंजस्य बना रहे।
क्या होगा असर?
नए नियम के लागू होने के बाद उन DSP अधिकारियों को इंतजार करना होगा, जिन्होंने दस साल की सेवा पूरी कर ली है लेकिन ASP के पद रिक्त नहीं हैं। इससे पदनाम परिवर्तन की प्रक्रिया अधिक नियंत्रित और पद-आधारित हो जाएगी।
हरियाणा पुलिस सेवा नियमावली में यह संशोधन प्रशासनिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है और आने वाले समय में पुलिस विभाग की पद संरचना पर इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल सकता है।











