सिरसा का वो काला दिन: 34 साल बाद भी नहीं भूला 9 नवंबर 1991 का आतंकी हमला, जगदेव सिंह ने बचाई थी कई जानें

On: November 9, 2025 9:05 AM
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सिरसा , jagdev singh chowk sirsa 

सिरसा। आज का दिन यानी 9 नवंबर का सिरसा के इतिहास में एक दर्दनाक और काले अक्षरों में दर्ज है। आज ही के दिन वर्ष 1991 में सिरसा शहर के रानियां रोड स्थित जगदेव सिंह चौक पर एक भीषण आतंकी हमले ने 14 लोगों की जान ले ली थी। ये सभी लोग जगमालवाली डेरे की संगत और सेवादार थे। इस घटना को आज 34 साल बीत गए हैं, लेकिन आज भी पीड़ित परिवारों के दिलों पर उस रात के जख्म के निशान हैं। हर साल इस दिन परिवार के लोग एकजुट होकर अपनों को श्रद्धांजलि देते हैं।

एक चश्मदीद की जुबानी: वो भयावह रात

उस रात का वर्णन करते हुए चश्मदीद गवाह और स्थानीय दुकानदार भगवानदास बताते हैं कि उस दिन शनिवार था और रात करीब 8:45 बजे का समय था। वह अपनी दुकान बंद कर घर जा रहे थे। तभी जगदेव सिंह चौक पर जगमालवाली डेरे में जाने के लिए लगभग 50-60 लोगों की संगत इकट्ठा थी। अचानक सांगवान चौक की तरफ से तीन आतंकियों ने एक पुरानी जिप्सी से आकर संगत को घेर लिया। उनके हाथों में राइफलें थीं। एक आतंकी ट्रक के ऊपर चढ़ गया और दो नीचे खड़े होकर अंधाधुंध गोलीबारी करने लगे।

सेवादार जगदेव सिंह का साहस: जान बचाने की कीमत अपनी जान देकर चुकाई

भगवानदास के मुताबिक, इस कोहराम के बीच सेवादार जगदेव सिंह आगे आए और उन्होंने एक आतंकी से जाकर भिड़ गए, उसे लपेट लिया ताकि वह गोली न चला सके। इस साहसी कार्य से कई लोगों को भागने और अपनी जान बचाने का मौका मिल गया। लेकिन तभी दूसरे आतंकी ने जगदेव सिंह पर गोलियां दागनी शुरू कर दीं। करीब 8 गोलियां लगने से जगदेव सिंह का निधन हो गया। उनकी बहादुरी ने कई लोगों की जरूर बचा ली, लेकिन वह खुद नहीं बच सके। इस हमले में कुल 9 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी।

एक गाय का बलिदान और बाद का निर्माण

भगवानदास ने एक और दिलचस्प व दुखद घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि थोड़ी दूरी पर एक गाय भी लोगों को बचाने आगे आ गई और आतंकियों की गोली का शिकार हो गई। उस गाय के बलिदान से लगभग 7-8 लोगों की जान बच गई। लोगों ने इस गाय को चमत्कारी माना और बाद में उसके नाम पर वहां एक मंदिर बनवा दिया गया, जहां आज भी लोगों की गहरी आस्था है।

हमले के बाद का माहौल और चौक का नामकरण

भगवानदास के अनुसार, इस हमले के बाद पूरे इलाके में 15 से 20 दिनों तक डर का माहौल बना रहा। उस समय उग्रवाद का दौर था और दुकानें बहुत कम खुलती थीं। तत्कालीन मंत्री लक्ष्मणदास अरोड़ा ने जगदेव सिंह की वीरता को सम्मान देते हुए वहां उनकी एक प्रतिमा स्थापित करवाई और तब से इस चौक को जगदेव सिंह चौक के नाम से जाना जाने लगा।

शहीद हुए ये लोग

इस भीषण हमले में जिन 14 लोगों ने अपनी जान गंवाई, उनके नाम एक शिलापट्ट पर अंकित हैं:

क्रम संख्याशहीद का नाम
1.जगदेव सिंह कलसी उर्फ बब्बी
2.मोहनलाल सेठी
3.मनोहर लाल बजाज
4.बिशंबर लाल
5.रोहित कुमार
6.वीपी गौतम
7.जगन्नाथ
8.कश्मीर चंद
9.मुन्शीराम
10.सतीश कुमार मोंगा
11.राजिंद्र कुमार मोगा
12.हुकमचंद मेहता
13.प्रेम कुमार ठकराल

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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