दिक्कत महिला के पैर की हड्‌डी में थी, कर दिया दिल का आप्रेशन, अब अस्पताल ने मानी गलती, प्रबंधन बोला-केस गलत दर्ज किया

On: July 28, 2026 10:45 AM
Follow Us:

Last Updated:

Panipat Hospital News: हरियाणा के पानीपत में पार्क अस्पताल ने महिला की की मौत मामले में अस्पताल ने अब अपनी गलती मानी है. हालांकि, अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों पर आरोप लगाए हैं और FIR रद्द करने की मांग की है. महिला के पैर में दिक्कत थी. लेकिन दिल का ऑपरेशन कर दिया गया.

दिक्कत पैर की हड्‌डी में थी, कर दिया दिल का ऑपरेशन, अब अस्पताल ने मानी गलतीZoom

पानीपत. हरियाण के पानीपत शहर के चर्चित पार्क अस्पताल में पैर की हड्डी का इलाज कराने आई महिला गुड्‌डी देवी के दिल का ऑपरेशन (छल्ला डालना) करने और मरीज की मौत के मामले में सोमवार को अस्पताल प्रशासन ने मीडिया के सामने आकर अपना पक्ष रखा. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अस्पताल प्रबंधन ने अपनी गलतियों को तो स्वीकार किया, लेकिन साथ ही परिजनों पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को नियम विरुद्ध बताया है.

अपनी सफाई पेश करते हुए पार्क अस्पताल प्रशासन ने यह स्वीकार किया कि उनके स्टाफ से लापरवाही हुई है. अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि सहमति (कंसेंट) फॉर्म के हस्ताक्षर वाले कॉलम में अस्पताल के ही स्टाफ ने खुद से मरीज के परिजनों का नाम लिख दिया था, जो कि प्रशासनिक स्तर पर स्टाफ की एक बड़ी गलती रही है.

पहली बार मना किया था, बाद में बेटे से फोन पर ली सहमति

अस्पताल ने अपनी सफाई में दावा किया कि जब परिजनों को मरीज के दिल की बीमारी और छल्ला डालने की बात बताई गई, तो पहली बार में उन्होंने मना कर दिया था. हालांकि, इसके बाद उन्हें बीमारी की गंभीरता के बारे में कई बार समझाया गया. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उन्होंने अंत में महिला के बेटे से फोन पर बातचीत की और उसकी सहमति मिलने के बाद ही दिल में छल्ला (स्टेंट) डाला गया था.

परिजनों पर पैसों की मांग का आरोप, FIR रद्द करने की मांग

पीड़ित परिवार पर पलटवार करते हुए अस्पताल प्रबंधन ने आरोप लगाया कि महिला की मृत्यु के बाद परिजनों ने अस्पताल से पैसों की मांग की थी. जब अस्पताल ने उनकी यह मांग पूरी नहीं की, तो उन्होंने हंगामा और पुलिस केस किया. अस्पताल प्रशासन ने अपने खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर को गलत ठहराया है. इस संबंध में उन्होंने एसपी भूपेंद्र सिंह के नाम एक पत्र लिखकर मुकदमा रद्द करने की मांग की है. अस्पताल का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट और मेडिकल गाइडलाइंस के अनुसार, किसी अस्पताल या डॉक्टर पर एफआईआर दर्ज करने से पहले मेडिकल बोर्ड की ओर से जांच कराया जाना अनिवार्य है. यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तभी केस दर्ज होना चाहिए, जबकि पुलिस ने बिना किसी मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के जल्दबाजी में एफआईआर दर्ज की है.

About the Author

authorimg

Vinod Kumar Katwal

Vinod Kumar Katwal, a Season journalist with 14 years of experience across print and digital media. I have worked with some of India’s most respected news organizations, including Dainik Bhaskar, IANS, Punjab K…

और पढ़ें

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Follow Now

और पढ़ें