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Faridabad News : फरीदाबाद के मंझावली गांव के किसानों की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं. कभी तेज बारिश उनकी फसल खराब कर देती है, कभी यमुना में बाढ़ आने से खेत डूब जाते हैं. अब आवारा पशु उनकी मेहनत पर भारी पड़ रहे हैं. बारिश और बाढ़ के बाद अब ज्वार की फसल सांड और दूसरे पशु बर्बाद कर रहे हैं. रात-रातभर रखवाली के बावजूद फसल नहीं बच रही. लोकल 18 से मंझावली गांव की महिला किसान सुनीता बताती हैं कि कई बार सुबह खेत पर पहुंचते हैं तो आधी फसल बर्बाद मिलती है. इससे बड़ी परेशानी क्या हो सकती है. विजय बताती हैं कि फसल बचाने के लिए कई किसान खेतों में बिजली का करंट लगाने तक की सोचते हैं, लेकिन ऐसा करना खतरनाक हो सकता है.
फरीदाबाद. किसान हर मौसम में नई उम्मीद के साथ खेत में बीज डालते हैं. उन्हें लगता है कि अगर मौसम साथ दे देगा तो चार पैसे घर आ जाएंगे और परिवार का खर्च आराम से चल जाएगा. लेकिन फरीदाबाद के मंझावली गांव के किसानों की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं. कभी तेज बारिश उनकी फसल खराब कर देती है, कभी यमुना में बाढ़ आने से खेत डूब जाते हैं और अब जो फसल किसी तरह बचती है उसे आवारा पशु बर्बाद कर रहे हैं. हालात ऐसे हैं कि किसान दिन-रात खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं, लेकिन फिर भी उनकी मेहनत पर पानी फिर रहा है. किसानों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बाद भी इस समस्या का कोई स्थायी हल नहीं निकला है.
दुख के अलावा कुछ नहीं बचता
लोकल 18 से मंझावली गांव की महिला किसान सुनीता बताती हैं कि गांव के किसान आवारा पशुओं से बेहद परेशान हैं. मैंने एक एकड़ में ज्वार की फसल लगा रखी है जिसमें करीब 10 हजार रुपये की लागत आती है. बीज, खाद, पानी और मजदूरी पर इतना पैसा खर्च करने के बाद जब फसल तैयार होने लगती है तो आवारा पशु खेत में घुसकर उसे चट कर जाते हैं. कई बार सुबह खेत पर पहुंचते हैं तो आधी फसल बर्बाद मिलती है. ऐसे में किसान के पास दुख के अलावा कुछ नहीं बचता. इससे बड़ी परेशानी क्या हो सकती है.
घरों तक में घुस रहे
सुनीता बताती हैं कि खेती से ही मेरे परिवार का खर्च चलता है. अगर यही फसल खराब हो जाएगी तो घर चलाना मुश्किल हो जाएगा. पहले मौसम की मार झेलनी पड़ती थी, लेकिन अब आवारा पशु भी किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गए हैं. खेतों की रखवाली के लिए रात-रात भर जागना पड़ता है. फिर भी फसल बच नहीं पाती. सरकार और प्रशासन को इस तरफ ध्यान देना चाहिए ताकि किसानों की मेहनत बेकार न जाए. किसान विजय बताती हैं कि उन्होंने दो एकड़ में ज्वार की फसल लगा रखी है. ज्वार तैयार होने में करीब चार महीने लगते हैं. इतने लंबे समय तक किसान फसल की देखभाल करता है लेकिन जब फसल अच्छी होने लगती है तो सांड और दूसरे आवारा पशु खेत में घुस जाते हैं और पूरी मेहनत बर्बाद कर देते हैं. कई बार ये पशु घरों तक में घुस आते हैं, जिससे गांव के लोग भी परेशान रहते हैं.
चाहकर भी कुछ कर नहीं पा रहे
किसान विजय बताती हैं कि फसल बचाने के लिए कई किसान खेतों में बिजली का करंट लगाने तक की सोचते हैं लेकिन ऐसा करना बेहद खतरनाक है. डर रहता है कि कहीं किसी इंसान या जानवर की जान न चली जाए, इसलिए करंट नहीं लगाते. लेकिन अगर ऐसा नहीं करें तो आवारा पशु पूरी फसल बर्बाद कर देते हैं. किसान हर तरफ से फंसा हुआ है. एक तरफ बाढ़ और बारिश से नुकसान होता है और दूसरी तरफ जो फसल बचती है, उसे आवारा पशु खा जाते हैं.
मुआवजे से ज्यादा इसकी जरूरत
विजय के मुताबिक, गांव में आवारा पशुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. लोग जब तक गाय दूध देती है, तब तक उसे अपने पास रखते हैं. जैसे ही दूध देना बंद हो जाता है. उसे सड़क या खुले में छोड़ देते हैं. यही पशु बाद में खेतों में पहुंचकर किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं. आखिर किसान कब तक हर नुकसान अकेले झेलेगा. अगर यही हाल रहा तो खेती करना और भी मुश्किल हो जाएगा. मंझावली के किसानों का कहना है कि उन्हें किसी तरह की मदद या मुआवजे से ज्यादा जरूरत इस समस्या के स्थायी समाधान की है. हर साल किसी न किसी वजह से फसल खराब हो जाती है और अब आवारा पशुओं ने बची हुई उम्मीद भी खत्म कर दी है. किसान चाहते हैं कि प्रशासन जल्द इस समस्या का हल निकाले.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें









