Last Updated:
Ambala ki local news : अंबाला में शहीद मनजीत सिंह के नाम से चलने वाला सरकारी प्राइमरी स्कूल आज वीरान है. गांव के छोटे बच्चे रोजाना दो से तीन किलोमीटर दूर दूसरे गांव में पढ़ने जाने को मजबूर हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल शिक्षा का नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और भविष्य का सवाल बन चुका है. लोकल 18 से गांव के सरपंच गुरनाम सिंह बताते हैं कि वर्षों पहले बच्चों की संख्या कम होने के कारण स्कूल बंद कर दिया गया था, लेकिन अब गांव में छोटे बच्चों की संख्या काफी बढ़ चुकी है. ग्रामीण विक्रम पाल कहते हैं कि कांसापुर की एक और गंभीर समस्या हाईवे पर कट और बस स्टॉप का अभाव है. अनमोल के मुताबिक, वह स्वयं बचपन में रोजाना कई किलोमीटर दूर पढ़ने जाते थे और अब नहीं चाहते कि उनके छोटे भाई-बहन भी वही कठिनाई झेलें.
अंबाला. गांव का स्कूल सिर्फ इमारत नहीं होता है बल्कि वह बच्चों के सपनों, माता-पिता की उम्मीदों और पूरे इलाके के भविष्य की नींव होता है. अंबाला-जगाधरी रोड के नजदीक बसे गांव कांसापुर में यही नींव वर्षों से बंद पड़ी है. कभी शहीद मनजीत सिंह के नाम से चलने वाला सरकारी प्राइमरी स्कूल आज वीरान है, जबकि गांव के छोटे बच्चे रोजाना दो से तीन किलोमीटर दूर दूसरे गांव में पढ़ने जाने को मजबूर हैं. यह स्थिति ग्रामीणों को सबसे ज्यादा इसलिए दर्द देती है, क्योंकि इसी गांव के कई बेटे भारतीय सेना में सेवा दे रहे हैं और कुछ ने देश के लिए शहादत तक दी है. सुबह जब गांव के छोटे-छोटे बच्चे स्कूल बैग लेकर निकलते हैं, तो उनके साथ माता-पिता की चिंता भी चलती है. बरसात के दिनों में कच्चे रास्ते कीचड़ से भर जाते हैं और बच्चों को उन्हीं रास्तों से होकर दूसरे गांव पहुंचना पड़ता है. कई बार फिसलकर चोट लगने की घटनाएं भी सामने आती हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल शिक्षा का नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और भविष्य का सवाल बन चुका है.
एक और जोहड़ की मांग
लोकल 18 से गांव के सरपंच गुरनाम सिंह बताते हैं कि वर्षों पहले बच्चों की संख्या कम होने के कारण स्कूल बंद कर दिया गया था, लेकिन अब गांव में छोटे बच्चों की संख्या काफी बढ़ चुकी है. अब बच्चे रोज दूसरे गांव में पढ़ने जाते हैं और माता-पिता को उन्हें छोड़ने और लाने में भारी परेशानी होती है. सरपंच गुरनाम का कहना है कि शहीद के नाम पर बने स्कूल को दोबारा शुरू करना चाहिए. शिक्षा के साथ साथ गांव में पानी निकासी भी बड़ी समस्या बनी हुई है. गांव में केवल एक ही जोहड़ होने के कारण बरसाती पानी की निकासी सही ढंग से नहीं हो पाती है. कई जगह पानी जमा हो जाता है, जिससे गलियों और आसपास के क्षेत्रों में परेशानी बढ़ जाती है. इसलिए वह मांग करते हैं कि गांव में एक और जोहड़ बनाया जाए.
कई ने गंवाई जान
ग्रामीण विक्रम पाल कहते हैं कि कांसापुर की एक और गंभीर समस्या हाईवे पर कट और बस स्टॉप का अभाव है. गांव के मुख्य द्वार के सामने जीटी रोड पर कट न होने के कारण लोगों को लंबा चक्कर लगाना पड़ता हैं. इस दौरान कई बार सड़क हादसे हो चुके हैं और कई युवाओं ने अपनी जान गंवाई है. इसके बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है. अनमोल ने कहा कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद गांव की समस्याएं भुला दी जाती हैं.
ये 4 मांगें
अनमोल के मुताबिक, वह स्वयं बचपन में रोजाना कई किलोमीटर दूर पढ़ने जाते थे और अब नहीं चाहते कि उनके छोटे भाई-बहन भी वही कठिनाई झेलें. वे कहते हैं कि शहीद मनजीत सिंह के नाम वाला स्कूल दोबारा खोला जाए, नया जोहड़ बनाया जाए, बस स्टॉप स्थापित हो और जीटी रोड पर कट दिया जाए. गांव के बाहर बस तक नहीं रुकती है, जो लड़कियां पढ़ाई के लिए अंबाला की तरफ जाती हैं, वे दूसरे गांव के बस स्टॉप पर जाकर बस पड़ती हैं.
About the Author

प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें












