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Viral Fever Remedies : अंबाला में वायरल बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ता जा रही है. इन मरीजों में बुखार के साथ गले में खराश, खांसी, नाक बहना और कई बार छाती में जकड़न जैसी शिकायतें देखने को मिल रही हैं. कई लोग शुरुआत में इसे सामान्य बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. नागरिक अस्पताल अंबाला छावनी के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. जितेंद्र वर्मा लोकल 18 से बताते हैं कि वायरल इंफेक्शन में सबसे बड़ा खतरा इसके फैलने का होता है. वायरल बुखार से पीड़ित व्यक्ति को भी दूसरों के संपर्क में आने से बचना चाहिए.
अंबाला. बरसात का मौसम अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है और मौसम में बदलाव का असर लोगों की सेहत पर भी दिखाई देने लगा है. अंबाला में इन दिनों वायरल बुखार के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती नजर आ रही है. अंबाला छावनी स्थित नागरिक अस्पताल की आयुर्वेदिक ओपीडी में भी रोजाना वायरल बुखार से पीड़ित बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं. मरीजों में बुखार के साथ गले में खराश, खांसी, नाक बहना और कई बार छाती में जकड़न जैसी शिकायतें देखने को मिल रही हैं क्योंकि मौसम बदलने के साथ वायरल इंफेक्शन का खतरा बढ़ने से अस्पताल में मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है. कई लोग शुरुआत में इसे सामान्य बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन जब बुखार के साथ खांसी, गले की परेशानी और कमजोरी बढ़ती है तो वह अस्पताल पहुंच रहे हैं. डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में थोड़ी सी लापरवाही संक्रमण को परिवार के दूसरे सदस्यों तक पहुंचा सकती है.
बार-बार करें ये काम
नागरिक अस्पताल अंबाला छावनी में कार्यरत आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. जितेंद्र वर्मा लोकल 18 से बताते हैं कि इन दिनों आयुर्वेदिक ओपीडी में वायरल बुखार के मरीज काफी संख्या में पहुंच रहे हैं. रोजाना ऐसे मरीज देखने को मिल रहे हैं, जिनमें बुखार के अलावा गला खराब होना, खांसी और नाक बहने जैसे लक्षण मौजूद हैं. कुछ मरीजों में वायरल इंफेक्शन के दौरान छाती में जकड़न की शिकायत भी देखने को मिलती है. ऐसे में लोगों को इसे सामान्य मौसमी परेशानी समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. डॉ. वर्मा के अनुसार वायरल इंफेक्शन में सबसे बड़ी चिंता इसके फैलने की होती है. अगर घर में किसी एक सदस्य को वायरल बुखार है तो दूसरे सदस्यों में भी संक्रमण फैलने का खतरा रहता है. इसलिए मरीज के आसपास साफ-सफाई रखने के साथ-साथ हाथों को बार-बार धोना जरूरी है.
सितोपलादि से त्रिफला तक
डॉ. वर्मा बताते हैं कि वायरल बुखार से पीड़ित व्यक्ति को भी दूसरों के संपर्क में आने से बचना चाहिए, ताकि संक्रमण आगे न फैले. इस मौसम में लोग अपनी दिनचर्या और खान-पान का भी विशेष ध्यान रखें. पर्याप्त मात्रा में पानी और गर्म तरल पदार्थों का सेवन करें. बहुत ठंडी चीजों से परहेज करें. साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें. आयुर्वेद में वायरल बुखार के दौरान लक्षणों के आधार पर सितोपलादि चूर्ण, गिलोय सत्व, त्रिफला चूर्ण और महासुदर्शन चूर्ण,क्वाथ जैसी औषधियों का पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि किसी भी औषधि का सेवन चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए.
डॉ. वर्मा कहते हैं कि मौसम में बदलाव के दौरान श्वसन संबंधी संक्रमण तेजी से फैल सकते हैं. ऐसे में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. अगर किसी व्यक्ति को लगातार बुखार, खांसी, सांस लेने में परेशानी या छाती में ज्यादा जकड़न जैसी समस्या हो तो उसे चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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