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Siddhdata Ashram Faridabad : फरीदाबाद की अरावली पहाड़ियों के बीच बना श्री सिद्धदाता आश्रम श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है. यहां का शांत और सुकूनभरा माहौल लोगों को काफी पसंद आता है. मान्यता है कि जून की तपती गर्मी में महाराज जी की गाड़ी अचानक इसी जगह रुक गई थी, जहां उन्हें चमकता पानी दिखाई दिया और फिर अव्यक्त वाणी सुनाई देने की बात कही जाती है. यहीं से आश्रम निर्माण की प्रेरणा मिली. 1989 में निर्माण शुरू हुआ. आश्रम में वैसे तो रोजाना श्रद्धालु आते हैं लेकिन मंगलवार और शनिवार को यहां ज्यादा भीड़ देखने को मिलती है.
फरीदाबाद में अरावली की पहाड़ियों के बीच बना श्री सिद्धदाता आश्रम आज काफी प्रसिद्ध है. इस आश्रम को लेकर यहां आने वाले लोगों में काफी आस्था देखने को मिलती है. आश्रम का निर्माण 1989 में शुरू हुआ था. बताया जाता है कि इसके लिए अरावली पर्वत की तलहटी में तव्यास पहाड़ी के पास जमीन चुनी गई थी. आज यही जगह दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र बन चुकी है. यहां का शांत और सुंदर माहौल लोगों को काफी पसंद आता है.
आश्रम की जमीन मिलने के पीछे एक दिलचस्प कहानी भी बताई जाती है. कहा जाता है कि जून की तेज गर्मी के दौरान महाराज जी फरीदाबाद से दिल्ली की तरफ जा रहे थे. रास्ते में अचानक उनकी गाड़ी रुक गई. इसी दौरान उन्हें चमकता हुआ पानी का स्रोत दिखाई दिया. जब गाड़ी रोककर उस जगह को देखा गया तो वहां कुछ दिखाई नहीं दिया. इसके बाद एक अव्यक्त वाणी सुनाई देने की बात कही जाती है. इसी को संकेत मानकर यहां आश्रम बनाने की प्रेरणा मिली.
आश्रम बनाने का फैसला होने के बाद शुरुआत में कई तरह की परेशानियां भी सामने आईं. इसके बावजूद काम को रोकने के बजाय इसे आगे बढ़ाया गया. धीरे-धीरे रास्ते की मुश्किलें दूर होती गईं और आश्रम निर्माण का काम शुरू हो गया. इस काम में महाराज जी के साथ भक्तों ने भी पूरा सहयोग किया. भक्तों ने कार सेवा के जरिए निर्माण में अपना योगदान दिया. लोगों की मेहनत और सहयोग से यहां धीरे-धीरे एक बड़ा धार्मिक परिसर तैयार होने लगा. आज यहां आने वाले लोग उस मेहनत को साफ देख सकते हैं.
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इसके बाद श्रीलक्ष्मीनारायण दिव्यधाम के निर्माण का काम भी शुरू किया गया. बताया जाता है कि इसका निर्माण वर्ष 1996 में विजयादशमी के पावन दिन शुरू हुआ था. इसके निर्माण में महाराज जी ने लगातार मेहनत की और भक्तों ने भी बढ़ चढ़कर सहयोग किया. दिन रात की मेहनत के बाद करीब चार साल में यह सुंदर धार्मिक स्थल तैयार हो गया. आज दिव्यधाम आश्रम परिसर की खास पहचान बन चुका है. यहां आने वाले श्रद्धालु मंदिर और पूरे परिसर के दर्शन करते हैं.
श्री सिद्धदाता आश्रम में सिर्फ फरीदाबाद ही नहीं बल्कि आसपास के इलाकों और दूर-दराज से भी लोग पहुंचते हैं. यहां आने वाले श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करते हैं और पूजा पाठ करते हैं. लोगों में इस जगह को लेकर काफी आस्था है. कई लोग परिवार के साथ यहां आते हैं और कुछ समय परिसर में बिताते हैं. आश्रम का शांत माहौल और पहाड़ियों के बीच की खूबसूरती लोगों को अपनी तरफ खींचती है. यही वजह है कि यहां पूरे साल श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है.
आश्रम में वैसे तो रोजाना श्रद्धालु आते हैं लेकिन मंगलवार और शनिवार को यहां ज्यादा भीड़ देखने को मिलती है. इन दिनों बड़ी संख्या में लोग दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं. कई परिवार अपनी नई गाड़ी लेकर भी यहां आते हैं और पूजा करवाते हैं. लोगों की मान्यता है कि आश्रम में आकर भगवान का आशीर्वाद लेने से जीवन में सुख और शांति बनी रहती है. इसी आस्था के चलते खास दिनों में यहां श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है.
आश्रम में आने वाले श्रद्धालुओं की अपनी अपनी आस्था और मान्यता है. कई लोगों का मानना है कि यहां सच्चे मन से आने और पूजा करने से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. लोग अपनी परेशानी और इच्छा लेकर यहां पहुंचते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं. कुछ लोग किसी नए काम की शुरुआत से पहले भी यहां दर्शन करने आते हैं. नई गाड़ी खरीदने के बाद पूजा करवाने की परंपरा भी यहां देखने को मिलती है. इसी विश्वास के कारण लोगों का जुड़ाव लगातार बढ़ रहा है.
आज श्री सिद्धदाता आश्रम काफी बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है और देखने में भी बेहद सुंदर लगता है. अरावली की पहाड़ियों के बीच इसका माहौल लोगों को अलग तरह का सुकून देता है. मंदिर परिसर की भव्यता और आसपास की हरियाली इसकी खूबसूरती को और बढ़ाती है. यहां पहुंचकर श्रद्धालु दर्शन करने के साथ कुछ समय शांत वातावरण में भी बिताते हैं. वर्षों में यह जगह फरीदाबाद की पहचान बन चुकी है. आज दूर-दूर से लोग यहां पहुंचकर दर्शन करते हैं और अपनी आस्था के अनुसार पूजा पाठ करते हैं.












