फरीदाबाद: अगर आपकी गाड़ी सड़क पर चलती है, तो यह जानकारी आपके बहुत काम की है. आज भी कई लोग सिर्फ चालान से बचने के लिए इंश्योरेंस करवा लेते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता कि कौन सा इंश्योरेंस किस काम आता है. इसी बीच सुप्रीम कोर्ट के एक नए निर्देश के बाद वाहन बीमा फिर चर्चा में है. ऐसे में यह समझना जरूरी हो गया है कि गाड़ी का इंश्योरेंस कितने प्रकार का होता है, थर्ड पार्टी और फर्स्ट पार्टी में क्या फर्क है, कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस में क्या मिलता है और बिना इंश्योरेंस गाड़ी चलाने पर क्या नियम हैं.
गाड़ी का इंश्योरेंस कितने प्रकार का होता है?
Local18 से बातचीत में Royal Seven Eleven Services के ऑनर गौतम गर्ग बताते हैं गाड़ियों का इंश्योरेंस मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है. इसमें फर्स्ट पार्टी, थर्ड पार्टी और कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस शामिल हैं. हर इंश्योरेंस का अपना अलग काम और फायदा होता है. इसलिए गाड़ी मालिक को अपनी जरूरत के हिसाब से सही इंश्योरेंस चुनना चाहिए.
थर्ड पार्टी इंश्योरेंस में क्या मिलता है?
गौतम गर्ग बताते हैं थर्ड पार्टी इंश्योरेंस में सबसे ज्यादा फायदा सामने वाली पार्टी को मिलता है. अगर आपकी गाड़ी किसी दूसरे वाहन या व्यक्ति से टकरा जाती है, तो नुकसान का क्लेम सामने वाले को मिलता है. अगर आपकी अपनी गाड़ी चोरी हो जाए…आग लग जाए या खुद की गाड़ी को नुकसान पहुंचे… तो थर्ड पार्टी इंश्योरेंस में उसका क्लेम नहीं मिलता. यही वजह है कि इसे सिर्फ कानूनी जरूरत पूरी करने वाला इंश्योरेंस भी माना जाता है.
फर्स्ट पार्टी इंश्योरेंस में क्या मिलता है?
गौतम गर्ग बताते हैं फर्स्ट पार्टी इंश्योरेंस गाड़ी मालिक के लिए ज्यादा जरूरी होता है. अगर गाड़ी चोरी हो जाए, आग लग जाए या एक्सीडेंट में गाड़ी को नुकसान पहुंचे, तो उसका क्लेम गाड़ी मालिक को मिलता है. इसके अलावा अगर एक्सीडेंट में गाड़ी चला रहे मालिक की मौत हो जाती है, तो तय नियमों के अनुसार इंश्योरेंस का लाभ भी मिलता है. इसलिए सिर्फ थर्ड पार्टी पर निर्भर रहने के बजाय फर्स्ट पार्टी इंश्योरेंस भी करवाना बेहतर माना जाता है.
कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस में क्या मिलता है?
गौतम गर्ग बताते हैं कि कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस सबसे ज्यादा सुरक्षा देने वाला प्लान होता है. इसमें फर्स्ट पार्टी और थर्ड पार्टी दोनों का फायदा मिलता है. इसके साथ कई कंपनियां जीरो डेप्रिसिएशन, इंजन कवर, टायर कवर और दूसरी अतिरिक्त सुविधाएं भी देती हैं. ऐसे प्लान में गाड़ी के बंपर से लेकर दूसरे हिस्सों तक का खर्च भी कंपनी की शर्तों के अनुसार कवर हो सकता है. इससे गाड़ी मालिक पर अचानक आने वाला बड़ा खर्च काफी कम हो जाता है.
बिना इंश्योरेंस गाड़ी चलाने पर क्या होगा?
गौतम गर्ग बताते हैं बिना इंश्योरेंस गाड़ी चलाना कानून का उल्लंघन है. ऐसे मामले में 2000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. इसके अलावा तीन महीने तक की सजा भी हो सकती है. कुछ मामलों में अदालत जुर्माना और सजा दोनों भी दे सकती है. इसलिए सड़क पर गाड़ी उतारने से पहले वैध इंश्योरेंस होना जरूरी है.
सुप्रीम कोर्ट के नए निर्देश से क्या बदलेगा?
गौतम गर्ग बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने बिना वैध थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के चल रहे वाहनों पर सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने केंद्र सरकार, सड़क परिवहन मंत्रालय और IRDAI को मिलकर ऐसा पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसमें बिना वैध थर्ड पार्टी बीमा वाली गाड़ियों को पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं दिया जाए. इसके लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरों के इस्तेमाल का सुझाव भी दिया गया है. अदालत का मानना है कि इससे बिना बीमा चल रहे वाहनों की पहचान आसान होगी और लोग समय पर अपनी गाड़ी का इंश्योरेंस भी करवाएंगे.












