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Sonipat Old Age Home Story: हरियाणा के सोनीपत में 74 वर्षीय शिवचरण की मौत की कहानी ने हर किसी का ध्यान खींचा है. वृद्धाश्रम में मौत के बाद बेटियों ने पिता के अंतिम संस्कार में आने से इनकार किया और एक बेटी ने वीडियो कॉल पर ऑनलाइन की अंतिम क्रिया देखी. इस दौरान आश्रम संचालक ने पूरी जानकारी साझा की. एक बेटी ने कुछ पैसे भी संस्कार के लिए भेजे थे.
महाराष्ट्र के रहने वाले बड़े कपड़ा व्यापारी करीब डेढ़ साल पहले अपनी पत्नी मीना गुप्ता के साथ सोनीपत वृद्ध आश्रम में रहते थे.
सोनीपत. शिवचरण 20 दिन पहले बीमार पड़े थे तो उन्होंने बेटियों को कॉल पर जानकारी दी. इस दौरान बेटियों ने कहा कि वह आ जाएंगी. हालांकि, कोई नहीं आया. मंगलवार सुबह तड़के शिवचरण की मौत हो गई और एक बेटी ऑनलाइन ही पिता का अंतिम संस्कार देखा.
दरअसल, सोनीपत के एक वृद्धाआश्रम में महाराष्ट्र के रहने वाले 74 साल के कपड़ा व्यापारी शिवचरण की मौत हो गई. तीनों बेटियों ने पिता के अंतिम दर्शन करने की भी जहमत नहीं उठाई. अब वृद्धाआश्रम के संचालक आनंद कुमार ने पूरी कहानी साझा की है.
आनंद बताते हैं कि घटना के बाद उन्होंने फोन पर बेटियों को जानकारी दी थी. हालांकि, बेटी ने कहा कि अंकल जी हम नहीं आ सकते हैं. उन्होंने बेटी को फोन कर कहा कि शिवचरण जी ने देहदान की इच्छा जताई थी. इस पर बेटी ने कहा कि देहदान तो नहीं लेकिन पिता की आंखें डोनेट करवा देना. गौर रहे कि शिवचरण गुप्ता की बड़ी बेटी अनीता नेपाल में रहती है और वहीं पर टीचर है. अनीता से छोटी बेटी निशा यूपी आजमगढ़ में रहती है और सबसे छोटी बेटी प्रिया मुंबई में ही रहती है.
आनंद कहते हैं कि बेटी ने फोन पर पहले तो कहा था कि वह अस्थियां ले जाएंगी, लेकिन फिर बाद में कहा कि आप ही विर्सजित कर देना क्योंकि उनके पास समय नहीं है. इस दौरान अंतिम संस्कार के लिए 5100 रुपये भेजे थे. वह कहते हैं कि शिवचरण की दो बेटियां टीचर हैं और पत्नी की मौत हो चुकी है. वह डेढ़ साल पहले ही हमारे पास आए थे.
वृद्धाश्रम के संचालक आनंद कहते हैं कि शिवचरण के पास फोन था और वह अक्सर बेटियों से बात करते थे. वह महाराष्ट्र के वसाई गांव के रहने वाले थे. गौर रहे कि अंतिम संस्कार का वीडियो अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है.
सोनीपत में ओल्ड एज होम चलाने वाले आनंद बताते हैं कि घटना के बाद उन्होंने फोन पर बेटियों को जानकारी दी थी.
अंतिम संस्कार में मददगार बने एक अन्य शख्स ने बताया कि फोन पर लगातार बेटियों से संपर्क था. शिवचरण की मौत से तीन चार दिन पहले हमने सूचना दी थी और फोन पर कहा कि वह नहीं आ सकते हैं. वह कहते हैं कि आने के लिए कोई भी कहीं से पहुंच सकते हैं. यह समाज के लिए सीख वाली बात है और यह दर्दनाक घटना है. वह कहते हैं कि अगर आश्रम और संस्थाएं ना होती तो इंसान भी गायों की तरह फिरता. माता पिता का हमारे ऊपर बड़ा कर्ज है. पैसों के लिए इतनी भागदौड़ की जा रही है. वह कहते हैं कि मैं देख रहा हूं कि कोठियों में बुजुर्ग अकेले रह रहे हैं. युवा पीढ़ी को अपने माता पिता की सेवा जरूर करनी चाहिए. आज जैसा हम कर रहे हैं, वो कर्म का फल उल्टा वापस आएगा.
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Vinod Kumar Katwal is a Senior journalist with over 14 years of experience across print and digital media. He currently serves as a Senior Correspondent at News 18 Hindi, leading Himachal Pradesh, Chandigarh an…
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