SYL Canal Dispute: चंडीगढ़ में आमने-सामने होंगे हरियाणा-पंजाब के मुख्यमंत्री, सुलह की आखिरी कोशिश?

On: January 27, 2026 10:14 AM
Follow Us:
SYL Canal Dispute: चंडीगढ़ में आमने-सामने होंगे हरियाणा-पंजाब के मुख्यमंत्री, सुलह की आखिरी कोशिश?

SYL Canal Dispute: सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर विवाद के समाधान की दिशा में एक बार फिर हरियाणा और पंजाब की सरकारें आमने-सामने बैठने जा रही हैं। इस बार बैठक दिल्ली की बजाय चंडीगढ़ में होगी, जहां हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्री अपने-अपने शीर्ष अधिकारियों के साथ मंथन करेंगे। यह बैठक हरियाणा निवास में सुबह आयोजित की जाएगी, जिस पर केंद्र सरकार की भी करीबी नजर बनी हुई है।

इस अहम बैठक से पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 26 जनवरी की शाम वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाई थी। इस दौरान SYL नहर से जुड़े अब तक के कानूनी और प्रशासनिक घटनाक्रम की स्टेटस रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की गई, ताकि पंजाब के साथ होने वाली बातचीत में हरियाणा का पक्ष मजबूती से रखा जा सके।

गौरतलब है कि इससे पहले पिछले वर्ष 9 जुलाई और 5 अगस्त को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के बीच बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन दोनों ही बैठकों में कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया था। केंद्र सरकार के निर्देश पर अब एक बार फिर दोनों राज्यों को आपसी बातचीत के जरिए समाधान तलाशने के लिए कहा गया है।

हालांकि, नवंबर में दिल्ली में हुई बैठक के बाद केंद्र सरकार इस विवाद से खुद को अलग करती नजर आई थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत केंद्र की अगुआई में पंजाब और हरियाणा के बीच पांच दौर की द्विपक्षीय बैठकें करवाई गईं, लेकिन किसी भी दौर में सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने दोनों मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर साफ किया कि SYL विवाद का समाधान आपसी बातचीत से ही निकाला जाए, जरूरत पड़ने पर केंद्र सहयोग करेगा।

पंजाब सरकार पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है। मुख्यमंत्री भगवंत मान कई बार दोहरा चुके हैं कि पंजाब के पास देने के लिए एक बूंद भी अतिरिक्त पानी नहीं है और ऐसे में SYL नहर के निर्माण का कोई सवाल ही नहीं उठता। जानकारों का मानना है कि जब केंद्र सरकार ने मध्यस्थता से कदम पीछे खींच लिए हैं, तब पंजाब की ओर से किसी ठोस पहल की संभावना बेहद कम नजर आ रही है।

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में भी SYL नहर से जुड़ा मामला अंतिम चरण में पहुंच चुका है। अदालत पहले ही दोनों राज्यों को केंद्र की मध्यस्थता में साझा समाधान खोजने की सलाह दे चुकी है। शनिवार को हरियाणा सचिवालय में अवकाश के बावजूद कई विभागों के अधिकारी बैठक की तैयारियों में जुटे रहे, जिससे साफ है कि हरियाणा इस मुद्दे को लेकर गंभीर रणनीति बना रहा है।

SYL नहर की कुल लंबाई 214 किलोमीटर है, जिसमें से पंजाब का 122 किलोमीटर हिस्सा अब तक अधूरा है। जनवरी 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब को जल समझौते के अनुसार नहर निर्माण के आदेश दिए थे। हरियाणा सरकार का तर्क है कि नहर बनने से उसे उसका वैधानिक जल अधिकार मिलेगा, जबकि पंजाब लगातार पानी की कमी का हवाला देकर इसका विरोध करता रहा है।

इस विवाद में 1981 के जल समझौते को रद्द करने का मुद्दा भी जुड़ा हुआ है। वर्ष 2004 में पंजाब विधानसभा ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में इस समझौते को रद्द कर दिया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में असंवैधानिक करार दिया। तब से यह मामला अदालत, केंद्र और राज्यों के बीच बैठकों में उलझा हुआ है।

अब चंडीगढ़ में होने वाली यह बैठक एक बार फिर उम्मीदें जगा रही है, लेकिन सवाल यही है कि क्या वर्षों पुराने इस विवाद का कोई व्यावहारिक हल निकल पाएगा या SYL नहर का मुद्दा फिर अधर में ही लटक जाएगा।

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Follow Now