हरियाणा में बुजुर्गों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य सरकार ने करीब 70 हजार बुजुर्गों की होल्ड की गई बुढ़ापा पेंशन बहाल कर दी है। शुक्रवार शाम तक इन लाभार्थियों के खातों में जनवरी 2026 की 3000 रुपये की पेंशन राशि जमा कर दी गई, जबकि नवंबर और दिसंबर 2025 की रुकी हुई पेंशन शनिवार को जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी पात्र बुजुर्गों को एरियर भी दिया जाएगा।
Haryana Government ने पेंशन जारी करने के साथ यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी परिस्थिति में बुजुर्गों की पेंशन बिना पूर्ण सत्यापन के नहीं रोकी जाएगी। यदि किसी लाभार्थी की पात्रता संदिग्ध भी होती है, तो जांच पूरी होने तक पेंशन जारी रहेगी। सरकार का यह निर्णय बुजुर्गों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
दरअसल, समाज कल्याण विभाग ने आयकर विभाग और अन्य स्रोतों से प्राप्त डेटा के आधार पर नवंबर 2025 से पेंशन होल्ड करना शुरू किया था। विभाग का कहना था कि कुछ मामलों में आय और पात्रता से संबंधित जानकारी में विसंगतियां सामने आई थीं। इसी आधार पर करीब 70 हजार बुजुर्गों की नवंबर और दिसंबर की पेंशन रोक दी गई थी। पेंशन रुकने के बाद राज्यभर में विरोध शुरू हो गया और विपक्षी दलों ने इसे बड़ा मुद्दा बना लिया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने 11 फरवरी को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपात बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जब तक सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी पात्र बुजुर्ग की पेंशन नहीं रोकी जाएगी। साथ ही यह भी आदेश दिया गया कि भविष्य में किसी भी पेंशन को रोकने से पहले मुख्यमंत्री की अनुमति आवश्यक होगी।
सरकार ने यह भी निर्देश दिए हैं कि यदि किसी बुजुर्ग की पात्रता संदिग्ध हो, तो संबंधित अधिकारी पहले लाभार्थी को सूचना दें और उन्हें आवश्यक दस्तावेज जमा कराने का अवसर प्रदान करें। जरूरत पड़ने पर अधिकारी स्वयं लाभार्थी के घर जाकर सत्यापन करेंगे, लेकिन पेंशन भुगतान जारी रखा जाएगा।
हरियाणा में वर्तमान में 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वे बुजुर्ग पेंशन के पात्र हैं, जिनकी पारिवारिक वार्षिक आय 3 लाख रुपये से कम है। हालांकि अब इस आय सीमा को बढ़ाने को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है और संभावना है कि आगामी बजट सत्र में सरकार इस पर विचार कर सकती है।
सरकार द्वारा पेंशन बहाल करने के इस फैसले से राज्य के हजारों बुजुर्गों को राहत मिली है, जिनकी आजीविका का प्रमुख सहारा सामाजिक सुरक्षा पेंशन ही है। यह कदम सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और लाभार्थियों के हितों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।











