हरियाणा का पानी जाएगा राजस्थान, 32 साल बाद सिरे चढ़ा जल समझौता, हथिनीकुंड से चूरू तक बिछेगी 265 KM लंबी पाइपलाइन

On: February 18, 2026 11:54 AM
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हरियाणा का पानी जाएगा राजस्थान, 32 साल बाद सिरे चढ़ा जल समझौता, हथिनीकुंड से चूरू तक बिछेगी 265 KM लंबी पाइपलाइन

हरियाणा और राजस्थान के बीच 1994 में हुआ यमुना जल समझौता अब धरातल पर उतरने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा चुका है। हरियाणा सरकार ने हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान के हासियावास (चूरू) तक पाइपलाइन बिछाने के प्रस्ताव पर अपनी लिखित सहमति राजस्थान सरकार को भेज दी है। इससे अब परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का रास्ता साफ हो गया है।

पिछले महीने नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में भजनलाल शर्मा और नायब सिंह सैनी के बीच पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर सैद्धांतिक सहमति बनी थी। अब हरियाणा की लिखित मंजूरी से यह सहमति औपचारिक प्रक्रिया में बदल गई है।


265 किलोमीटर लंबी तीन समानांतर पाइपलाइन

योजना के तहत यमुनानगर स्थित हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान के चूरू जिले के हासियावास तक करीब 265 किलोमीटर लंबी तीन समानांतर पाइपलाइन बिछाई जाएंगी। इस परियोजना से चूरू, सीकर और झुंझुनूं जिलों को कुल 577 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी उपलब्ध कराया जाएगा।

यमुनानगर सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता आर.एस. मित्तल के अनुसार, इस संबंध में राजस्थान सरकार को औपचारिक पत्र भेजा जा चुका है।


खुली नहर पर नहीं बनी थी सहमति

इससे पहले 2017, 2019 और 2021 में राजस्थान की ओर से विभिन्न प्रस्ताव केंद्रीय जल आयोग (CWC) को भेजे गए थे। हरियाणा ने पानीपत के मावी क्षेत्र से बैराज बनाकर खुली नहर के माध्यम से या ओखला से पानी लेने का सुझाव दिया था, लेकिन राजस्थान को आशंका थी कि खुले सिस्टम में पूरा आवंटित पानी नहीं मिल पाएगा। इसी कारण सहमति नहीं बन सकी।

फरवरी 2024 में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच एक नया एमओयू हुआ, जिसके तहत पाइपलाइन विकल्प पर सहमति बनी। अब हरियाणा की लिखित मंजूरी से 32 साल पुराने समझौते को लागू करने की प्रक्रिया तेज हो गई है।


1994 के समझौते में पानी का बंटवारा

12 मई 1994 को हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के बीच यमुना जल बंटवारे का समझौता हुआ था। इसके तहत हथिनीकुंड हेड से मानसून अवधि (जुलाई–अक्टूबर) में 1917 क्यूसेक पानी राजस्थान को आवंटित किया गया था।

समझौते के अनुसार कुल पानी का बंटवारा इस प्रकार तय किया गया था:

हरियाणा – 40.6%

उत्तर प्रदेश – 35.1%

राजस्थान – 10.4%

दिल्ली – 6.3%

हिमाचल प्रदेश – 1.7%

नई पाइपलाइन परियोजना के जरिए मानसून के दौरान अतिरिक्त पानी राजस्थान के चूरू, सीकर और झुंझुनूं जिलों तक पहुंचाया जाएगा।


हरियाणा ने पेयजल योजनाओं के लिए भी मांगा हिस्सा

सूत्रों के अनुसार, हरियाणा ने पाइपलाइन मार्ग के बीच कुछ स्थानों पर अपनी पेयजल योजनाओं के लिए भी पानी की मांग रखी है। इस पर तकनीकी स्तर पर विचार किया जाएगा।

करीब तीन दशक से अटके इस प्रोजेक्ट को दोनों राज्यों के लिए ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर राजस्थान के शुष्क इलाकों के लिए यह परियोजना जीवनदायिनी साबित हो सकती है।

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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