Breaking News: हरियाणा की इस यूनिवर्सिटी में बड़ा विवाद, VC ने रजिस्ट्रार और सीनियर प्रोफेसर को किया सस्पेंड

On: February 18, 2026 11:59 AM
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हरियाणा

हरियाणा के रोहतक स्थित महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (MDU) में प्रशासनिक टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. राजबीर सिंह ने रजिस्ट्रार डॉ. कृष्णकांत और कंप्यूटर साइंस विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. नसीब सिंह गिल को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। यह कार्रवाई कार्यकारी परिषद (EC) की प्रस्तावित बैठक और भर्ती प्रक्रिया को लेकर हुए विवाद के बाद की गई है, जिससे यूनिवर्सिटी प्रशासन और उच्चतर शिक्षा विभाग के बीच सीधा टकराव देखने को मिल रहा है।

उच्चतर शिक्षा विभाग ने बैठक को बताया गैरकानूनी

दरअसल, वाइस चांसलर प्रो. राजबीर सिंह की अध्यक्षता में 18 फरवरी 2026 को कार्यकारी परिषद की बैठक आयोजित की जानी थी। बैठक से एक दिन पहले उच्चतर शिक्षा विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ने 17 फरवरी को VC और रजिस्ट्रार को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रस्तावित बैठक गैरकानूनी है और इसे अगले आदेश तक स्थगित किया जाए।

सरकारी आदेश मिलने के बाद रजिस्ट्रार डॉ. कृष्णकांत ने भी पत्र जारी कर अधिकारियों को बैठक में शामिल न होने के निर्देश दिए। इसके तुरंत बाद VC की ओर से रजिस्ट्रार और प्रोफेसर डॉ. नसीब सिंह गिल के निलंबन के आदेश जारी कर दिए गए।

भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद की आशंका

सूत्रों के अनुसार, यह पूरा विवाद यूनिवर्सिटी में खाली पदों पर भर्ती प्रक्रिया को लेकर हुआ है। बताया जा रहा है कि वाइस चांसलर प्रो. राजबीर सिंह का कार्यकाल 20 फरवरी 2026 को समाप्त होने वाला है और वे अपने कार्यकाल खत्म होने से पहले नियुक्तियों को अंतिम रूप देना चाहते थे। इसी प्रक्रिया को लेकर उच्चतर शिक्षा विभाग और यूनिवर्सिटी प्रशासन के बीच मतभेद उत्पन्न हुए।

उच्चतर शिक्षा विभाग ने अपने आदेश में कहा है कि 14 जनवरी 2026 को जारी निर्देशों के अनुसार 302वीं कार्यकारी परिषद की बैठक को स्थगित किया गया था, लेकिन इसके बावजूद बैठक आयोजित की गई और उसमें लिए गए फैसले सरकार की मंजूरी के बिना मान्य नहीं होंगे।

रजिस्ट्रार पर VC के आदेशों की अवहेलना का आरोप

रजिस्ट्रार डॉ. कृष्णकांत को जारी निलंबन आदेश में कहा गया है कि उन्होंने वाइस चांसलर के निर्देशों का पालन नहीं किया, जो यूनिवर्सिटी अधिनियम की धारा 9-C(2) का उल्लंघन है। इस धारा के अनुसार रजिस्ट्रार को वाइस चांसलर के प्रशासनिक नियंत्रण में रहकर कार्य करना होता है। VC ने अपने आदेश में कहा कि इस स्थिति के कारण यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुए हैं और अनुशासन बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई आवश्यक है।

प्रोफेसर डॉ. नसीब सिंह गिल पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई

कंप्यूटर साइंस विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. नसीब सिंह गिल को भी निलंबित करते हुए कहा गया कि उन्होंने कार्यकारी परिषद के निर्णयों और प्रशासनिक नियमों का पालन नहीं किया। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह निलंबन जांच और अंतिम निर्णय तक प्रभावी रहेगा।

कार्यकारी परिषद यूनिवर्सिटी का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय

यूनिवर्सिटी की कार्यकारी परिषद प्रशासन और प्रबंधन का सर्वोच्च निकाय होती है, जो नियुक्ति, वित्तीय निर्णय, अकादमिक मामलों और विकास से जुड़े सभी महत्वपूर्ण फैसले लेती है। इस परिषद की अध्यक्षता वाइस चांसलर करते हैं और रजिस्ट्रार इसका सचिव होता है। परिषद की बैठक साल में कम से कम चार बार आयोजित की जाती है।

अधिकारियों की चुप्पी से बढ़ी रहस्य की स्थिति

इस विवाद पर यूनिवर्सिटी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहने से बच रहे हैं। यूनिवर्सिटी के डीन एकेडमिक प्रो. सुरेश सिंह मलिक से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

यह मामला अब केवल प्रशासनिक विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह उच्च शिक्षा विभाग और यूनिवर्सिटी प्रशासन के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा बड़ा टकराव बन गया है। आने वाले दिनों में सरकार और यूनिवर्सिटी प्रशासन के बीच इस मामले पर बड़ा फैसला होने की संभावना है।

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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