हरियाणा में ‘लाल डोरा’ और स्वामित्व से जुड़े विवादों को लेकर सरकार ने बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। अब इन मामलों का निपटारा पंचायत विभाग की बजाय सीधे राजस्व विभाग के अधिकारी करेंगे। यानी अब तहसीलदार और नायब तहसीलदार को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे लंबे समय से लंबित मामलों के जल्द समाधान की उम्मीद जताई जा रही है।
विकास एवं पंचायती राज विभाग के निदेशालय की ओर से सभी उपायुक्तों को इस संबंध में आदेश जारी किए गए हैं। इस आदेश के मुताबिक अब तक जिन मामलों को जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (DDPO) और खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (BDPO) देखते थे, उन्हें अब राजस्व विभाग के अधीन लाया गया है। विभाग का मानना है कि इससे कार्यप्रणाली में स्पष्टता आएगी और विवादों के समाधान में तेजी आएगी।
इस निर्णय की जानकारी अनीश यादव के कार्यालय से जारी पत्र के माध्यम से दी गई है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि अब तक स्वामित्व अधिकार दिलाने और विवादों के समाधान के लिए जो व्यवस्था थी, उसमें स्पष्ट दिशा-निर्देशों की कमी थी, जिसके कारण मामलों के निस्तारण में अनावश्यक देरी हो रही थी।
नई व्यवस्था के तहत अब नायब तहसीलदार (द्वितीय श्रेणी) और तहसीलदार (प्रथम श्रेणी) इन मामलों की सुनवाई करेंगे और समाधान सुनिश्चित करेंगे। राजस्व विभाग के पास पहले से ही जमीन और स्वामित्व से जुड़े मामलों का अनुभव होने के कारण सरकार को उम्मीद है कि अब फैसले ज्यादा तेजी और सटीकता के साथ हो सकेंगे।
इस बदलाव को ग्रामीण क्षेत्रों के लिए खास तौर पर अहम माना जा रहा है, जहां ‘लाल डोरा’ से जुड़े विवाद लंबे समय से लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया सरल होगी, बल्कि आम लोगों को भी समय पर न्याय मिल सकेगा।













