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किसान जगमान सिंह यादव बताते हैं मैं डीग गांव का रहने वाला हूं. मेरी उम्र 64 साल हो गई है और मैं करीब 25 से 30 साल से इस धान की खेती कर रहा हूं. हमारे गांव की मिट्टी और पानी दोनों बहुत अच्छे हैं. पानी मीठा है, इसलिए यहां 1121 बासमती की फसल अच्छी होती है. गांव में 1509, 1692 और 1121 जैसी वैरायटी बोई जाती हैं, लेकिन 1121 बहुत कम किसान लगाते हैं. मैंने इस बार 15 एकड़ में 1121 की बुवाई की है.
फरीदाबाद: कहते हैं खेती सिर्फ मेहनत से नहीं, मिट्टी और पानी की पहचान से भी चमकती है. यही बात फरीदाबाद के डीग गांव में देखने को मिलती है, जहां किसान जगमान सिंह यादव पिछले 30 साल से ऐसी बासमती धान की खेती कर रहे हैं. जिसे इलाके में बहुत कम किसान बड़े स्तर पर उगाते हैं. गांव की उपजाऊ मिट्टी और मीठा पानी इस धान की सबसे बड़ी ताकत माने जाते हैं. यही वजह है कि जगमान सिंह ने इस बार भी 15 एकड़ में 1121 बासमती धान की खेती की है. इस धान की कीमत सरकारी धान से कहीं ज्यादा मिलती है, लेकिन इसके लिए मेहनत, खर्च और पानी भी ज्यादा चाहिए.
सिंचाई की अच्छी सुविधा
लोकल 18 से बातचीत में किसान जगमान सिंह यादव बताते हैं मैं डीग गांव का रहने वाला हूं. मेरी उम्र 64 साल हो गई है और मैं करीब 25 से 30 साल से इस धान की खेती कर रहा हूं. हमारे गांव की मिट्टी और पानी दोनों बहुत अच्छे हैं. पानी मीठा है, इसलिए यहां 1121 बासमती की फसल अच्छी होती है. गांव में 1509, 1692 और 1121 जैसी वैरायटी बोई जाती हैं, लेकिन 1121 बहुत कम किसान लगाते हैं. मैंने इस बार 15 एकड़ में 1121 की बुवाई की है.
जगमान सिंह बताते हैं कि परमल यानी मोटे धान की खरीद सरकार तय रेट पर करती है, लेकिन 1121 बासमती की खरीद प्राइवेट व्यापारी करते हैं. इसी वजह से इसका दाम बाजार के हिसाब से बदलता रहता है. कई बार इसका भाव 3800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच जाता है. यही कारण है कि अच्छी पैदावार होने पर इस वैरायटी में मुनाफा भी बेहतर मिलता है.
प्रति एकड़ 6 हजार लेबर खर्च
जगमान सिंह बताते हैं कि ज्यादा कमाई के साथ इसकी लागत भी कम नहीं होती. इस फसल में लेबर पर ही करीब 6000 रुपये प्रति एकड़ खर्च हो जाते हैं. इसके अलावा पानी, बिजली, खाद, जुताई और दूसरी चीजों का खर्च अलग है. कुल मिलाकर लागत 50 फीसदी से भी ज्यादा बैठती है. सबसे बड़ी बात यह है कि इस धान में लगभग रोज सिंचाई करनी पड़ती है. अगर पानी समय पर नहीं मिले तो फसल पर असर पड़ सकता है.
धान की रोपाई करने पहुंचे बिहार के मजदूर संजय बताते हैं मैं बिहार से हर साल धान की बुवाई के सीजन में फरीदाबाद आता हूं. इस बार हम 19 लोग आए हैं. 1509, 1692 और 1121 तीनों वैरायटी की रोपाई कर रहे हैं. एक एकड़ में 19 मजदूर करीब एक घंटे में धान लगा देते हैं. हम लोग 5000 रुपये में एक एकड़ की रोपाई का ठेका लेते हैं. यहां काम खत्म होने के बाद वापस बिहार चले जाएंगे. परिवार का खर्च इसी काम से चलता है.
हर साल धान लगाने आते हैं बिहारी
संजय बताते हैं कि 1121 बासमती की खेती उनके इलाके में नहीं होती. वहां दूसरी किस्मों का धान लगाया जाता है. इसलिए हर साल फरीदाबाद आकर इस फसल की रोपाई करना मेरे लिए रोजी-रोटी का बड़ा सहारा बन गया है. वहीं बिहार के सुपौल जिले से आए मजदूर रमेश कुमार बताते हैं धान की रोपाई आसान काम नहीं है. पहले पौध को जड़ सहित उखाड़ते हैं. फिर उसकी गड्डियां बांधते हैं और उसके बाद खेत में एक-एक पौधा सही दूरी पर लगाया जाता है. हर साल हम लोग फरीदाबाद आते हैं और सीजन खत्म होने के बाद वापस अपने गांव लौट जाते हैं.












