Gurugram Waterlogging News: देश की साइबर सिटी के नाम से मशहूर गुरुग्राम में तेज बारिश ने एक बार फिर शहर के सिस्टम की पोल खोल दी। शुक्रवार दोपहर बाद हुई करीब एक घंटे की तेज बारिश के बाद शहर के कई प्रमुख हिस्सों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। कहीं सड़कें पानी में डूबी नजर आईं तो कहीं वाहन पानी के बीच फंसे दिखाई दिए। गंदे पानी और डूबी सड़कों के बीच लोगों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बारिश के साथ ही गुरुग्राम की वही पुरानी समस्या लौट आई- जलभराव, जाम और बदहाल सड़कें। तेज बारिश के बाद सरहौल बॉर्डर से लेकर राजीव चौक और सुभाष चौक तक ट्रैफिक की रफ्तार बुरी तरह प्रभावित हुई। कई प्रमुख सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आए। मौसम विभाग की मानें तो शनिवार को भी गुरुग्राम में बारिश की संभावना है। ऐसे में देखने वाली बात होगी कि शनिवार की बारिश गुरुग्राम का क्या हाल करेगी।
एक घंटे की बारिश और डूब गया गुरुग्राम
शुक्रवार दोपहर अचानक मौसम बदला। आसमान में घने काले बादल छाए और तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। करीब एक घंटे में 36 मिमी बारिश दर्ज की गई। बारिश की तीव्रता कम होने के बाद भी कई इलाकों में पानी तेजी से नहीं निकल सका। निचले इलाकों और प्रमुख सड़कों पर पानी जमा होने से लोगों की परेशानी बढ़ गई। कई जगह सड़क और फुटपाथ के बीच अंतर करना तक मुश्किल हो गया। दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जबकि कार चालकों को भी पानी के बीच बेहद सावधानी से वाहन निकालना पड़ा। वीकेंड से पहले दफ्तरों से घर लौटने वाले लोगों के लिए स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती थी। बारिश के बाद बढ़े ट्रैफिक दबाव ने पहले से जलभराव वाली सड़कों पर जाम की समस्या को और गंभीर कर दिया।
राजीव चौक तक ट्रैफिक हुआ बेहाल
बारिश के तुरंत बाद गुरुग्राम की प्रमुख लाइफलाइन पर वाहनों का दबाव बढ़ गया। सरहौल बॉर्डर से राजीव चौक और आगे सुभाष चौक तक कई हिस्सों में यातायात धीमा पड़ गया। सड़क के किनारे पानी जमा होने और वाहनों की गति कम होने के कारण ट्रैफिक की लंबी कतारें लगने लगीं। दोपहिया और तिपहिया वाहन चालकों को पानी से भरे हिस्सों से गुजरने में खास परेशानी हुई। बारिश के दौरान और उसके बाद राजीव चौक, सोहना रोड, गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड, उद्योग विहार और सेक्टर-14 के आसपास की सड़कों पर भी यातायात प्रभावित रहा।
पानी में छिप गए गड्ढे, हादसों का खतरा बढ़ा
गुरुग्राम की जलभराव की समस्या के साथ खराब सड़कें लोगों के लिए दोहरी मुसीबत बन गईं। उद्योग विहार फेज-3 और ओल्ड दिल्ली-गुरुग्राम रोड समेत कई हिस्सों में पहले से मौजूद गड्ढों में बारिश का पानी भर गया। सबसे खतरनाक स्थिति यह रही कि पानी के नीचे छिपे गड्ढे वाहन चालकों को दिखाई नहीं दे रहे थे। ऐसे में अचानक वाहन का संतुलन बिगड़ने या गड्ढे में पहिया जाने का खतरा बढ़ गया। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति और जोखिम भरी रही। कई जगहों पर वाहन चालकों को सड़क की वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगाने के लिए बेहद धीमी गति से आगे बढ़ना पड़ा।
गुरुग्राम में जलभराव की समस्या है पुरानी
गुरुग्राम को देश के सबसे महत्वपूर्ण कॉरपोरेट और आईटी केंद्रों में गिना जाता है। ऊंची इमारतों, एक्सप्रेसवे और बड़े कॉरपोरेट ऑफिसों वाले इस शहर की तस्वीर बारिश के दौरान अचानक बदल जाती है। हर मानसून में जलभराव के मामले सामने आते हैं। बारिश के बाद सड़कें पानी में डूबती हैं, ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित होती है और लोगों को घंटों जाम में फंसना पड़ता है। शुक्रवार की बारिश ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर तेज बारिश के पानी की निकासी के लिए शहर का सिस्टम कितना तैयार है। सवाल सिर्फ इस बात का नहीं है कि बारिश कितनी हुई। बड़ा सवाल यह है कि एक घंटे की बारिश के बाद ही शहर के इतने बड़े हिस्से में पानी क्यों जमा हो जाता है और उसे निकालने में इतना समय क्यों लगता है?
ट्रैफिक पुलिस और MCG की टीमें सक्रिय
जलभराव और ट्रैफिक की स्थिति को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस के जवानों को प्रमुख चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया। वाहनों की आवाजाही सामान्य करने और जरूरत पड़ने पर ट्रैफिक को डायवर्ट करने की कोशिश की गई। गुरुग्राम नगर निगम (MCG) और प्रशासन की टीमें भी जलभराव वाले इलाकों में सक्रिय हुईं। पानी निकालने के लिए सक्शन पंपों का इस्तेमाल किया गया। जलभराव वाले स्थानों की निगरानी की गई ताकि पानी की निकासी जल्द से जल्द की जा सके। हालांकि राहत और निकासी की यह कवायद समस्या के बाद शुरू होती दिखाई देती है। ऐसे में स्थायी समाधान को लेकर सवाल कायम है।
सिर्फ पंप लगाने से कब तक चलेगा काम?
बारिश के बाद पंप लगाकर पानी निकालना जरूरी है, लेकिन गुरुग्राम जैसी तेजी से बढ़ती शहरी आबादी वाले शहर के लिए सवाल इससे बड़ा है। क्या हर भारी बारिश के बाद सिर्फ पानी निकालना ही समाधान है? अगर जलभराव वाले स्थान हर साल लगभग वही रहते हैं, तो वहां स्थायी ड्रेनेज समाधान की जरूरत और ज्यादा स्पष्ट हो जाती है। मानसून से पहले नालों की सफाई, ड्रेनेज क्षमता बढ़ाने और संवेदनशील इलाकों में पानी की निकासी के स्थायी इंतजाम पर सवाल उठना स्वाभाविक है। शहर के लोगों के लिए यह सिर्फ असुविधा का मामला नहीं है। जलभराव के कारण ट्रैफिक जाम, वाहन खराब होने, सड़क हादसों और आपातकालीन सेवाओं में देरी का खतरा भी बढ़ जाता है।
गुरुग्राम के सामने अब असली परीक्षा
गुरुग्राम में शुक्रवार की बारिश ने कोई नई समस्या पैदा नहीं की। उसने पुरानी समस्या को फिर से उजागर किया है। बारिश हर साल होगी और मानसून भी आएगा, लेकिन सवाल यह है कि शहर कब तक हर तेज बारिश के बाद इसी तरह ठहरता रहेगा। साइबर सिटी की पहचान सिर्फ ऊंची इमारतों, कॉरपोरेट ऑफिसों और आधुनिक सड़कों से नहीं हो सकती। किसी भी आधुनिक शहर की असली परीक्षा उसके बुनियादी ढांचे की मजबूती से होती है। शुक्रवार की बारिश ने एक बार फिर गुरुग्राम के सामने यही परीक्षा रख दी। फिलहाल लोगों को सलाह दी गई है कि जलभराव वाले रास्तों से बचें, पानी से भरे गड्ढों में वाहन ले जाने से सावधानी बरतें और बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें। मौसम खराब होने की स्थिति में स्थानीय प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस के अपडेट पर नजर रखना जरूरी है।














