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Faridabad ki local news : दयालपुर-सोतई मार्ग की जर्जर पुलिया जी का जंजाल बन चुकी है. करीब 20 गांवों को जोड़ने वाली इस सड़क पर रोजाना स्कूल बस समेत सैकड़ों वाहन गुजरते हैं. पुलिया 50 साल से ज्यादा पुरानी है. कभी मरम्मत नहीं हुई. दोनों तरफ सुरक्षा के लिए ग्रिल तक नहीं है. सड़क संकरी और टूटी होने के साथ रात में रोशनी की भी व्यवस्था न होने से यहां खतरा बढ़ जाता है. लोकल 18 से बबलू कहते हैं कि यह काफी व्यस्त रास्ता है. आने वाले समय में यहां यातायात और बढ़ेगा. समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है. समय सिंह हुड्डा बताते हैं कि यह पुलिया कभी भी गिर सकती है. बच्चों की स्कूल बसें भी लगातार यहां से गुजरती रहती हैं.
फरीदाबाद. हरियाणा स्थित फरीदाबाद के दयालपुर गांव से सोतई गांव की ओर जाने वाला रास्ता इन दिनों बदहाली की मार झेल रहा है. करीब 20 गांवों को जोड़ने वाले इस मार्ग से रोजाना ग्रामीणों के साथ स्कूल बसें और दूसरे वाहन गुजरते हैं, लेकिन सड़क की हालत ऐसी है कि सफर करना किसी जोखिम से कम नहीं है. रास्ते में बनी पुरानी पुलिया भी जर्जर हो चुकी है. ग्रामीणों का कहना है कि यह पुलिया आजादी के समय के आसपास बनी थी और इतने लंबे समय बाद भी इसकी मरम्मत नहीं हुई. दोनों तरफ सुरक्षा के लिए न तो ग्रिल है और न ही कोई मजबूत घेराबंदी. सर्दियों में कोहरा और अंधेरा बढ़ने पर खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है. ग्रामीणों को डर है कि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है. लोकल 18 से स्थानीय निवासी बबलू हुड्डा बताते हैं कि यह डाबर का काला रोड है. कागजों में यह रास्ता 22 फुट का बताया जाता है, लेकिन मौके पर इसकी चौड़ाई करीब 11 फुट ही रह गई है. दयालपुर से सोतई होते हुए यह मार्ग करीब 20 गांवों को जोड़ता है.
स्कूल बसें यहीं से निकलती
बबलू कहते हैं कि यह काफी व्यस्त रास्ता है और अब आगे कंपनियां भी बनने लगी हैं. आने वाले समय में यहां यातायात और बढ़ेगा. बच्चों की स्कूल बसें भी इसी रास्ते से निकलती हैं. सर्दियों में कोहरा छाया रहता है और पुलिया पर कोई घेराबंदी नहीं होने के कारण दुर्घटना का खतरा बना रहता है. यहां पहले भी हादसे हो चुके हैं. हमारी प्रशासन से मांग है कि मार्ग का चौड़ीकरण कराया जाए और पुलिया के दोनों ओर ग्रिल या बाउंड्री बनाई जाए, ताकि किसी तरह की अनहोनी न हो. यह पुलिया 50 साल से अधिक पुरानी है. जिस नहर पर यह बनी है, उसमें आगरा कैनाल से सिंचाई के लिए पानी आता है.
पैदल चलना भी घातक
समय सिंह हुड्डा बताते हैं कि पुलिया की घेराबंदी होना बेहद जरूरी है, ताकि कोई हादसा न हो. मैं 50 साल से इसे इसी हालत में देख रहा हूं. अब तक इसकी कोई रिपेयरिंग नहीं हुई है. यह पुलिया कभी भी गिर सकती है. बच्चों की स्कूल बसें भी लगातार यहां से गुजरती रहती हैं. आकाश बताते हैं कि यह मार्ग बेहद जरूरी है. मच्छगर गांव की तरफ किसी कारण रास्ता बंद हो जाए या जाम लग जाए तो KMP से आने-जाने वाले वाहन इसी रास्ते से होकर बल्लभगढ़ की तरफ जाते हैं. ऐसे में पुलिया का निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है, ताकि किसी दिन बड़ा हादसा न हो जाए. आगे का रास्ता भी लंबे समय से टूटा हुआ है, लेकिन अब तक इसे नहीं बनाया गया. मार्ग पर लाइट की व्यवस्था भी नहीं है. रात के अंधेरे में पैदल चलने वाला व्यक्ति भी गिर सकता है.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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