DAP लेने गए किसान, दुकानदारों ने रख दी दूसरी दवाइयां खरीदने की शर्त, फरीदाबाद में ये क्या हो रहा?

On: October 21, 2026 5:31 PM
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Ground Report Faridabad : फरीदाबाद के दयालपुर गांव में डीएपी खाद की कमी से किसान परेशान हैं. किसानों का कहना है कि खाद नहीं मिलने से सरसों की बुवाई में दिक्कत आ रही है. कुछ दुकानदार खाद के लिए 1500 से 1700 रुपये तक मांग रहे हैं. किसान दुकानदारों की ओर से खाद के साथ दूसरी दवाइयां खरीदने का दबाव बनाने का भी दावा करते हैं. लोकल 18 से किसान बबलू हुड्डा बताते हैं कि सरकार से ज्यादा तंत्र की समस्या है. सरकार किसानों की मांग पूरी करना चाहती है, लेकिन कुछ स्थानीय डीलर किसानों को परेशान कर रहे हैं. किसान ओम प्रकाश बताते हैं कि इस बार सरसों की बुवाई करना चाहता हूं, लेकिन डीएपी खाद नहीं मिल रही है.

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फरीदाबाद. हरियाणा में फरीदाबाद के किसान इन दिनों डीएपी खाद की कमी से परेशान हैं. जिन किसानों के धान की कटाई पूरी हो चुकी है, वे अब अगली फसल की तैयारी में जुट गए हैं. कोई सरसों की बुवाई करना चाहता है, तो कोई दूसरी फसल लगाने के लिए खेत तैयार कर रहा है. किसानों का कहना है कि उन्हें समय पर डीएपी खाद नहीं मिल रही है. इसकी वजह से बुवाई में देरी हो रही है. किसानों का कहना है कि जहां खाद मिल भी रही है, तो महंगे दाम पर खरीदना पड़ रहा है. लोकल 18 की टीम ने दयालपुर गांव के किसानों से बात की. किसान बबलू हुड्डा बताते हैं कि सरकार से ज्यादा तंत्र की समस्या है. सरकार किसानों की मांग पूरी करना चाहती है, लेकिन कुछ स्थानीय डीलर किसानों को परेशान कर रहे हैं. कुछ लोग खाद की कीमत में 100 से 150 रुपये तक अतिरिक्त वसूल रहे हैं. हुड्डा कहते हैं कि किसानों को खाद नहीं मिलना और महंगे दाम पर खरीदने की मजबूरी सरकार की छवि पर भी असर डालती है.

किसान ओम प्रकाश बताते हैं कि इस बार अपने खेतों में सरसों की बुवाई करना चाहता हूं, लेकिन डीएपी खाद नहीं मिल रही है. खाद लेने जाते हैं, तो दुकानदार जल्द आने की बात कहकर वापस भेज देते हैं. अभी तक मुझे खाद नहीं मिली है. हर साल किसानों को इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है. अगर मिल भी रही है तो महंगी है. कीमतों में बढ़ोतरी किसानों के लिए परेशानी खड़ी करती है. सरकार को इस समस्या पर ध्यान देना चाहिए.

हर साल यही दिक्कत

किसान कर्मवीर बताते हैं कि मैं दो एकड़ जमीन पर खेती करता हूं. इस बार सरसों की बुवाई करनी है, जिसके लिए खेत तैयार करने के साथ खाद की भी जरूरत है. गांव में डीएपी खाद नहीं मिल रही है. मजबूरी में किसानों को बाजार में महंगे दाम पर खाद खरीदनी पड़ रही है. कर्मवीर बताते हैं कि खाद के लिए 1500 से 1700 रुपये तक मांगे जा रहे हैं. खाद लेने जाते हैं, तो दुकानदार उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर लौटा देते हैं. कुछ जगहों पर खाद के साथ दूसरी दवाइयां खरीदने के लिए भी कहा जाता है. हर साल किसानों को ऐसी परेशानी झेलनी पड़ती है.

मनमानी से सब परेशान

किसान प्रवीण कहते हैं कि डीएपी खाद के लिए किसानों को भटकना पड़ रहा है. कुछ दुकानदार खाद अपने परिचित लोगों को दे देते हैं, जबकि दूसरे किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ता है. खाद लेने के लिए किसान लाइन में लगते हैं, लेकिन अक्सर मिलती नहीं. खरीदने के लिए आधार कार्ड और किसान आईडी भी मांगी जाती है. खाद की कमी के साथ महंगे दाम और दुकानदारों की मनमानी से किसान परेशान हैं. किसानों की मांग है कि उन्हें समय पर खाद उपलब्ध कराई जाए, ताकि अगली फसल की बुवाई में देरी न हो.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…

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वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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