Haryana News: हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय प्रदेशव्यापी हड़ताल आज रात 10 बजे से शुरू होने जा रही है। गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी को समानांतर लाइसेंस देने के विरोध में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने 22 से 24 अक्टूबर तक हड़ताल का ऐलान किया है। इसी कड़ी में भिवानी में भी बिजली कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया और संबंधित फैसले के विरोध में प्रतियां फूंकीं। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समानांतर लाइसेंस देने का फैसला वापस नहीं लिया, तो हड़ताल को अनिश्चितकालीन भी किया जा सकता है। वहीं, बिजली मंत्री अनिल विज की ओर से बातचीत के लिए बुलाए जाने के बावजूद संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने बैठक में शामिल होने में असमर्थता जताई है।
दरअसल, बिजली कर्मचारियों का विरोध गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को समानांतर लाइसेंस देने के फैसले को लेकर है। कर्मचारियों का कहना है कि इस फैसले से बिजली विभाग के निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य में आम जनता पर बिजली की दरें बढ़ने का बोझ पड़ सकता है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सरकार के साथ पहले भी कई दौर की बातचीत हुई थी और मांगों पर विचार करने के लिए समय दिया गया था, लेकिन उनकी आपत्तियों का समाधान नहीं किया गया।
इसी के विरोध में भिवानी में बिजली कर्मचारियों ने प्रदर्शन करते हुए सरकार और संबंधित प्राधिकरण के फैसले के खिलाफ प्रतियां फूंकीं। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 22 से 24 अक्टूबर तक हड़ताल की जाएगी। धर्मवीर भाटी ने कहा कि कर्मचारियों ने सरकार को बातचीत के लिए पर्याप्त समय दिया था, लेकिन उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि समानांतर लाइसेंस देने का फैसला कर्मचारियों और बिजली विभाग के हितों के खिलाफ है। उन्होंने जनता से भी इस मुद्दे पर कर्मचारियों का समर्थन करने की अपील की।
वहीं, हरियाणा कर्मचारी महासंघ के राज्य प्रधान सूरजभान ने कहा कि सरकार कर्मचारियों की मांगों पर सहमति तो जताती है, लेकिन उन्हें लागू नहीं करती। उन्होंने कहा कि संयुक्त संघर्ष मोर्चा में बिजली कर्मचारी, इंजीनियर और अन्य संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं। यदि सरकार समय रहते मांगें नहीं मानती, तो आंदोलन को आगे बढ़ाने का फैसला लिया जा सकता है। सूरजभान ने दीपावली के त्योहार का हवाला देते हुए सरकार से समय रहते समाधान निकालने की अपील की। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांगों का समाधान नहीं होने पर आंदोलन का असर आम जनता पर भी पड़ सकता है।
मनोज बल्लू बामला ने कहा कि बिजली विभाग को कर्मचारियों ने अपनी मेहनत और वर्षों के योगदान से खड़ा किया है। उनके अनुसार, निजी कंपनी को समानांतर लाइसेंस देने का फैसला वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने 22 अक्टूबर की रात 10 बजे तक समाधान नहीं निकाला, तो कर्मचारी हड़ताल पर चले जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि 25 अक्टूबर को केंद्रीय नेतृत्व की बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी और जरूरत पड़ने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल का फैसला लिया जा सकता है।
कर्मचारियों ने दावा किया कि हड़ताल में बिजली विभाग की विभिन्न यूनियनों और इंजीनियरिंग संगठनों के सदस्य शामिल होंगे। उनका कहना है कि समानांतर लाइसेंस और निजीकरण के मुद्दे पर सरकार को अपना फैसला वापस लेना चाहिए। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि हड़ताल के दौरान बिजली सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका को देखते हुए सरकार को जल्द समाधान निकालना चाहिए।दूसरी ओर, बिजली मंत्री अनिल विज ने कर्मचारियों के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया था, लेकिन संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने बैठक में शामिल नहीं होने की बात कही है। ऐसे में अब सभी की नजर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच संभावित बातचीत तथा हड़ताल के असर पर रहेगी।
फिलहाल बिजली कर्मचारियों ने 22 से 24 अक्टूबर तक हड़ताल का ऐलान किया है। यदि सरकार और कर्मचारियों के बीच सहमति नहीं बनती, तो आंदोलन आगे भी बढ़ सकता है। ऐसे में बिजली उपभोक्ताओं को संभावित परेशानी से बचाने के लिए सरकार के सामने समय रहते समाधान निकालने की चुनौती होगी।









