16 साल की उम्र में हादसा, फिर मेहनत से बदली किस्मत, प्रणव सूरमा ने एशियन पैरा गेम्स में रचा इतिहास

On: October 28, 2026 3:21 PM
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फरीदाबाद: महज 16 साल की उम्र में एक हादसे ने जिंदगी बदल दी. रीढ़ की हड्डी में चोट लगी तो डॉक्टरों ने कह दिया कि शायद अब कभी चल नहीं पाओगे और व्हीलचेयर पर ही रहना पड़ेगा. इसके बावजूद हिम्मत नहीं हारी. पढ़ाई पूरी की, नौकरी की और फिर खेलों की दुनिया में कदम रखा. आज उसी संघर्ष का नतीजा है कि फरीदाबाद के पैरा एथलीट प्रणव सूरमा ने एशियन पैरा गेम्स-2026 में दो गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया है. प्रणव ने क्लब थ्रो एफ-51 में 32.87 मीटर का थ्रो कर गेम्स रिकॉर्ड बनाया, जबकि डिस्कस थ्रो में 11.66 मीटर के प्रदर्शन के साथ एशियाई रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता. Local18 से बातचीत में प्रणव ने अपने संघर्ष, खेल की शुरुआत और भविष्य के लक्ष्य के बारे में बताया.

16 साल की उम्र में हादसे ने बदल दी जिंदगी

प्रणव सूरमा ने बताया कि साल 2011 में मेरा एक्सीडेंट हो गया था. इस हादसे में मेरी रीढ़ की हड्डी में चोट आई और दाहिने पैर में भी चोट लगी. इससे पहले वह सामान्य जिंदगी जी रहे थे. हादसे के बाद डॉक्टरों ने कहा था कि शायद मैं दोबारा चल नहीं पाऊंगा और मुझे व्हीलचेयर पर ही रहना पड़ेगा. उस समय मेरी उम्र महज 16 साल थी. प्रणव ने बताया यह समय मेरे लिए और पूरे परिवार के लिए काफी मुश्किल था. समझ नहीं आ रहा था कि आगे जिंदगी कैसे चलेगी. एक समय ऐसा लगा कि सब कुछ खत्म हो गया है, लेकिन मैने हार नहीं मानी. धीरे-धीरे पढ़ाई दोबारा शुरू की, नौकरी की और फिर खेलों की तरफ कदम बढ़ाया. आज देश के लिए बड़े मंच पर पदक जीतना मेरे लिए गर्व की बात है.

2018 में शुरू की पैरा एथलेटिक्स, 2023 में जीता पहला एशियन गोल्ड

प्रणव ने बताया कि मैंने साल 2018 में पैरा एथलेटिक्स की शुरुआत की थी. शुरुआत में स्टेट और नेशनल स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया, लेकिन कोरोना महामारी के कारण मेरी खेल यात्रा में कुछ समय का अंतर आ गया. इसके बाद 2022 में कोच नवल सर के मार्गदर्शन में दोबारा अभ्यास शुरू किया. प्रणव ने बताया कि यहीं से मेरी खेल यात्रा ने सही दिशा पकड़ी. साल 2023 में मैंने पहली बार एशियन पैरा गेम्स में हिस्सा लिया और क्लब थ्रो में गोल्ड मेडल जीता. इसके बाद 2024 में पेरिस पैरालंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए क्लब थ्रो में सिल्वर मेडल अपने नाम किया. अब एशियन पैरा गेम्स में दो गोल्ड मेडल जीतना मेरे लिए एक बड़ी उपलब्धि है.

बड़े टूर्नामेंट में मानसिक मजबूती भी जरूरी

प्रणव ने बताया कि किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा लेते समय मन में कई तरह के विचार आते हैं. पहली बार बड़े मंच पर उतरने पर खुशी के साथ घबराहट भी होती है. कभी लगता है कि अच्छा प्रदर्शन करेंगे, तो कभी यह चिंता होती है कि कहीं प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा तो क्या होगा. ऐसे में खिलाड़ी को खुद को मानसिक और भावनात्मक रूप से भी तैयार करना पड़ता है.

प्रणव ने बताया कि अपने मन में अच्छे प्रदर्शन की कल्पना करता था और सकारात्मक सोच बनाए रखने की कोशिश करता था. खेल में केवल शारीरिक ताकत ही नहीं, बल्कि मन को मजबूत रखना भी जरूरी है. प्रणव सूरमा ने बताया कि एशियन पैरा गेम्स में दो स्वर्ण पदक जीतने के बाद अब मेरा ध्यान आगामी वर्ल्ड चैंपियनशिप और पैरालंपिक पर है. इन प्रतियोगिताओं के लिए तैयारी करना चाहते हैं और देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना मेरा लक्ष्य है.

बेटे की सफलता पर पिता को गर्व, खानपान का भी रखते हैं ध्यान

प्रणव सूरमा के पिता संजीव शर्मा ने बताया कि बेटे की सफलता उनके लिए गर्व का विषय है. लोग अब मुझे प्रणव के पिता के रूप में पहचानते हैं और यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात है. बेटे की ट्रेनिंग और अभ्यास के दौरान मैं साथ रहता था जरूरत के हिसाब से उसे पूरा सहयोग देता था. प्रणव के खानपान का भी ध्यान रखा जाता है. प्रणव घर का बना खाना पसंद करता है और बाहर के खाने से परहेज करता है. संजीव शर्मा के मुताबिक, जब बेटा देश के लिए पदक जीतता है और विदेश में भारत का राष्ट्रगान बजता है, तो उस पल को शब्दों में बयां करना मुश्किल होता है.

दादाजी के निधन के बाद भी प्रतियोगिता में लिया हिस्सा

संजीव शर्मा ने बताया कि प्रतियोगिता के लिए रवाना होने के दौरान परिवार को बड़ा दुख सहना पड़ा. प्रणव के दादाजी का निधन हो गया था. दादाजी और प्रणव के बीच गहरा लगाव था, इसलिए इस घटना से वह काफी दुखी हो गया था. परिवार के लिए भी यह कठिन समय था. इसके बावजूद प्रणव ने प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का फैसला किया.

संजीव शर्मा ने बताया कि बेटे की इस उपलब्धि से पूरा परिवार खुश है. प्रणव ने अपने परिवार, ग्रीन फील्ड, फरीदाबाद, हरियाणा और पूरे देश का नाम रोशन किया है. वह चाहते हैं कि बेटा आगे भी इसी तरह देश के लिए पदक जीतता रहे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दो बार मिल चुके हैं प्रणव

प्रणव ने बताया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दो बार मिलने का अवसर मिल चुका है. खिलाड़ियों को सरकार की ओर से मिलने वाला सहयोग और प्रोत्साहन काफी महत्वपूर्ण है. उम्मीद जताई कि इस उपलब्धि के बाद प्रधानमंत्री से दोबारा मिलने का अवसर मिलेगा.

मेहनत और सकारात्मक सोच से हासिल की बड़ी कामयाबी

प्रणव की कहानी बताती है कि जिंदगी में मुश्किलें आने के बाद भी आगे बढ़ने की कोशिश नहीं छोड़नी चाहिए. हादसे के बाद डॉक्टरों की आशंका से लेकर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर रिकॉर्ड बनाने तक का उनका सफर मेहनत, सकारात्मक सोच और परिवार के सहयोग की मिसाल है.

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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