Haryana News:हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण की दिशा में बड़ा फैसला सामने आया है। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने गुरुग्राम और नूंह जिलों में Eleven Power Private Limited (EPPL) को दिया गया समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस रद्द कर दिया है। आयोग की कार्यकारी चेयरमैन मुकेश गर्ग और सदस्य शिव कुमार की बेंच ने यह आदेश जारी किया। इसके साथ ही आयोग ने कंपनी की सुनवाई की मांग को भी खारिज कर दिया।
दरअसल, HERC ने 19 अक्टूबर 2026 को अपने आदेश में Eleven Power Private Limited को गुरुग्राम और नूंह जिलों में 25 साल के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिया था। कंपनी ने 21 अक्टूबर को इस लाइसेंस पर अपनी सहमति भी दे दी थी। इसके बाद हरियाणा सरकार ने विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108(1) के तहत आयोग को लिखित निर्देश जारी किए।
26 अक्टूबर 2026 को जारी निर्देशों में राज्य सरकार ने स्पष्ट किया था कि हरियाणा में कहीं भी समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस न बनाया जाए और न ही उसे चालू किया जाए। सरकार ने इस फैसले के पीछे जनहित और राज्य की बिजली व्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का हवाला दिया था।
सरकार ने राजस्व और उपभोक्ताओं पर असर की जताई थी चिंता
हरियाणा सरकार का तर्क था कि निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देने से राज्य के राजस्व पर असर पड़ सकता है। सरकार ने आशंका जताई थी कि अधिक भुगतान करने वाले उपभोक्ता निजी कंपनी की ओर जा सकते हैं, जबकि किसानों और आम उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध कराने तथा क्रॉस-सब्सिडी की व्यवस्था का बोझ सरकारी बिजली वितरण कंपनियों पर बढ़ सकता है। सरकार ने बिजली निगमों के कर्मचारियों में संभावित असंतोष का मुद्दा भी उठाया था।
सरकार ने इन परिस्थितियों को जनहित के प्रतिकूल बताते हुए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस की व्यवस्था पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। अब HERC ने EPPL को दिया गया लाइसेंस रद्द कर दिया है। इस फैसले से गुरुग्राम और नूंह में कंपनी के माध्यम से समानांतर बिजली वितरण शुरू करने की योजना पर फिलहाल रोक लग गई है।











