फरीदाबाद: ट्रेन में सफर करते समय अगर आपका कीमती सामान चोरी हो जाए, तो सिर्फ अफसोस करने से काम नहीं चलेगा. ऐसी स्थिति में थोड़ी-सी लापरवाही आपके मुआवजे का रास्ता भी मुश्किल कर सकती है. कई यात्री सामान चोरी होने के बाद समझ नहीं पाते कि शिकायत कहां करें, कौन से दस्तावेज संभालकर रखें और रेलवे से नुकसान की भरपाई कैसे मांगें.
ऐसे में आपके लिए यह जानना जरूरी है कि चोरी की शिकायत दर्ज कराने से लेकर कानूनी कार्रवाई तक क्या प्रक्रिया अपनानी चाहिए. लोकल 18 ने इस बारे में फरीदाबाद सेक्टर-12 कोर्ट में बैठने वाले एडवोकेट मोहन तिवारी से खास बातचीत की. उन्होंने बताया कि सामान चोरी होने पर यात्री को सबसे पहले कौन से कदम उठाने चाहिए.
चोरी हो सामान, तुरंत यहां करें शिकायत
एडवोकेट मोहन तिवारी बताते हैं कि ट्रेन में सामान चोरी होने पर यात्री को सबसे पहले जीआरपी या आरपीएफ में लिखित शिकायत देनी चाहिए. इसके साथ रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों को भी घटना की जानकारी देनी चाहिए. शिकायत दर्ज कराने के बाद उसका नंबर और एफआईआर की कॉपी अपने पास सुरक्षित रखें. चोरी हुए सामान की पूरी सूची और उससे जुड़े बिल भी संभालकर रखें. इसके बाद यह देखना जरूरी है कि घटना में रेलवे की कोई जिम्मेदारी बनती है या नहीं.
मुआवजे का कर सकते हैं दावा
मोहन तिवारी बताते हैं कि अगर मामले में रेलवे की जिम्मेदारी बनती है, तो यात्री कानूनी प्रावधानों के तहत संबंधित फोरम या सक्षम न्यायिक मंच पर शिकायत कर सकता है. इसके लिए एफआईआर, शिकायत की कॉपी और अन्य जरूरी सबूत साथ रखने होंगे. दस्तावेजों के आधार पर ही आगे मुआवजे का दावा किया जा सकता है.
मोहन तिवारी बताते हैं कि सामान चोरी होने पर एफआईआर या संबंधित पुलिस शिकायत दर्ज कराना बेहद जरूरी है. यात्री को जीआरपी में लिखित शिकायत देनी चाहिए और आरपीएफ को भी सूचना देनी चाहिए. इससे चोरी की घटना का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार होता है और आगे कार्रवाई के लिए सबूत मिलता है.
खरीदारी की रसीद लगाना जरूरी
मोहन तिवारी बताते हैं कि चोरी हुए सामान की कीमत साबित करने के लिए उसके बिल, खरीदारी की रसीद और सामान की सूची जरूरी होती है. अगर मोबाइल या कोई अन्य महंगी वस्तु चोरी हुई है, तो उसका बिल भी मुआवजे के दावे में लगाया जा सकता है.
मोहन तिवारी बताते हैं कि रेलवे मुआवजा देने से इनकार करता है, तो सबसे पहले इनकार करने की वजह और मामले से जुड़े दस्तावेजों को समझना चाहिए. इसके बाद किसी अधिवक्ता से कानूनी सलाह लेकर आगे की कार्रवाई की जा सकती है. अगर मामले में कानूनी स्तर पर कोई चूक हुई है, तो परिस्थितियों के अनुसार अपील या रिवीजन का रास्ता अपनाया जा सकता है.
रेलवे की कोई कानूनी जिम्मेदारी बनती है या नहीं?
मोहन तिवारी बताते हैं कि यात्री अदालत का दरवाजा भी खटखटा सकता है, लेकिन हर मामले में मुआवजा मिलना तय नहीं है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और नुकसान के लिए रेलवे की कोई कानूनी जिम्मेदारी बनती है या नहीं. इसलिए यात्री को घटना से जुड़े सभी सबूत और दस्तावेज लेकर अधिवक्ता से सलाह लेनी चाहिए.









