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Manisha Bhanwala Life Story : अस्ताना में मनीषा भानवाला ने इतिहास रच दिया. वह कुश्ती विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गईं. जब उनके भाई और मां से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह बहुत गौरव महसूस कर रहे हैं.
पहलवान मनीषा भनवाला का परिवार.
जिंद : हरियाणा के जींद जिले के सिवाहा गांव की पहलवान मनीषा भनवाला ने शुक्रवार को एक इतिहास रचा है. उन्होंने कजाकिस्तान के अस्ताना में आयोजित विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर पहली भारतीय महिला पहलवान बनने का गौरव हासिल किया. वह सुशील कुमार के बाद विश्व चैंपियन बनने वाली देश की दूसरी पहलवान हैं. आइए जानते हैं उनका शुरू से सफर.
बनाया बड़ा रिकॉर्ड
बता दें, सुशील ने 2010 में पुरुषों के 66 किग्रा वर्ग का खिताब जीता था. वहीं, 59 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल मुकाबले में मनीषा ने अमेरिका की एबिगेल नेट को 8-6 से हराया. वह एक समय मुकाबले में 0-6 से पिछड़ रही थीं. मुकाबला शुरुआत से ही रोमांचक रहा, लेकिन मनीषा ने शानदार तकनीक, धैर्य और आत्मविश्वास के दम पर जीत अपने नाम की. उन्होंने शानदार वापसी करते हुए ‘पैन अमेरिकन’ चैंपियन को शिकस्त देकर भारतीय कुश्ती में महिला विश्व चैंपियन के लंबे इंतजार को खत्म कर दिया.
भाई ने बताया गर्व का पल
मनीषा के भाई रिंकू ने इसे भारतीय महिला कुश्ती के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि मेहनत हर कोई करता है, लेकिन लोगों की दुआओं की जरूरत होती है. हमारे साथ हर कोई था. किसी ने हमें कुछ गलत नहीं कहा. सब दुआ देते थे. हमारे लिए काफी गर्व की बात है. हमारा पूरा घर खेल में ही है. हर कोई यही बात करता है बस कि आगे क्या करना है, कैसे मोटिवेट करना है. घर की आर्थिक स्थिती पर भाई ने कहा कि मेरे मां बाप के लिए तो हार्ड थी, लेकिन उन लोगों ने कभी हमें किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी. बहुत मेहनत की है. हम सब मनीषा को खेलते हुए फोन में देख रहे थे. हमारे लिए सबसे खुशी की बात है.
मम्मी ने बताया संघर्ष
वहीं, मनीषा की मम्मी ने कहा कि बेटी की जीत पर मुझे बहुत गौरव है. हमने हमेशा से सोचा था कि वो ये कर लेगी. उसके पिता ने कहा था कि मेरे लिए गोल्ड लाना और आज वो ले भी आई है. उन्होंने आगे कहा कि जब उसके पिता साल 2022 में गुजरे तब वो हार मान गई थी. मगर, हमने कभी उसे पीछे हटने नहीं दिया. हम सबने उसे प्रोत्साहित किया. फिर वो खड़ी हुई और बहुत मेहनत की. आज वो ओलंपिक में मेडल ले आई है.
2015 में शुरू किया खेलना
बता दें, मनीषा रोहतक में जूनियर कोच के पद पर कार्यरत हैं. उन्होंने 2015 में खेल स्कूल निडानी में कुश्ती का अभ्यास शुरू किया था और 2022 से 2025 तक लगातार चार साल सीनियर एशियाई चैंपियनशिप में भारत के लिए पदक जीते. उनके पिता सुरेश का 2022 में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था. उनकी यह विश्व चैंपियनशिप जीत परिवार के लिए भी भावुक और गौरवपूर्ण पल है.
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