बकरियां चराने वाला लड़का बना IPS: पुलिस स्टेशन में हुई बेइज्जती ने जगाई आग, पहले ही प्रयास में पास की UPSC परीक्षा

On: November 23, 2025 5:27 PM
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IPS Story: महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के एक दूरदराज के गांव यमगे का एक युवक, जिसने बचपन में बकरियां चराईं और जीवन की कठिनाइयों से जूझा, आज देश की सबसे कठिन UPSC सिविल सेवा परीक्षा में सफलता पाकर करोड़ों युवाओं के लिए एक जीवंत मिसाल बन गया है। बिरुदेव सिद्धाप्पा ढोणे ने अपने पहले ही प्रयास में 2024 की यूपीएससी परीक्षा पास करते हुए 551वीं रैंक हासिल की है और जल्द ही एक IPS अधिकारी बनने जा रहे हैं।

पुलिस स्टेशन में हुई बेइज्जती बनी मोटिवेशन

बिरुदेव के इस ऐतिहासिक सफर की शुरुआत एक दर्दनाक घटना से हुई। एक दिन उनका मोबाइल फोन खो गया और वे शिकायत दर्ज कराने पुलिस स्टेशन पहुंचे। वहाँ उन्हें उचित सहायता नहीं मिली और उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया। इसी घटना ने उनके मन में एक IPS अधिकारी बनने की अदम्य इच्छा जगा दी। उन्होंने ठान लिया कि वह खुद एक दिन वह पद प्राप्त करेंगे जहाँ से वे आम लोगों को न्याय दिला सकें।

बचपन बीता बकरियां चराते हुए, पिता करते थे मजदूरी

बिरुदेव का जन्म कोल्हापुर जिले की कागल तहसील के यमगे गांव के एक गरीब धनगढ़ (चमार) परिवार में हुआ। उनके पिता सिद्धाप्पा ढोणे बकरियां चराकर और खेतों में मजदूरी करके परिवार का पेट पालते थे, जिनकी मासिक आय मुश्किल से 10-12 हजार रुपये थी। उनकी माँ अनपढ़ हैं। बचपन में बिरुदेव खंभे पर कंबल टांगकर, सिर पर गांधी टोपी और पैरों में भारी चप्पलें पहनकर बकरियां चराया करते थे।

दिल्ली में 22 घंटे पढ़ाई और सीमित संसाधनों से तैयारी

बिरुदेव ने अपनी स्कूली शिक्षा स्थानीय स्कूल से पूरी की और दसवीं व बारहवीं में तहसील स्तर पर टॉप किया। इसके बाद उन्होंने पुणे के एक इंजीनियरिंग कॉलेज से डिग्री हासिल की। UPSC की तैयारी के लिए वे दिल्ली आए, जहाँ उन्होंने अत्यंत सीमित संसाधनों में रहकर कड़ी मेहनत की। उन्होंने रोजाना 22 घंटे तक पढ़ाई की और अपने पिता द्वारा भेजे गए थोड़े से पैसों में गुजर-बसर किया।

रिजल्ट आते ही गांव में छा गई खुशी की लहर

जब उनका UPSC का रिजल्ट आया, तो उनके मामा के गांव में एक दोस्त दौड़ता हुआ आया और खबर सुनाई— “बिरुदेव, तू पास झाला रे!” यह सुनते ही उनके माता-पिता की आँखें खुशी के आँसूओं से भर गईं। अनपढ़ माता-पिता को बस इतना समझ आया कि उनका बेटा अब एक ‘साहब’ बन गया है। पूरे गांव में जश्न का माहौल छा गया।

बिरुदेव ढोणे की यह कहानी साबित करती है कि सच्ची लगन, कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के आगे कोई भी मुश्किल बाधा नहीं बन सकती।


वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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