अंबाला शहर रेलवे स्टेशन के बाहर बना एक ऐसा प्राचीन मंदिर, जहां कदम रखते ही श्रद्धालुओं को आस्था और इतिहास का अनोखा संगम देखने को मिलता है. बता दें कि करीब 200 साल से भी ज्यादा पुराना बताया जाने वाला यह श्री हनुमान मंदिर आज भी भक्तों के विश्वास का बड़ा केंद्र है. खास बात यह है कि रेलवे स्टेशन पर उतरने वाले कई यात्री अपनी मंजिल की ओर बढ़ने से पहले यहां माथा टेकना नहीं भूलते, और स्थानीय लोगों के साथ-साथ पंजाब और हिमाचल प्रदेश से आने वाले श्रद्धालु भी इस मंदिर में दर्शन करने पहुंचते हैं. दरअसल कहा जाता है कि संकटमोचन हनुमान के दरबार में अगर कोई भक्त सच्चे मन से अपनी मनोकामना लेकर आता है तो उसकी मनोकामना पूरी होने की आस्था लोगों के मन में वर्षों से बनी हुई है. यही विश्वास पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों को इस मंदिर से जोड़ता चला आ रहा है, और मनोकामना पूरी होने के बाद कई श्रद्धालु यहां भंडारा करवाते हैं और भगवान हनुमान का आशीर्वाद लेते हैं.
भगवान हनुमान को चोला चढ़ाने की परंपरा
वहीं इस मंदिर की सबसे खास धार्मिक परंपराओं में भगवान हनुमान को चोला चढ़ाना शामिल है. भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार हनुमान जी को चोला अर्पित करते हैं. इसके अलावा गुड़-चने और बूंदी का भोग लगाया जाता है. कई श्रद्धालु लौंग और इलायची भी भगवान को अर्पित करते हैं और मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार, पूजा के बाद चढ़ाई गई लौंग और इलायची श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में दी जाती है, जिसे वे अपने घर लेकर जाते हैं.
200 साल से ज्यादा पुराना बताया जाता है मंदिर
वहीं मंदिर के सेवादार पदम खन्ना ने लोकल 18 को बताया कि यह मंदिर करीब 200 साल से भी अधिक पुराना बताया जाता है. उन्होंने कहा कि अंबाला रेलवे स्टेशन पर आने वाले बहुत से यात्री मंदिर में माथा टेककर ही अपनी यात्रा आगे बढ़ाते हैं और मंगलवार और शनिवार को यहां श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है. कई बार रात करीब 10 बजे तक दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहती हैं.
दीवारों पर दिखती है रामायण की झलक
उन्होंने कहा कि मंदिर की प्राचीनता का अंदाजा यहां की दीवारों और कलाकृतियों को देखकर भी लगाया जा सकता है, क्योंकि मंदिर के अंदर आज भी पुराने डिजाइन और धार्मिक चित्र देखने को मिलते हैं. दीवारों पर रामायण से जुड़ी कई घटनाओं को चित्रकला के माध्यम से दर्शाया गया है. वहीं मंदिर की दीवारों पर लिखा श्री राम नाम श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है.
हनुमान जन्मोत्सव पर भव्य हो जाता है मंदिर
उन्होंने बताया कि इन चित्रों और राम नाम के बीच जब भक्त भगवान हनुमान के दर्शन करते हैं तो मंदिर का वातावरण बेहद आध्यात्मिक नजर आता है. पुराने समय की कला और धार्मिक परंपराओं का यह मेल मंदिर को अंबाला के अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान देता है. उन्होंने कहा कि वैसे तो मंदिर में रोजाना श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन मंगलवार और शनिवार को यहां विशेष भीड़ देखने को मिलती है. सुबह से लेकर रात तक भक्त भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना करते हैं और कोई चोला चढ़ाता है तो कोई गुड़-चने और बूंदी का भोग लगाकर अपनी मनोकामना मांगता है.
उन्होंने बताया कि हनुमान जन्मोत्सव के दौरान मंदिर का नजारा और भी भव्य हो जाता है, क्योंकि भगवा ध्वज, भक्ति गीत और जय श्री राम के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है और श्रद्धालु यहां से भगवा ध्वज लेकर अपने घर जाते हैं.
आस्था का खास पड़ाव बना मंदिर
वहीं अंबाला रेलवे स्टेशन के बाहर मौजूद यह प्राचीन मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, बल्कि शहर की धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा है. बदलते समय, आधुनिक इमारतों और भागती जिंदगी के बीच भी मंदिर की पुरानी पहचान आज तक कायम है. लेकिन स्टेशन से गुजरने वाले यात्रियों से लेकर आसपास के लोगों तक, हर किसी के लिए यह मंदिर आस्था का ऐसा पड़ाव बन चुका है, जहां कुछ पल रुककर भगवान हनुमान के दर्शन करने के बाद ही आगे बढ़ने की परंपरा आज भी जारी है.













