Lovely Professional University: पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी यानी LPU इन दिनों कैंपस में हुए विरोध-प्रदर्शन को लेकर चर्चा में है. प्रशासन ने यूनिवर्सिटी व उसके आस पास के इलाकों में इंटरनेट बैन कर दिया है. दरसअल यहां छात्र एक महिला छात्रा से कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर प्रदर्शन पर उतरे और मामला इतना बढ़ा कि कैंपस में तोड़फोड़, आगजनी और हाईवे जाम करने जैसी घटनाएं सामने आईं. पुलिस ने मामले में FIR दर्ज की है और जांच के लिए SIT बनाई गई है.
दूसरी ओर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने शुरुआती आरोपों को अफवाह और बेबुनियाद बताया था. हिंसा के बाद LPU ने 28 सितंबर से 10 दिनों के लिए नियमित कक्षाएं स्थगित कर दी हैं और मिड-टर्म परीक्षाएं भी अगले आदेश तक टाल दी हैं.इस पूरे विवाद के बाद एलपीयू एक बार फिर चर्चा में हैं.आइए जानते हैं कि यह यूनिवर्सिटी कब और कैसे बनी और इसके मालिक कौन हैं? तो आपको बता दें कि एलपीयू की स्थापना डॉ.अशोक कुमार मित्तल ने की.वह LPU के फाउंडर चांसलर हैं और राज्यसभा सांसद भी हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस LPU में आज 30 हजार से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं, उसकी कहानी की शुरुआत सीधे किसी बड़े विश्वविद्यालय से नहीं, बल्कि जालंधर की एक मिठाई की दुकान से जुड़ी है…
कौन हैं अशोक कुमार मित्तल?
डॉ.अशोक कुमार मित्तल पंजाब के जालंधर से हैं.उन्होंने गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की और LLB की डिग्री हासिल की.बाद में उन्हें छत्तीसगढ़ की अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर से मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी मिली है.मित्तल की कहानी सिर्फ एक विश्वविद्यालय बनाने की कहानी नहीं है.इसकी शुरुआत उनके परिवार के कारोबार से हुई और धीरे-धीरे यह सफर मिठाई, ऑटोमोबाइल और फिर शिक्षा के क्षेत्र तक पहुंचा.
500 रुपये उधार लेकर शुरू हुई थी कहानी
अशोक मित्तल के परिवार की कारोबारी कहानी 1961 से जुड़ी है.उनके पिता बलदेव राज मित्तल ने जालंधर में अपने एक दोस्त से 500 रुपये उधार लेकर मिठाई की दुकान शुरू की थी.इसका नाम रखा गया लवली स्वीट्स.उस दौर में पंजाब में मोटी बूंदी के लड्डू ज्यादा पसंद किए जाते थे लेकिन बलदेव राज मित्तल ने मोतीचूर के लड्डू बनाने शुरू किए.धीरे-धीरे इन लड्डुओं ने लोगों के बीच अपनी पहचान बना ली और दुकान का कारोबार बढ़ने लगा.
Lovely Group Story: एक दुकान से कई स्टोर तक पहुंचा लवली ग्रुप
परिवार के कारोबार में साफ-सफाई और पैकिंग पर भी खास ध्यान दिया जाता था.मिठाइयां ढकी हुई और साफ-सुथरी रखी जाती थीं.इससे ग्राहकों का भरोसा बढ़ा और कारोबार धीरे-धीरे फैलता गया.
1969 तक जालंधर में लवली स्वीट्स की तीन दुकानें हो चुकी थीं.आगे चलकर जालंधर और आसपास के इलाकों में 10 से ज्यादा मिठाई की दुकानें खुलीं.इसके बाद परिवार ने बेकरी के कारोबार में भी कदम रखा.यहीं से लवली स्वीट्स आगे बढ़कर लवली ग्रुप के रूप में विकसित हुआ.
अशोक मित्तल ने लॉ की पढ़ाई की
अशोक कुमार मित्तल ने गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की.पढ़ाई पूरी करने के बाद वह अपने परिवार के कारोबार से जुड़े.यहां उन्होंने अपने पिता से कारोबार चलाने की बारीकियां सीखीं लेकिन उनका लक्ष्य सिर्फ पारिवारिक कारोबार तक सीमित नहीं रहा.उन्होंने नए कारोबार में भी हाथ आजमाना शुरू किया और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में कदम रखा.
कंपनी ने पहले आवेदन ठुकराया, फिर मिली डीलरशिप
अशोक मित्तल के सफर का एक दिलचस्प किस्सा बजाज की डीलरशिप से जुड़ा है.उनके मुताबिक 1991 में उन्होंने बजाज स्कूटर की डीलरशिप के लिए आवेदन किया था.शुरुआत में उनका आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि लड्डू बेचने वाले परिवार को डीलरशिप देने की जरूरत नहीं है लेकिन जब कंपनी के अधिकारी जालंधर पहुंचे और उन्होंने मित्तल परिवार की कारोबारी क्षमता देखी तो तस्वीर बदल गई.इसके बाद उन्हें बजाज की डीलरशिप मिल गई.इसके बाद 1996 में मित्तल परिवार को मारुति की डीलरशिप भी मिली.आगे चलकर लवली ऑटो का कारोबार भी बढ़ा.
1999 में शिक्षा के क्षेत्र में रखा पहला बड़ा कदम
अशोक मित्तल के सफर में सबसे बड़ा मोड़ शिक्षा के क्षेत्र में आने के बाद आया.परिवार ने शिक्षा के जरिए समाज में योगदान देने की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया.वर्ष 1999 में इंटरनेशनल इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज यानी IIMS की शुरुआत की गई.इसे पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी यानी PTU से मान्यता मिली थी हालांकि LPU की आधिकारिक टाइमलाइन के अनुसार लवली इंटरनेशनल ट्रस्ट ने 2001 में फगवाड़ा में पहला बिजनेस और IT स्कूल शुरू किया और इसके बाद 2002 में इंजीनियरिंग संस्थान तथा फार्मेसी जैसे कार्यक्रम शुरू हुए. 2005 में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई और 2006 में उसे UGC की मान्यता मिली.
Lovely Professional University: 2005 में बनी LPU
शिक्षा के क्षेत्र में लगातार विस्तार के बाद वर्ष 2005 में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई. 2006 में विश्वविद्यालय को UGC से मान्यता मिली.यही वह दौर था जब एक कारोबारी परिवार का शिक्षा के क्षेत्र में लगाया गया दांव धीरे-धीरे देश के बड़े निजी विश्वविद्यालयों में बदलने लगा.
600 से ज्यादा एकड़ में फैला है कैंपस
LPU की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक विश्वविद्यालय का कैंपस 600 से ज्यादा एकड़ में फैला है.यहां 50 से ज्यादा देशों के विद्यार्थी पढ़ते हैं और विश्वविद्यालय कई विषयों में 200 से ज्यादा प्रोफेशनल प्रोग्राम उपलब्ध कराता है.LPU की आधिकारिक प्रोफाइल में 30 हजार से ज्यादा छात्रों और 50 से अधिक देशों के स्टूडेंटस के पढाई करने की बात कही गई है.अलग-अलग वर्षों में विश्वविद्यालय की ओर से 33 हजार से अधिक सक्रिय छात्रों की संख्या भी बताई गई है यानी जिस शिक्षा संस्थान की शुरुआत छोटे स्तर के संस्थानों से हुई थी वह दो दशक से भी कम समय में एक बड़े विश्वविद्यालय के रूप में विकसित हुआ.
पढ़ाई के साथ रिसर्च और इनोवेशन पर भी जोर
अशोक मित्तल के नेतृत्व में LPU ने सिर्फ डिग्री देने वाली यूनिवर्सिटी के बजाय रिसर्च, इनोवेशन और इंडस्ट्री कनेक्शन पर भी जोर देने की कोशिश की.विश्वविद्यालय की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक LPU को 2023 में NAAC से A++ ग्रेड और 4 में से 3.68 का स्कोर मिला.LPU के मुताबिक 2018 में वह ICAR से मान्यता पाने वाली भारत की पहली प्राइवेट यूनिवर्सिटी बनी थी.2019 में इंडियन साइंस कांग्रेस की मेजबानी भी की थी.
अब विवाद के बीच फिर चर्चा में आया LPU
आज LPU एक बड़े निजी विश्वविद्यालय के रूप में अपनी पहचान बना चुका है लेकिन कैंपस में हुए विरोध-प्रदर्शन ने उसे फिर सुर्खियों में ला दिया है.महिला छात्रा से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद छात्र प्रदर्शन पर उतरे.पुलिस ने एक छात्रा के बयान के आधार पर FIR दर्ज की और मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई.दूसरी तरफ विश्वविद्यालय प्रशासन ने शुरुआती दावों को गलत और अफवाह बताया था इसलिए मामले में सामने आए आरोपों और उनके पीछे की वास्तविक स्थिति का अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा.विरोध-प्रदर्शन के दौरान कैंपस में संपत्ति को नुकसान पहुंचने, आगजनी, पुलिस के साथ टकराव और जालंधर-फगवाड़ा नेशनल हाईवे के बाधित होने की घटनाएं सामने आईं. इसके बाद विश्वविद्यालय ने 28 सितंबर से 10 दिनों के लिए नियमित कक्षाएं स्थगित कर दीं और मिड-टर्म परीक्षाएं भी अगले आदेश तक टाल दीं.












