हरियाणा में किसानों के लिए बड़ा फैसला: IMT के लिए जमीन देने पर मिलेंगे 3 विकल्प, नई लैंड पूलिंग पॉलिसी तैयार

On: May 5, 2026 11:53 AM
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हरियाणा में औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के साथ-साथ किसानों को सीधे भागीदार बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में 10 नए इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप (IMT) विकसित करने की योजना के बीच लैंड पूलिंग पॉलिसी में अहम संशोधन पर सहमति बन गई है। नई नीति के तहत किसानों को उनकी जमीन के बदले अब एक नहीं, बल्कि तीन विकल्प दिए जाएंगे, जिससे वे अपनी सुविधा के अनुसार निर्णय ले सकेंगे।

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सरकार की इस नई पहल का मकसद साफ है—औद्योगिक परियोजनाओं में आने वाली जमीन से जुड़ी अड़चनों को खत्म करना और किसानों को विकास का भागीदार बनाना। प्रस्तावित पॉलिसी के मुताबिक पहला विकल्प यह होगा कि किसान अपनी जमीन के बदले विकसित IMT क्षेत्र में 50 प्रतिशत हिस्सा ले सकते हैं, जिससे उन्हें लंबे समय तक आर्थिक लाभ मिलता रहेगा।

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दूसरे विकल्प के तहत किसान बाजार दर के अनुसार सीधे मुआवजा राशि ले सकते हैं। वहीं तीसरा विकल्प उन्हें वैकल्पिक रूप से अन्य स्थान पर 1200 वर्ग मीटर का प्लॉट लेने का मौका देता है, जिसे वे एकमुश्त या हिस्सों में ले सकते हैं। यह व्यवस्था उन किसानों के लिए खास तौर पर लाभकारी मानी जा रही है, जो शहरी विस्तार के साथ जमीन का उपयोग बदलना चाहते हैं।

सरकार के मुताबिक, ई-भूमि पोर्टल पर जमीन की अलग-अलग दरों की मांग और विभिन्न क्षेत्रों में विवाद की स्थिति को देखते हुए यह बदलाव जरूरी था। नई पॉलिसी में सरकार, उद्योग और किसानों—तीनों के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।

इस नीति पर अंतिम मुहर के लिए इसे जल्द ही कैबिनेट बैठक में पेश किया जाएगा। यह निर्णय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह की मौजूदगी में हुई उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया है।

प्रदेश सरकार की योजना के तहत अंबाला, नारायणगढ़, जींद, सिरसा, हिसार, रोहतक, रेवाड़ी, नारनौल, सोहना और पलवल में नए IMT विकसित किए जाएंगे। इनमें जींद जिले का प्रोजेक्ट सबसे बड़ा माना जा रहा है, जो दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे और NH-152D के पास करीब 12 हजार एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित है।

नारायणगढ़ क्षेत्र में इस योजना को लेकर पहले ही सकारात्मक माहौल बन चुका है। यहां किसानों ने सरकार के साथ बैठक में जमीन देने पर सहमति जताई है, जिससे करीब 450 एकड़ भूमि उपलब्ध होने का रास्ता साफ हुआ है। सरकार ने इस क्षेत्र के लिए लगभग डेढ़ करोड़ रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा दर तय किया है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह नीति सही तरीके से लागू होती है, तो इससे हरियाणा में औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी और किसानों की आय के नए रास्ते खुलेंगे। यह मॉडल भविष्य में राज्य के विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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