हरियाणा में अब सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर जांच एजेंसियां सीधे कार्रवाई नहीं कर सकेंगी। ऐसे मामलों में अब जांच या पूछताछ से पहले सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। हालांकि, रंगे हाथ रिश्वत लेते पकड़े जाने वाले मामलों में पहले की तरह तत्काल कार्रवाई जारी रहेगी।
हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच को लेकर नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू कर दी है। इसके तहत यदि किसी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत मिलती है, तो बिना अनुमति न तो पूछताछ की जा सकेगी और न ही जांच शुरू की जा सकेगी।
केंद्र के निर्देशों के बाद लागू हुई नई SOP
भ्रष्टाचार के मामलों में जांच को लेकर केंद्र सरकार ने हरियाणा समेत सभी राज्यों को नए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों का अध्ययन करने के बाद हरियाणा सरकार ने सभी विभागों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 17A के अनुसार नई SOP लागू करने के निर्देश दिए हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह SOP सभी लंबित मामलों पर भी लागू होगी, जिनमें अभी तक धारा 17A के तहत अनुमति नहीं ली गई है।
मुख्य सचिव देंगे जांच की अनुमति
नई SOP के अनुसार, भ्रष्टाचार के मामलों में जांच की अनुमति मुख्य सचिव स्तर से दी जाएगी। वहीं, यदि मामला किसी अन्य जांच एजेंसी से जुड़ा है, तो संबंधित अधिकारी के प्रशासनिक विभाग को ही सक्षम प्राधिकारी माना जाएगा।
बेवजह प्रताड़ना रोकना है उद्देश्य
सरकार का कहना है कि इस SOP का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बिना पुख्ता सबूत के परेशान न किया जाए। पहले शिकायत की प्राथमिक जांच होगी, उसके बाद ही पूछताछ और विस्तृत जांच की अनुमति मांगी जाएगी।
पूरी प्रक्रिया सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से होगी, ताकि अनावश्यक देरी और भ्रम की स्थिति न बने।
तय समय में लेना होगा फैसला
नई SOP में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि जांच की अनुमति पर तीन महीने के भीतर फैसला लेना अनिवार्य होगा। विशेष परिस्थितियों में इसे अधिकतम एक महीने तक बढ़ाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए लिखित कारण बताना जरूरी होगा।
निचले कर्मचारियों के मामलों में राहत
SOP में यह भी प्रावधान किया गया है कि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों से जुड़े भ्रष्टाचार मामलों में जांच की अनुमति देने की जिम्मेदारी निचले स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपी जा सकती है। हालांकि, SOP के अनुपालन की अंतिम जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक विभाग की ही रहेगी।
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