हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (HBSE) ने छात्राओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक अहम और राहत भरा फैसला लिया है। अब 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा देने वाली छात्राओं को परीक्षा के लिए दूसरे गांव या शहर नहीं जाना पड़ेगा। जिन गांवों में परीक्षा देने वाली छात्राओं की संख्या 100 या उससे अधिक होगी, वहां उसी गांव में परीक्षा केंद्र स्थापित किया जाएगा। बोर्ड के इस निर्णय को छात्राओं और अभिभावकों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
इस फैसले को लागू करने के लिए बोर्ड ने सभी स्कूलों से ऐसे गांवों की सूची मांगी है, जहां परीक्षा देने वाली छात्राओं की संख्या निर्धारित मानक को पूरा करती है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि जिन गांवों में छात्राओं की संख्या 100 से कम होगी, वहां भी छात्राओं को दूर नहीं भेजा जाएगा, बल्कि नजदीकी गांव में ही परीक्षा केंद्र निर्धारित किए जाएंगे, ताकि उन्हें लंबी दूरी तय न करनी पड़े और किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की ओर से वर्ष 2026 की 10वीं और 12वीं की वार्षिक परीक्षाओं की तिथियां भी घोषित कर दी गई हैं। बोर्ड के अनुसार 12वीं कक्षा की परीक्षा 25 फरवरी 2026 से शुरू होकर 1 अप्रैल 2026 तक चलेगी, जबकि 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा 26 फरवरी से 20 मार्च 2026 तक आयोजित की जाएगी। इस वर्ष बोर्ड परीक्षाओं में 5.21 लाख से अधिक विद्यार्थी शामिल होंगे।
बोर्ड की ओर से परीक्षाओं को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और बेहतर माहौल में संपन्न कराने के लिए कई स्तरों पर तैयारियां की जा रही हैं। इसी कड़ी में यह फैसला छात्राओं की सुरक्षा, समय की बचत और मानसिक तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन पवन शर्मा ने बताया कि छात्राओं की सुरक्षा और उनकी परेशानी को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि जिन गांवों में परीक्षा देने वाली छात्राओं की संख्या न्यूनतम 100 या उससे अधिक है, वहां परीक्षा केंद्र उसी गांव में बनाया जाएगा, जिससे छात्राओं को दूसरे गांव या शहर में जाकर परीक्षा देने की मजबूरी नहीं रहेगी। बोर्ड का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्राएं बिना किसी डर और असुविधा के परीक्षा में शामिल हो सकें।
इस फैसले के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ने वाली छात्राओं और उनके अभिभावकों ने राहत की सांस ली है। माना जा रहा है कि इससे न केवल परीक्षा में उपस्थिति बेहतर होगी, बल्कि छात्राओं का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा और परीक्षाएं अधिक सुचारू ढंग से संपन्न हो सकेंगी।











