हरियाणा में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम के तहत स्टेट विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (SV&ACB) ने बड़ा एक्शन लिया है। पंचकूला यूनिट ने पुरातत्व विभाग की डिप्टी डायरेक्टर डॉ. बनानी भट्टाचार्य और IIT कानपुर से जुड़े व्यक्ति जावेद के खिलाफ रिश्वत, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश के आरोपों में मुकदमा दर्ज किया है। विजिलेंस की यह कार्रवाई विभागीय कामकाज में गंभीर अनियमितताओं की ओर इशारा करती है।
SV&ACB की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत में बताया गया है कि विजिलेंस ब्यूरो को पिछले साल सितंबर और नवंबर में दो अलग-अलग शिकायतें मिली थीं। इनमें एक शिकायत कथित भ्रष्टाचार और दूसरी डॉ. बनानी भट्टाचार्य की नियुक्ति से जुड़ी हुई थी। इन दोनों शिकायतों को कार्रवाई के लिए हरियाणा के मुख्य सचिव कार्यालय को भेजा गया था। मुख्य सचिव कार्यालय और विजिलेंस के महानिदेशक से मिले संचार के आधार पर पंचकूला में FIR दर्ज की गई।
शिकायत के अनुसार वर्ष 2023-24 के दौरान ग्राउंड पेनेट्रेशन रडार सर्वे (GPRS) के कार्य में टेंडर प्रक्रिया का उल्लंघन किया गया। आरोप है कि बिना किसी सार्वजनिक विज्ञापन के ‘पसंदीदा’ एजेंसी को काम सौंपा गया और खरीद प्रक्रिया को जानबूझकर खुले बाजार से छिपाया गया। यह भी सामने आया है कि किसी भी मीडिया प्लेटफॉर्म पर टेंडर नोटिस जारी नहीं किया गया, जिससे प्रतिस्पर्धा पूरी तरह खत्म हो गई। एक RTI के जवाब में विभाग द्वारा टेंडर के विज्ञापन न होने की बात स्वीकार किए जाने का भी दावा किया गया है।
FIR में कहा गया है कि GPRS सेवाओं की खरीद हरियाणा वित्त विभाग द्वारा तय प्रक्रियाओं के बिना की गई। डॉ. भट्टाचार्य पर केंद्रीय सतर्कता आयोग के पारदर्शिता मानकों और गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल से जुड़ी अनिवार्य गाइडलाइंस की अनदेखी करने के आरोप भी लगाए गए हैं। इसके साथ ही ‘मेक इन इंडिया’ नीति के उल्लंघन की बात भी सामने आई है, क्योंकि क्लास-I स्थानीय विक्रेताओं को बोली प्रक्रिया में मौका नहीं दिया गया।
शिकायत में सवाल उठाया गया है कि GPRS कार्य के लिए केवल IIT कानपुर को ही क्यों आमंत्रित किया गया, जबकि कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी और IIT रुड़की जैसे अन्य सक्षम और नजदीकी संस्थानों की फिजिबिलिटी पर विचार नहीं किया गया। आरोप है कि दूसरी योग्य एजेंसियों को जानबूझकर प्रक्रिया से बाहर रखा गया।
विजिलेंस के मुताबिक टोपरा कलां, प्राचीन टीला सुघ और प्राचीन टीला संधाये में किए गए GPRS कार्य के लिए 24.33 लाख रुपये का भुगतान किया गया, जबकि इसी तरह के काम के लिए एक निजी कंपनी ने करीब 14.16 लाख रुपये का कोटेशन दिया था। इससे सरकार को वित्तीय नुकसान और एजेंसी को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। FIR में यह भी दर्ज है कि IIT कानपुर से जुड़े जावेद ने छह साइटों के लिए 47.20 लाख रुपये का प्रस्ताव दिया था।
नवंबर 2025 में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को दी गई दूसरी शिकायत में डॉ. बनानी भट्टाचार्य की नियुक्ति को चुनौती दी गई थी। आरोप है कि उन्हें अनिवार्य शर्तों की अनदेखी करते हुए कॉन्ट्रैक्ट आधार पर डिप्टी डायरेक्टर बनाया गया और वर्षों तक उनका अनुचित तरीके से कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाया जाता रहा, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है।
मामले की पुष्टि करते हुए SV&ACB पंचकूला की पुलिस अधीक्षक पंखुड़ी कुमार ने बताया कि FIR दर्ज कर ली गई है और फिलहाल जांच प्रारंभिक चरण में है। अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है।











