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Faridabad News: फतेहपुर बिल्लौच गांव में दिल्ली-आगरा सिंचाई नहर पर बना अंग्रेजों के जमाने का करीब 125 साल पुराना पुल आज भी मजबूती से खड़ा है. वहीं इसी जगह के दूसरी तरफ करीब 10 साल पहले बनाया गया नया पुल अब जगह-जगह से खराब होने लगा है. पुल पर लोहे की रॉड दिखाई देने लगी हैं और सीमेंट की परत भी उखड़ रही है. इसे देखकर ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि अगर इतना पुराना पुल आज भी टिका है, तो नया पुल इतनी जल्दी खराब कैसे होने लगा.
फरीदाबाद: फतेहपुर बिल्लौच गांव में दिल्ली-आगरा सिंचाई नहर पर बना अंग्रेजों के जमाने का करीब 125 साल पुराना पुल आज भी मजबूती से खड़ा है. वहीं इसी जगह के दूसरी तरफ करीब 10 साल पहले बनाया गया नया पुल अब जगह-जगह से खराब होने लगा है. पुल पर लोहे की रॉड दिखाई देने लगी हैं और सीमेंट की परत भी उखड़ रही है. इसे देखकर ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि अगर इतना पुराना पुल आज भी टिका है, तो नया पुल इतनी जल्दी खराब कैसे होने लगा.
लोकल18 से बातचीत में स्थानीय निवासी बबलू हुड्डा बताते हैं कि 1600 में ईस्ट इंडिया कंपनी भारत आई थी. उस समय भारत दुनिया की करीब 25 फीसदी GDP में हिस्सेदारी रखता था. इसकी वजह यह थी कि उस समय भ्रष्टाचार नहीं था. कोई उद्योग नहीं था. ईमानदारी थी, भाईचारा था और प्यार-प्रेम था. तब लोग एक-दूसरे की जरूरत के हिसाब से जीते थे.
125 साल पुराने पुल पर नहीं आई खरोंच
अंग्रेजों को लेकर बबलू हुड्डा बताते हैं कि वे भारत को लूटने आए थे, लेकिन उनके समय में जो निर्माण हुआ, उसकी हालत आज भी देखी जा सकती है. 1947 में देश आजाद हुआ. 80 साल में 7,25,717 क्रांतिकारियों ने शहादत दी. उनकी शहादत के बाद देश को लेकर बहुत बड़े-बड़े वादे किए गए. अंग्रेजों के जमाने का यह पुल देख लीजिए. मेरे हिसाब से यह 125 साल से भी पुराना है. अब तक टिका हुआ है. इस पुल में खरोंच तक नहीं है. वहीं आज के समय में बनाया गया नया पुल देखिए. इसे बने हुए करीब 7-8 साल हुए हैं और इसकी हालत अभी से खराब होने लगी है. इसकी पगडंडी अपने आप नहीं उखड़ी है, बल्कि इसे उखाड़ा गया है. यहां नशा करने वाले कुछ युवक पुल को नुकसान पहुंचाते हैं. हमारे देश के युवाओं को नशे से बचाने की जरूरत है. भारत में युवाओं की बड़ी आबादी है. आज हमारे युवाओं को बेरोजगारी और नशे के जरिए कमजोर करने की बात सामने आती है. नशे की हालत में लोग पुल को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं. जो पुल 7-8 साल पहले बनकर तैयार हुआ था, उसकी पगडंडी तक उखाड़ दी गई है.
बगल में 10 साल पहले बना पुल होनें लगा जर्जर
बीरपाल बताते हैं कि मेरी उम्र 78 साल से ज्यादा हो गई है. जब यह पुल बना था, तब हमारी तो पैदाइश भी नहीं हुई थी. इसे बने हुए करीब 125 साल तो हो ही गए होंगे. चौड़ाई की बात करें तो इसकी चौड़ाई कम है. फरीदाबाद में इस नहर पर कई जगह अंग्रेजों के जमाने के पुल आज भी टिके हुए हैं. इन पुलों से लाखों लोगों का आवागमन होता है और यह अभी भी मजबूती के साथ खड़े हैं.
स्थानीय निवासी संदीप तेवतिया बताते हैं कि फरीदाबाद के चंदावली गांव और IMT इलाके में भी इस नहर पर पुराना पुल मौजूद है. जनता विकास के काम को उसकी मजबूती और टिकाऊपन से देखे. अंग्रेजों के जमाने के पुल 125 साल से चलते आ रहे हैं और आज भी उनमें कोई बड़ी खराबी नजर नहीं आती. एक तरफ 125 साल पुराना पुल है, जिसमें एक ईंट तक खराब नहीं हुई है. दूसरी तरफ यह नया पुल है, जिसे बने हुए करीब 10-12 साल ही हुए हैं और इसकी हालत देखी जा सकती है. जनता को आगे कोई भी फैसला लेते समय विकास के साथ उसकी मजबूती और टिकाऊपन पर भी ध्यान देना चाहिए.
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Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…
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